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    भाई बहन के अटूट रिस्ते की डोर का पर्ब है भैया दूज-डा पूनम गुप्ता

    मुंशीगंज अमेठी 21/10/2017(अर्जुन शुक्ल सागर) @ www.rubarunews.com >> भाई दूज के दिन बहने अपने घर में चौक पूर कर पूजा करेंगी और अपने भाई की लम्बी उम्र की कामना करेंगी इस पूजा का लाभ हाँसिल करने के लिये भाइयों को चाहिए कि आज वो अपनी बहन के घर जाकर भोजन अवष्य ग्रहण करें और धन्यवाद स्वरुप बहन को भेट दें
    अमेठी राजकीय बालिका इन्टर मिडीयट कालेज की प्रिंसिपल ने  डा पूनम गुप्ता जी से प्रमुख अशं भैया दूज पर  बातचीत मे डा पूनम गुप्ता कहती की आज नैतिक मूल्यों को मजबूती देने के लिए वैसे तो हमारे संस्कार ही काफी हैं लेकिन फिर भी इसे अतिरिक्त मजबूती देते हैं हमारे त्योहार। भाई दूज कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाए जाने वाला पर्व है। जिसे यम द्वितीया भी कहते हैं। भाईदूज में हर बहन रोली एवं अक्षत से अपने भाई का तिलक कर उसके उज्ज्वल भविष्य एवं खुशहाली की कामना करती है। इस अवसर पर भाई अपनी बहन को कुछ उपहार भी देता है।  डा पूनम यह बात जोर देते हुऐ इस त्योहार के पीछे एक कहावत पर बताया की यहा यम देवता ने अपनी बहन यमी (यमुना) को इसी दिन दर्शन दिया था, जो बहुत समय से उससे मिलने के लिए व्याकुल थी। अपने घर में भाई यम के आगमन पर यमुना ने प्रफुल्लित मन से उसकी आवभगत की थी। यम ने प्रसन्न होकर उसे वरदान दिया था कि इस दिन यदि भाई-बहन दोनों एक साथ यमुना नदी में स्नान करेंगे तो उनकी मुक्ति हो जाएगी। इसी कारण इस दिन यमुना नदी में भाई-बहन के एक साथ स्नान करने का बड़ा महत्व है। इसके अलावा यमुना ने अपने भाई से यह भी वचन लिया कि जिस प्रकार आज के दिन उसका भाई यम उसको मिला है, उसी प्रकार हर भाई अपनी बहन से मिले उसके घर जाए। तभी से भाईदूज मनाने की परंपरा चली आ रही है। भैया दूज की पूजा में बहनें पीढियों पर चावल के सतरंगी  कलर मे घोल के चावल चौक बनाती हैं। इस चौक पर भाई को बैठा कर उनके हाथों की पूजा करती हैं उसके ऊपर सिन्दूर लगाकर कद्दू के फूल, पान, सुपारी दृब्य आदि हाथों पर रखकर धीरे धीरे पानी हाथों पर छोड़ते हुए यह मंत्र बोलती हैं गंगा पूजे यमुना को यमी पूजे यमराज को, सुभद्रा पूजे कृष्ण को, गंगा यमुना नीर बहे मेरे भाई की आयु बढेवही एच ए एल कोरवा की सीमा सिहं गृहणी इटावा मैनपुरी की रहने वाली वह बताती है की कहीं-कहीं इस मंत्र के साथ भी हथेली की पूजा की जाती है। चैक के बगल में भाई के षत्रु के रुप में एक आकृति बनाई जाती है। जिसके मुंह पर बेर की डालो और उसके ऊपर दियाली रख कर बहने मूसल से सात बार प्रहार करती है। दिपाली फोडने के उपरान्त बेर की पत्तीयों को हाथ से तोडते हुये बोलती है भइया गये है,वही अमेठी कोरारी के अध्यापिका ममता सिहं भैया दूज पर एक गीत सुनाती है  खेलन कूदन कंटवा न लागे भइया गये है पढने लिखने कंटवा न लागे। भइया गये है नैकरी करने कंटवा न लागे। कही-कही पर इस प्रकार भी बोलने की प्रथा है। सांप काटे, बाघ काटे, बिच्छू काटे जो काटे सो आज काटेइस तरह के शब्द इसलिए कहे जाते हैं, क्योंकि ऐसी मान्यता है कि आज के दिन अगर भयंकर पशु काट भी ले तो यमराज के दूत भाई के प्राण नहीं ले जाएंगे। पूजा के पश्चात् बहने भाई का मुंह मीठा करने के लिए उन्हें माखन मिस्री खिलाती हैं। भारतीय में जितने भी पर्व त्योहार होते हैं वे कहीं न कहीं लोकमान्यताओं एवं पुराणों की धार्मिक कथाओं से जुडे होते हैं। इस त्योहार की भी एक पौराणिक कथा है। संध्या के समय बहनें यमराज के नाम से चैमुख दीया जलाकर घर के बाहर रखती हैं। इस समय ऊपर आसमान में चील उड़ता दिखाई दे तो बहुत ही शुभ माना जाता है। इस सन्दर्भ में मान्यता यह है कि बहनें भाई की लम्बी आयु क लिए जो दुआ मांग रही हैं उसे यमराज ने स्वीकार कर लिया है और चील जाकर बहनों का संदेश यमराज को सुनाएगा। यह त्योहार भाई बहन के स्नेह को सुदृढ़ करता है।



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