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    राष्ट्र संत ख्यात कथा वाचक मोरारी बापू ने कहा शांति देती है मानस कथा, तारक मंत्र है राम नाम

    वाराणसी.23/10/2017 (rubarudesk) @www.rubarunews.com >>  उत्तर वाहिनी मां गंगा के एक ओर बाबा विश्वनाथ की मौजूदगी और दूसरी और नटराज हनुमान और परम गुरू से साक्षात्कार व धर्म चर्चा वाराणसी में संत कृपा सनातन संस्थान की ओर से आयोजित रामकथा महाकुंभ की आनंद त्रिवेणी में दूर दूर से आये भक्तगण रामकथा के आनंद में सरोबार है। वे लौकिक जीवन के सुक्ष्म चमत्कारिक षब्द भावों से रूबरू हो रहे है। वही व्यासपीठ की शरण में खुद को समर्पित कर आल्हादित है। बापू के प्रति अनंत श्रद्धाभाव हजारों अनुनायियों की उपस्थिति महाकुंभ सा नजारा साकार करता है। क्या अमीर,क्या गरीब, क्या संत, क्या फकीर, हरेक यहां शिष्य़ भाव से हरिकथा सुनकर स्वयं को धन्य महसूस कर रहे हैं। कुछ ऐसा ही नजारा बन रहा है मणिकर्णिका घाट के सामने गंगा पार सतुआ बाबा की गौशाला डोमरी में। मानस मसान कथा के दूसरे दिन राष्ट्र संत मोरारी बापू ने भक्तों से पाश्चात्य संस्कृति व सभ्यता से बचने की सलाह दी। कहा, पाश्चात्य से पागलपन आ रहा है और हम 24 घंटे वैज्ञानिक उपकरणों के उपयोग में व्यस्त है। हमें अति आवश्यक होने पर ही वैज्ञानिक उपकरणों का उपयोग करना चाहिए अथवा उसके उपयोग का समय निर्धारित रखना चाहिए। जितना समय आज हम वैज्ञानिक उपकरणों के उपयोग करते है यदि उतना समय हरि को देंगे तो हमारा उद्धार निश्चित है। मानस पढेंगे तभी तो शुद्ध रहेंगे। कलियुग में राम प्रत्यक्ष नही है लेकिन उनका नाम है। राम नाम परम तत्व व परम सत्य है और तारक मंत्र है।
            मोरारी बापू की 800वी रामकथा मानस मसान के दूसरे दिन रविवार को व्यासपीठ से हजारों जनमैदिनी को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय संत मोरारी बापू ने कहा कि मृत्यु ध्रुव सत्य है जिसे रोका नही जा सकता है। मृत्यु का अफसोस नही बल्कि प्रसन्नता होनी चाहिए। जो निश्चित है उसका आनंद अवश्य होना चाहिए। मृत्यु निश्चित है और हमें हमेशा अपना विवेक बरकरार रखना चाहिए। जहां परमात्मा की ईच्छा होती है वहीं निश्चितता होती है। निश्चित मात्र हरि ईच्छा होती है। हमारी ईच्छा का कोई वजूद नही। निश्चितता को स्वीकार करने के हम स्वाभाविक आदि होते है। मृत्यु आदमी को निष्कपट घोषित कर देती है। मृत्यु में कोई आवरण नही होता है। जैसा आता है वैसा ही जाता है। हर घर मसान है मसान को प्रेत निवास कहा गया है और कोई घर ऐसा नही है जहां मृत्यु ना हुई हो। हर घर एक मसान है और प्रत्येक जागरूक व्यक्ति को वियोग में तथा बुद्ध पुरूष को संयोंग में घर मसान लगता है। मसान एक पवित्र शब्द है बस एक बार आदमी को समझ में आ जाये तो उसका उद्धार हो जाता है। जो मरने को राजी हो जाए उसे ही मसान जैसी जगह मिलती है। मसान की महिमा जानने से शिव महिमा का ज्ञान मिलता है। मसान हमारे लिए एक अद्भूत प्रेरणा है।
    सुख और आनंद अलग है
               हम सुख और आनंद दोनो को एक ही मान लेते हैं जो गलत है। सुख और आनंद दोनो अलग अलग है। हमें सुख तो मिलता है लेकिन आनंद नही मिलता है। सुख उसे कहते है जहां दुख दब जाय और आनंद उसे कहते है जहां दुख दूर हो जाय। जहां दुख जड़ से मिट जाये वही आनंद है। वर्तमान का आनंद लें जिसे मृत्यु का आनंद लेना है उसे सुमिरन बढाना चाहिए। मरण मीठा है और विवेकी आदमी वह है जो हंसते हंसते कबूल करे। भूत वह है जो भूतकाल का शोक करे और प्रेत वो है जो भविष्य की चिंता करे। सृष्टि के साथ ही हम सब भूत है। जाग्रत व्यक्ति के लिए विवेक होना चाहिए। पनघट जीवन का प्रतीक और मरघट मृत्यु का प्रतीक है। दोनो शब्द ब्रह्म है, नाम भेद है लेकिन तत्व एक ही है। श्मशान हमारे लिए पितृ गुरू है जो हमारे माता पिता शिव पार्वति का घर है।
    राम नाम है तारक मंत्र
         मानस कथा हमें शांति देती है और मानस की प्रत्येक चैपाई एक मंत्र है। मानस परस्पर स्नेह का आदान प्रदान करता है। स्कन्द पुराण के काशी काण्ड में इसकी विस्तृत चर्चा की गई हैं। तारक मंत्र सिर्फ और सिर्फ महादेव शिव के पास है। ऐसा माना जाता है कि जब आदमी मरता है तब उसका दायां कान ऊंचा हो जाता है। इसके पीछे मान्यता है कि भगवान शिव तारक मंत्र देते है जिससे उसकी मुक्ति हो जाती है। तारक मंत्र से जाती हुई आत्मा को ज्ञान की प्राप्ति हो जाती है।
    परम यज्ञ के सूत्र
         शास्त्रों में वैदिक और पौराणिक यज्ञ का उल्लेख मिलता है। मसान एक परम यज्ञ है। यज्ञ पहले महायज्ञ बनता है और बाद में परम यज्ञ बनता है। परम यज्ञ के सात सूत्र होते है। जहां अग्नि हो, समिधि हो, शांति हो, मंत्र हो, घृत हो, बलिदान हो और निर्दम हो वहां परम यज्ञ होता है। जिस घर में शांति हो, विवेक की अग्नि हो, कुतर्क, दंभ, पाखण्ड की समिधि हो, सुबह शाम प्रार्थना हो, परस्पर स्नेह रूपी घी हो तो उस घर में परम यज्ञ होता है। ममता तो हो लेकिन ममता का बलिदान भी हो।
    चारो ओर राम का रैला
           कथा के दूसरे दिन श्रोताओं की आस्था में और प्रगाढता दिखी। पंडाल,भोजनशाला, सडके गंगा के विभिन्न घाट से सहित विभिन्न स्थानों पर चहुं ओर राम राम जपते श्रोताओं की टोलियां नजर आ रही है। कही विश्राम, कही भोजन तो कही कीर्तन में डूबे श्रोता आनंदोत्सव का आभास करा रहे है। दूर दराज से भी लोग हजारों की संख्या में कथा स्थल पर पहंच रहे है। हर आयु वर्ग कर रहा है रसपान कथा का श्रवण करने हर आयु वर्ग के लोग बडी संख्या में पहुंच रहे है। कई निःशक्तजन भी ह्वील चैयर या अन्य के सहारे के माध्यम से कथा श्रवण को आ रहे है। बालक, युवा, बुजुर्ग सभी वर्ग कथा का रसपान कर रहे है। हजारों श्रोताओं की मौजूदगी के बावजूद कथा स्थल पर श्रोतागण बापू के हर प्रसंग व प्रवचन को बडे ही ध्यान से श्रवण कर रहे है। भक्त उठा रहे है प्रभु प्रसाद का आनंद कथा श्रवण को बाबा विष्वनाथ की नगरी वाराणसी पहुंच रहे हजारों श्रोता प्रतिदिन सुबह एवं शाम को प्रभु प्रसाद का निःषुल्क भरपूर लाभ ले रहे है।
    विविध संस्कृतियों का रस संगम
              मोरारी बापू की रामकथा में देश विदेश के विभिन्न शहरों सहित उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराश्ट, मध्यप्रदेष के अलग अलग हिस्सों से आये श्रद्धालु यहां आनंद रस लूट रहे है। वही उत्तरांचल के देहात से आता जनसैलाब भी कथा सागर में समाकर संस्कृतियो का मेल करा रहा है। कही ठेठ बनारसी बोली कानों में गूंज रही है तो कही गुजराती, मराठी व मेवाती प्रभु प्रसंगों की चर्चा का जरिया बनी हुई है। संत कृपा सनातन संस्थान की ओर से आयोजित रामकथा में दूसरे दिन रविवार को कथा के मुख्य आयोजनकर्ता मदन पालीवाल, टस्टी प्रकाष पुरोहित, रवीन्द्र जोशी, रूपेश व्यास, विकास पुरोहित, मंत्रराज पालीवाल, सतुआ बाबा सहित कई गणमान्य अतिथियों ने व्यासपीठ पर पुष्प अर्पित किए तथा कथा श्रवण का लाभ लिया।@विकास राय


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