• --New-- Click here to Watch News channel online.
  • 478 वर्ष पुराने श्री कृष्ण लीला की श्रृंखला में नागनथैया लीला का आयोजन | Rubaru news
    Powered by Blogger.

    478 वर्ष पुराने श्री कृष्ण लीला की श्रृंखला में नागनथैया लीला का आयोजन

    बनारस   23/10/2017 (rubarudesk) @www.rubarunews.com >> धर्म एवं आध्यात्म की नगरी वाराणसी में गंगा किनारे आस्था और विश्वास के अटूट संगम का नज़ारा सोमवार को देखने को मिला। तुलसीघाट पर गंगा कुछ समय के लिए यमुना में परिवर्तित हो गईं और गंगा तट वृन्दावन के घाट के रूप में बदल गए। यहां पर कार्तिक मास में होने वाले लगभग 478 वर्ष पुराने श्री कृष्ण लीला की श्रृंखला में नागनथैया लीला का आयोजन किया गया।
             आध्यात्मिक काशी में कई मेले ऐसे हैं जो किसी न किसी पौराणिक लीला से सम्बंधित हैं, इन्‍हीं में से एक बेहद ख़ास है नाग नथैयालीलाजिसमे बाल स्वरूप भगवान कृष्ण कालिया नाग का मर्दन करते हैं।इस लीला के लिए मां गंगा कुछ वक्‍त के लिए यमुना का रूप धारण कर लेती हैं और भगवान् श्रीकृष्ण यहां कालिया नाग के मर्दन की ऐतिहासिक लीला करते हैं।
          नाग नथैया त्योहार तुलसी घाट पर कार्तिक महीने में मनाया जाता है। यह नाग नथैया लीला के रूप में भी लोकप्रिय है। काशी के तुलसीघाट स्थित गंगा तट पर जब कालिया नाग का मर्दन कर भगवान् श्रीकृष्ण गंगा तट पर उभरे तो लोगों ने हर-हर महादेव के उद्घोष से उनका स्वागत किया।
    उपस्थित दर्शनार्थी ने बताया कि यहां हर साल आती हूं, ऐसा लगता है मानो की यह लीला हर साल पहली बार देख रही हूं। भगवान् का इस रूप में दर्शन पाकर सुख की अनुभूति होती है।
    इस लीला के आयोजक संकट मोचन मंदिर के महंत पंडित विशम्भर नाथ मिश्रा ने बताया कि पौराणिक कथा नाग नथैया का मूल महाभारत में वर्णित हैं। जब भगवान कृष्ण किशोर थे, वह यमुना नदी में अपनी गेंद को खो देते हैं और इसी नदी में एक विषैला नाग कालिया रहता था। उसके विष का इतना प्रभाव था की नदी का पूरा ज़ल ही उसके विष से काला प्रतीत होता था, लेकिन बाल कृष्ण नदी में कूद पड़ते हैं वापस अपने गेंद लाने के लिए। यही नहीं जिस नाग के विष से पूरा गांव भयभीत था उसी नाग के अहंकार को नष्ट करके भगवान् कृष्ण दिव्य रूप में सबके सामने प्रकट होते हैं। इसी लीला का मंचन यहां किया जाता आ रहा है जिसका इतिहास 400 वर्ष पुराना है।
    महंत पंडित विशम्भर नाथ ने बताया कि श्री कृष्ण लीला में लाखों भक्‍तों कि भीड़ जहां एक ओर आस्था और श्रद्धा में सारबोर रहती है, वहीं आज के युग में इस लीला का उद्देश्य मात्र यह है कि गंगा को कालिया नाग रूपी प्रदूषण से मुक्त करना है। जैसे कालियानाग के प्रदूषण से यमुना का जल जहरीला हो गया था और भगवान श्री कृष्ण ने प्रदूषण को दूर करने के लिए नाग नथैया लीला रची थी ठीक उसी प्रकार गंगा को प्रदूषण से मुक्त करने लिए इस मेले के द्वारा लोगो को जागृत करना ही इस लीला का प्रमुख उद्देश्‍य है।
           कला और संस्कृति की नगरी वाराणसी में ये परम्परा पिछले चार सौ वर्षों पुरानी है, जो की कार्तिक मास की नाग चतुर्थी को हर साल यहां होती है। इस लीला में बाल स्वरूप कृष्ण अपने बाल सखाओं के अनुरोध पर गंगा नदी में बनाये कदम के पेड़ से कूदकर कालिया नाग का मर्दन करके हाथ में बाल लेकर बंशी बजाते हुए अपना दर्शन यहां पर आये लोगों को देते है। नाग नथैया का ये मेला गोस्वामी तुलसी दास जी के द्वारा शुरू की गयी थी, तभी से ये लीला एक परम्परा के रूप में तुलसी घाट पर होती चली आ रही है।
               कार्यक्रम में परम सम्मानित काशी नरेश अनंत नरायण सिंह, महंत संकटमोचन मंदिर विश्वम्भर नाथ मिश्र, जिलाधिकारी वाराणसी योगेश्वर राम मिश्र, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक वाराणसी समेत लाखों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।@विकास राय


    Share on Google Plus

    About Rubaru News

    This is a short description in the author block about the author. You edit it by entering text in the "Biographical Info" field in the user admin panel.
      Blogger Comment
      Facebook Comment

    0 comments:

    Post a Comment