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    माइक्रो फाइनेंस कंपनियों द्वारा गरीब महिलाओं का शोषण

    दुबहड़ 15/10/2017 ( संजय राय) @www.rubarunews.com >> आज कल कुकुरमुत्ते की तरह फैलीं माइक्रो फाइनेंस कंपनियां समूह के नाम पर गरीब महिलाओं को उच्च ब्याज दर पर ऋण देकर उनका आर्थिक  सामाजिक एवं मानसिक शोषण कर रही हैं। ये कंपनियां 10 से 20 गरीब महिलाओं का समूह बनाकर प्रत्येक महिला को 15 से 25 हजार तक लगभग 26 प्रतिशत उच्च ब्याज दर पर ऋण प्रदान करती हैं। जिसे 7 या चौदह दिनों पर समान किश्तों मे समूह के किसी महिला सदस्य के दरवाजे पर मीटिंग कर ॠण की वसूली की जाती है। ये कंपनियां ॠण देते समय प्रत्येक महिला सदस्यों से ॠण का बीमा कराने के नाम पर 1000 से 1500 रुपये एवं ॠण प्रक्रिया शुल्क के नाम पर 400 से 500 रूपये पहले ही नकद के रूप में ले लेती हैं। जिसकी बीमा कम्पनी के तरफ़ से कोई भी पक्की रसीद गरीब महिला सदस्यों को नहीं दी जाती हैं। मीटिंग के समय यदि  आर्थिक अभाव के कारणवश कोई महिला समूह के किश्तों का भुगतान नहीं कर पाती हैं तो समूह के पदाधिकारियों द्वारा गरीब महिलाओं को विभिन्न तरीकों से प्रताड़ित किया जाता है। समूह के महिला सदस्यों द्वारा यह कहने के बाद भी कि अगले सप्ताह में किश्त का भुगतान कर दूंगी । फिर भी समूह के पदाधिकारी महिला सदस्यों को विभिन्न तरीकों से अपमानित करते हैं। यहाँ तक कि महिलाओं के घर पर जाकर  कर अभद्र भाषा का प्रयोग करने से बाज नहीं आते। ये कंपनियां महिलाओं का फर्जी पहचान पत्र भी बनाकर जबरदस्ती ॠण प्रदान करती हैं। समूह के नाम  पर ॠण लेने वाली महिला सदस्यों के पति सुनील,मंतोष,सुभाष,,राजू,बिहारी,कृष्णा,पंचानन्द,भुवाल आदि ने बताया कि समूह का ॠण प्रदान करते समय ये कंपनियां तरह तरह का लालच देकर ॠण तो प्रदान कर देती हैं। लेकिन बाद में ॠण वसूली के समय अपने तरीके से मनमानी करती हैं। हम लोगों की पत्नियों ने सैटिन क्रेडिटकेयर नेटवर्क लिमिटेड जगदीश पुर द्वारा 20,000 रुपए  एवं एस वी क्रेडिटलाइन प्राइवेट लिमिटेड गड़वार रोड द्वारा 30,000 रुपए का ॠण प्रदान किया गया है। जिसे क्रमशः  570 रुपए प्रत्येक 14 दिनों पर लगभग  52 किश्तों एवं 1050 रुपए प्रत्येक 14 दिनों पर लगभग 52 किश्तों में  चुकाना है। ये कंपनियां घटते ब्याज दर पर ब्याज नहीं लेकर एक ही बार में पूरे मूलधन पर 52 किश्तों अर्थात लगभग 26 महीने के ब्याज का निर्धारण करती हैं। जबकि हम लोग जितना किश्त जमा करते जाते हैं,मूलधन से उतना रुपये घटाकर ब्याज लेना चाहिए। ॠण का बीमा कराने के नाम पर लिए गए रूपये का किसी भी बीमा कंपनी का रसीद नहीं दिया जाता है। ॠणदाता कंपनियों द्वारा हम लोगों के पत्नियों एवं परिवार को आर्थिक,मानसिक एवं सामाजिक शोषण करने के कारण हम लोगों की पत्नियां काफी सदमें में हैं

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