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    बोले लोग, ''स्वतंत्र एजेंसी जांचे, कैसे गिरी खजनी क्षेत्र की धुंआपार पानी की टँकी''

    गोरखपुर, 16/अक्टूबर/2017 (rubaruUPdesk) @www.rubarunews.com >> गांव में रहने वाले लोगो पर शुद्ध पेय जल उपलब्ध करने को सरकारें करोडो रूपये खर्च कर पानी की टंकी का निर्माण करा रही है। किन्तु कुछ जिम्मेदारों की शिथिलता सरकारों की इस मंशा पर पानी फेर रहा है। आलम यह है कि जहां पानी की टंकी एक साल से बनकर तैयार है तो वहां पानी सप्लाई नहीं हो रही है। कहने को पाइप लाइन के लिए बजट का अभाव है। कहीं कमीशनखोरी में लिप्त अधिकारियों की लापरवाही कार्य में बिलम्ब का कारण बन रही है।
              इसका जीता जागता उदाहरण खजनी क्षेत्र के  धुंआपार गांव में बनी पानी की टंकी रहा है। करोड़ों की कागत से तैयार होने वाली यह पानी की टंकी तैयार होने के पहले ही भ्रष्टाचार की बलि चढ़ चुकी है। इसके लिए संबंधित अभियंता और ठेकेदार को दोषी ठहराया गया था, लेकिन वरिष्ठों की कृपा ने इन पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने दी है। हाँ, इतना जरूर हुआ है कि बिना कारण बताए अधीनस्थों को निलंबित कर दिया गया है।
             अधिकारियों द्वारा गुणवत्ता की जाँच किये बगैर टंकी निर्माण को गति देते रहने से अब कई सवाल खड़े हुए हैं। लोग यह जानना चाहते हैं कि खजनी क्षेत्र में बनी पानी की आठ टंकियों का हाल भी कहीं इसी पानी की टंकी की तरह तो नहीं है। सवाल यह भी है कि कही निलंबन करने वाला अफसर ही तो दोषी नहीं है।
              लोगों में यह चर्चा है कि अपने दोष को छुपाने के लिए अधिनस्त अधिकारियो को बिना कारण बताये निलंबित कर दिया गया। शासन द्वारा किसी स्वतंत्र एजेंसी से प्रकरण की जाँच करानी चाहिए थी। दोषियों को सजा दिलाने और ग़लती की पुनरावृत्ति न होने के लिए यह जरूरी है।
    शुद्ध पेय जल को लेकर सरकार द्वारा सतर्कता बरती जा रही है गांव से लेकर शहर तक शुद्ध पानी पिने के लिए जागरूक किया जा रहा है। तमाम जानलेवा बीमारी पैदा हो रही है। दूषित जल से संक्रमित रोग की वजह से ग्रामीण गंम्भीर बीमारियो के चपेट में आ रहे हैं। इलाज कठिन है। जलजनित रोगों से बचने के लिए करोड़ों खर्च कर पानी की टंकी बनाई जा रही है। बावजूद इसके जिम्मेदारों की लापरवाही, जरूरतमंदों के हित के आड़े आ जा रहा है।
            धुआपार में ध्वस्त टंकी इसका उपयुक्त उदाहरण है।दो साल से बन रही धुआपार में जल निगम ने 01 करोड 57 लाख खर्च करके मुख्य गांव सहित डोडो इत्यादि गावो में शुद्ध पेय जल की आपूर्ति के लिए अंदर ग्राउंड पाइप बिछाया गया था, लेकिन टंकी के निर्माण में प्रयुक्त मोरंग बालू, ईटा, सरिया की घटिया क्वालिटी प्रयोग होने से मानक के विपरीत सामानों का प्रयोग होने लगा था। यह भी इसी वजह से हुआ था कि जल निगम के अधिकारियो ने अपनी आखे बंद कर ली थीं।
    इस संबंध में जलनिगम के अधिकारियों का कहना है कि समय-समय और जांच होती रहती है। संबंधित ठेकेदारों के साथ कर्मचारियों के भी पेंच कैसे जाते हैं। लेकिन कभी-कभी होने वाली गलतियां ही बड़ी गलतियों को जन्म दे देती हैं। लगातार आधार का काम जारी है।



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