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    नशे की गर्त में खोया बचपन

    श्रीगंगानगर 24/अक्टूबर/2017(शंकर बंसारी) @www.rubarunews.com >>    नशे की गर्त में बचपन खोता  जा रहा है. बच्चो की सही परवरिश और देखभाल नहीं होने  से बच्चे नशे के आदि होते जा रहे है पैसे अधिक नहीं होने के कारण और नशे  के आदि होने के कारण नए  नए तरिके अपना रहे है  जो सस्ता और सुलभ है. जिनमें शराब से अधिक नशा प्रभावी  होता है. इस नशे  का यह  प्रयोग बच्चो के जीवन को खोखला कर  रहा है
          ऐसा ही एक मामला यहाँ लूणकरणसर के बाजार में देखने को मिला  जहाँ  3 बच्चे जिसमे 1 बच्चा मात्र 5 साल का दूसरा बच्चा 7 साल जो दोनों बच्चे मूकबधिर होने के कारण बोल भी नही सकते है।     तीसरा बच्चा 12 साल का था। तीनो बच्चे लूणकरनसर बाजार में अकेले घूमते काफी बार देखे गए है।  बड़े वाले बच्चे ने बताया की उनका पिता भी मूकबधिर है। माँ बाप से बिछ्ड़े हुए काफी दिन हो गए है।। माँ मजदूरी करने के लिए बाहर  गई हुई है।। पिता भी काफी दिनों से बाहर है। आज से कुछ महीने पहले इनके माँ बाप ढाणी भोपालराम गोशाला में काम करते थे। माँ बाप गोशाला छोड़ने के बाद बच्चे अकेले ही घूमने लग गए।।
           यह  तीनो बच्चे रबर चिपकाने वाले सोल्युशन का नशा करते है। यह बच्चे बाजार के आसपास से प्लास्टिक की बोतल व् कबाड़ चुनकर कबाड़ी को बेच कर पेसो से सोल्युशन खरीद कर उसे कपड़े पर लगा कर उसका नशा करते है। जब इतने छोटे बच्चे को इस हालात में देखा तो रूह कांप गई । इन इतनी छोटी उम्र के बच्चे को यह दिन क्यों देखने पड़ रहे है.?  अगर इनका सही समय पर लालन पालन नही हुआ तो आगे की उम्र में इनके साथ क्या होगा..?     
    क्या है यह नशा
       साइकिल टायर का पंक्चर बनाने वाला रबड़ सुलेशन नशा करने का साधन बन चुका है. सुलेशन को कपड़े में गीला  कर नाक से साँस  से  खींचा जाता है.  साँस से उपयोग  करने वाले को तत्काल नशा आ जाता  हैं. एक छोटे सुलेशन के डिब्बे से शराब के बड़े बाेतलों से अधिक नशा होता है बाजारों में यह आसानी से उपलब्ध हो जाता है.      
        यह बच्चे यह  नशा कहाँ से सीखें.?   यह बच्चे रोज यह सोल्युशन कहाँ से खरीदते है.? देने वाले दुकानदार ने एक बार भी क्यों नहो सोचा की यह छोटे बच्चे इसका क्या करंगे.?
        लोगों का कहना है कि काफी समय से ये बच्चे इसी तरह नशे में घूमते देखे गए है लेकिन आज तक किसी ने इनकी सुध लेने की नहीं सोची ओर तो ओर  कई स्वयंसेवी संस्थाये  जो बच्चो पर काम करने  के नाम पर सरकार से अनुदान ले रही है  उन्हें भी यह मासूम नजर नहीं आये  चाइल्ड हेल्प लाइन वालों को भी कभी ये नशीला बचपन नजर नहीं आया    माता पिता से दूर होने व् इन बच्चों की हालात ऐसी की काफी दिनों एक ही कपडे फटे पुराने मे कपडे पहने हुए है।। देखने से लगता है बच्चे काफी दिनों से नाए हुए भी नही है।
           लूणकरणसर में लोगो की मदद करने वाली टाइगर फाॅर्स के सदस्यों की नजर जब इन मासूमो पर पड़ी तो उन्होंने इन बच्चों का मेडिकल करवाने के बाद चाइल्ड हेल्पलाइन को सुपुर्द कर दिया। वंहा अब इन बच्चों की पूरी देखभाल की जिम्मेवारी चाइल्ड हेल्पलाइन की होगी।  बच्चे दर दर ना भटक कर एक जगह आराम से रह सकेंगे।
             


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