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    राशि जमा होने पर ही डायवर्सन के प्रकरणों में दें आदेश: बीपी सिंह

    भिण्ड 26/अक्टूबर/2017 (rubarudesk) @www.rubarunews.com >> गुरुवार को प्रदेश के मुख्य सचिव बसंत प्रताप ङ्क्षसह ने चंबल संभाग के राजस्व अधिकारियों की बैठक लेते हुए कहा कि अदम्य पैरवी के प्रकरणों को तब तक खारिज नहीं करें जब तक पुख्ता तथ्य न मिलें। डायवर्सन के प्रकरणों में राशि जमा होने के बाद ही कोई आदेश जारी किए जाऐं। इस अवसर पर राजस्व प्रमुख सचिव अरूण पाण्डे, राजस्व एवं पर्यटन सचिव हरिरंजन राव, प्रमुख राजस्व आयुक्त रजनीश श्रीवास्तव, आयुक्त भू अभिलेख एमके अग्रवाल, चंबल कमिश्नर शिवानंद दुबे, अपर आयुक्त आरबी प्रजापति सहित कलेक्टर इलैया राजा टी, कलेक्टर मुरैना भास्कर लक्षाकार, कलेक्टर श्योपुर पन्नालाल सोलंकी सहित अन्य संभागीय राजस्व कर्मचारी मौजूद रहे।
          बैठक को संबोधित करते हुए सीएस श्री सिंह ने कहा कि संभागीय बैठक करने का मुख्य उद्देश्य शत प्रतिशत राजस्व प्रकरणों को आरसीएमएस (रेवेन्यू कोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम) साफ्टवेयर और दायरा पंजी में दर्ज कराए प्रकरणों को त्वरित गति से निराकृत करना है। उन्होंने कहा कि राजस्व की सभी सेवाऐं पूरी गुणवत्ता के साथ आम आदमी को उपलब्ध कराऐं, जिससे जनता को अपने राजस्व मामलों के निराकरण के लिए भटकना न पड़े। उन्होने कहा कि यदि कोई व्यक्ति नवम्बर के बाद पुराने अविवादित नामांतरण अथवा बंटवारा का प्रकरण लेकर आएगा, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ  जुर्माने की कार्यवाही कर उक्त राशि शिकायतकर्ता को दी जाएगी। इसीलिए सभी राजस्व अधिकारी पूरी गंभीरता के साथ राजस्व प्रकरणों का निराकरण करें। सीएस ने कहा कि पिछली बैठक के बाद अविवादित नामांतरण बटवारे के प्रकरणों के निराकरण में गति आई है, लेकिन सीमांकन के मामले अपेक्षा के अनुरूप निराकृत नहीं हो रहे है। उन्होंने कहा कि सीमांकन के लिए टीएस मशीन भी उपलब्ध कराई गई है। इन मशीनो के द्वारा सीमांकन कराया जाए। अगर इसके प्रशिक्षण की आवश्यकता हो, तो हर तहसील प्लेस पर मास्टर ट्रेनर्स भी उपलब्ध है।
    डायवर्सन प्रकरण में राशि कराऐं जमा:
    यहां श्री सिंह ने राजस्व अधिकारियों से कहा कि वह यत तय करें कि डायवर्सन के प्रकरणों में राशि जमा होने के बाद ही आदेश जारी किए जाऐं। ऐसा  करने  पर  संबंधित  राजस्व  अधिकारी कार्यवाही के लिए तैयार रहें। मुख्य सचिव ने संभाग के सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि पटवारी बस्तों का निरीक्षण करें और ऐसे पटवारी जिनके द्वारा अपने कार्य में रूचि नहीं ले रहे हैं उनके विरूद्ध एसडीएम कार्यवाही करें। उन्होंने कहा कि संभाग में बड़ी संख्या में आरसीएमएस राजस्व प्रकरण दर्ज हुए है, लेकिन इसके बावजूद भी पुराने प्रकरण दर्ज न होने की स्थिति में संबंधित राजस्व अधिकारी के विरूद्व कार्यवाही होगी। सीएस ने कहा कि सीमांकन के प्रकरणों का भी दर्ज न करना गंभीर मामला है। उन्होंने राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिए कि उनके द्वारा जो भी आदेश पारित किए जाए।,उनको अमल कराना भी राजस्व अधिकारी की जवाबदारी है। यहां मुख्य सचिव ने आरआई, पटवारी और रीडर को नियंत्रित करने के भी निर्देश दिए।
    बारीकी से हो राजस्व न्यायालय का निरीक्षण:
    इस अवसर पर प्रमुख सचिव राजस्व अरूण पाण्डे ने सभी राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिए कि पीठासीन अधिकारी के रूप में वे अपने न्यायालयों का बारीकी के साथ निरीक्षण करें। उन्होंने निर्देश दिए कि पटवारी हल्को के निरीक्षण हेतु अभियान संचालित किया जाए। उन्होने कहा कि प्रकरणों के निराकरण में जहां राजस्व शिविर लगाने की जरूरत हो, वहां शिविर लगाए। अधिनस्थ न्यायालयो से प्रकरण नहीं मिलना भी गंभीर बात है। अगर प्रकरण नहीं मिलते है, तो संबंधित के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाऐ। इस दौरान सचिव राजस्व विभाग हरिरंजन राव ने आरसीएमएस सॉफ्टवेयर के बारे में राजस्व अधिकारियों को अवगत कराया। उन्होंने कहा कि आगे से दायर पंजी भी समाप्त होगी, यह कार्य ऑनलाईन होगा। उन्होंने कहा कि आरसीएमएस में प्रकरण दर्ज नहीं होने पर संबंधित राजस्व अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।
    पटवारी बस्ते की हो जांच:

    मुख्य सचिव श्री सिंह ने बैठक में राजस्व अमले से कहा कि सभी पटवारियों के बस्ते की बारीकी से जांच की जानी चाहिए, जिससे उनकी कार्रवाई के बारे में सटीक जानकारी मिलें। इसके अलावा हर गांव में बी-1 पढकर सुनाया जाऐ। उन्होंने कहा कि बी-1 वाचन के बाद फौती के जो नामांतरण प्रकरण सामने आए, उनका तत्परता से निराकरण करें। उन्होंने यह भी कहा कि पटवारी रिपोर्ट के अभाव की बजह से यदि कोई राजस्व प्रकरण लंबित पाया गया , तो संबंधित राजस्व अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। यहां उन्होने गायब राजस्व प्रकरणों पर दोषी कर्मचारियों पर प्रकरण दर्ज कराने, राजस्व के रिक्त पदों की जानकारी देने, मृतकों के फौती नामांतरण करने के भी निर्देश दिए। 
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