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    इंसेफेलाइटिस पीड़ित मासूम की मौत का मामला : मर गयी संवेदना और बच्चा भी

    गोरखपुर, 02/अगस्त/2017 (rubaruUPdesk) @www.rubarunews.com >>  डॉक्टर्स को धरती का भगवान कहते हैं, लेकिन जिला अस्पताल में सामने आई घटना ने इनके दूसरा रूप उजाकर कर लोगो के मन मे घृणा का भाव भर दिया है। इनकी मेरी हुई संवेदना के साथ ही इंसेफेलाइटिस पीड़ित एक मासूम की मौत हो गई।
                     इतना ही नहीं, वह रात भर खून की उल्टियां करता रहा और जिम्मेदार उसे पोंछते रहने की नसीहत देते रहे। किसी डॉक्टर ने न तो इसकी सुधि ली और न ही किसी नर्स ने विशेषज्ञ को बताने की जहमत ही उठाया। घटना बुधवार की सुबह तकरीबन 8:30 बजे हुई।
                    बेलीपार क्षेत्र के रामलोचन के दो वर्षीय पुत्र अविनाश साहनी को मंगलवार को बुखार हुआ था। रात के तकरीबन 11 बजे उसे नेताजी सुभाष चंद्र बोस जिला अस्पताल लेकर परिजन पहुंचे और इलाज शुरू हुआ,  लेकिन रात में अविनाश की हालत बिगड़ती गयी। कुछ देर के अंतराल पर वह खून की उल्टियां करता रहा। परिजन एक-एक पल की जानकारी मौजूद नर्सो को देते रहे, लेकिन उसने किसी विशेषज्ञ डॉक्टर को बुलाने की बजाय, तीमारदारों को खून को पोंछते रहने की हिदायत देती रही। आखिरकार, सुबह साढ़े आठ बजे मासूम ने मौत को गले लगा लिया।
    बोले परिजन
    रो-रोकर निढाल हो चुके मासूम के पिता रामलोचन ने बताया कि रात में उसके बेटे को भर्ती कर लिया गया था। उसे लगा था कि अब बेटा बाख जाएगा, लेकिन धीरे-धीरे उम्मीद, नाउम्मीदी में बदल गयी। डॉक्टर्स और स्टॉफ की लापरवाही ने बच्चे की जान ले ली।
    तिल-तिलकर मरता रहा मासूम, देखता रहा पिता
    उसकी हालत बिगड़ने लगी और पिता डॉक्टर बुलाने की मिन्नतें करता रहा, लेकिन ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ सिर्फ आश्वासन देते रहे। इतना ही नहीं, उसके बेटे के मुंह से खून आने पर नर्स ने कहा 'पोछते रहो।' बेबस पिता अपने जिगर के टुकड़े को तिल-तिलकर मरता देखने को विवश रहा।
    नियंत्रण से बाहर स्थिति होने पर रेफर कर झाड़ लिया पल्ला
    सुबह तक अविनाश की हालात नियंत्रण से बाहर बताई जाने लगी। डॉक्टर आये और बच्चे को रेफर कर दिया। इसके कुछ देर बाद ही बच्चे ने दम तोड़ दिया।
    हंगामा करते परिजन, देखते रहे लोग
    बेबस परिजनों ने इसके खिलाफ आवाज भी उठाई, लेकिन वहां मौजूद लोग सिर्फ कोरा आश्वासन देते रहे। उनका साथ देने की कोई कोशिश नहीं हुई। धीरे-धीरे परिजनों का रुदन थम गया और लापरवाह डॉक्टर्स एक बार फिर खुद को सही साबित करने में कामयाब हो गए।
    रात में बच्चे को देखा होता तो बच जाती जान
    मासूम के परिजनों का कहना है कि अगर रात में डॉक्टर ने बच्चे को देखा होता तो उसकी मौत नहीं हुई होती। लेकिन बहुत मिन्नतों के बाद भी किसी ने डॉक्टर को नहीं बुलाया।

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