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    अब हम भई सुहागिन सांची

    अयोध्या 28/10/2017 (विकास राय) @www.rubarunews.com >> रसिक उपासना परम्परा के शीर्ष आचार्य स्वामी युगलानन्यशरण महाराज की 199 वी जयन्ती बहुत ही श्रद्धा पूर्वक भगवान राम की नगरी अयोध्या के पुण्य सलिला मां सरयू के तट पर स्थित प्रसिद्ध पीठ लक्ष्मण किला में मनायी गयी। अयोध्या सरयू तट पर स्थित लक्ष्मण किला में संस्थापक आचार्य की प्रतिमा का वैदिक विधि से पूजन किया गया।
         श्रृंगार माल्यार्पण एवम आरती का कार्यक्रम सम्पन्न किया गया। इसके पश्चात उनकी कृतियों का संगीत के साथ पाठ किया गया। इस संगीतमय पाठ में वर्तमान किलाधीश महंत मैथिलिरमण शरण महाराज, ब्यवस्थापक आचार्य मिथिलेशनंदीनी शरण,महंत अंजनी शरण, कानपुर के आचार्य कुमार गौरव समेत स्थापित संगीतज्ञ रामचंद्र शरण, श्रृंगारी एवम लाल जी मलिक समेत बडी संख्या में श्रद्धालु शामिल रहे।
           लक्ष्मण किलाधीश महन्त मैथिली रमण शरण जी ने बताया की ब्रह्मलीन युगलानन्यशरण महाराज की गणना सिद्ध संतो में होती है और उनका जीवन अनेक चमत्कारों से परिपूर्ण था।
    रहस्योपासना से संबंधित उनके रचित पद अनेकों ग्रंथो में संकलित है। नामकांति, रूपकांति, लीलाकांति एवं धामकांति उनकी प्रसिद्ध रचनाएँ है। इनमें उपासना के गहन अनुभव का विवेचन है। मिसाल के तौर पर उनकी यह पंक्ति-अब हम भई सुहागिन सांची, विसरी विषय विभूति वासना, नासी जगमित कांची।
                   महन्त मैथिली रमण शरण के अनुसार वे महान सन्त थे और लक्ष्मण किला का आध्यात्मिक परिसर उनके प्रति असीम अनुराग से युक्त है। आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण ने उनकी रचनाओं का हवाला देते हुवे कहा की आपकी रचनाएं साधकों में बरबस विश्वास भर देती है।


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