• --New-- Click here to Watch News channel online.
  • बक्सर जनपद का पंचकोशी परिक्रमा सह पंचकोश मेला 8 नवम्बर से प्रारंभ | Rubaru news
    Powered by Blogger.

    बक्सर जनपद का पंचकोशी परिक्रमा सह पंचकोश मेला 8 नवम्बर से प्रारंभ

    बक्सर 9/11/2017(विकास राय) @www,rubarunews.com>> बक्सर जनपद का पंचकोशी परिक्रमा सह पंचकोश मेला 8 नवम्बर से प्रारंभ हो गया है। पहला पडाव बुधवार को अहिरौली में रहा।विश्व विख्यात बक्सर जनपद के इस मेले को लोग लिट्टी-चोखा मेला के नाम से जानते हैं। यह मेला अब बक्सर जिले की पहचान बन चुका है। गैर प्रदेशों और जिलों में बसे लोग इस तिथि को याद रखते हैं। एक दूसरे का समाचार पूछने वाले लोग अक्सर सवाल करते हैं। बक्सर में लिट्टी चोखा मेला कब बा। वह तिथि अब आ गई है। शास्त्रीय मान्यता के अनुसार मार्ग शीर्ष अर्थात अगहन माह के कृष्ण पंचमी को मेला प्रारंभ होता है। पहले दिन अहिरौली, दूसरे दिन नदांव, तीसरे दिन भभुअर, चौथे दिन बड़का नुआंव तथा पांचवे दिन चरित्रवन में लिट्टी चोखा-खाया जाता है। इस बार 12 नवम्बर को चरित्रवन में लिट्टी-चोखा बनेगा।
    मेले की परिक्रमा में शामिल लोग इन पांचों स्थान पर जाते हैं। विधिवत दर्शन पूजन के बाद प्रसाद ग्रहण करते हैं। ऐसी मान्यता है कि भगवान राम विश्वामित्र मुनी के साथ सिद्धाश्रम आए थे। यज्ञ में व्यवधान पैदा करने वाली ताड़का व मारीच-सुबाहू को उन्होंने मारा था। इसके बाद इस सिद्ध क्षेत्र में रहने वाले पांच ऋषियों के आश्रम पर वे आर्शीवाद लेने गए। जिन पांच स्थानों पर वे गए। वहां रात्रि विश्राम किया। मुनियों ने उनका स्वागत जो पदार्थ उपलब्ध था, उसे प्रसाद स्वरुप देकर किया। उसी परंपरा के अनुरुप यह मेला यहां आदि काल से अनवरत चलता आ रहा है।
    पहला पड़ाव - गौतम ऋषी का आश्रम, जहां उनके श्राप से अहिल्या पत्थर हो गयी थी। उस स्थान का नाम अब अहिरौली है। इसे लोग हनुमान जी की ननिहाल भी कहते हैं। यहां जब भगवान राम पहुंचे। तो उनके चरण स्पर्श से पत्थर की शीला बनी अहिल्या जी श्राप मुक्त हुयी। वैदिक मान्यता के अनुसार अहिल्या की पुत्री का नाम अंजनी था। जिनके गर्भ से हनुमान जी का जन्म हुआ। शहर के एक किलोमीटर दूर स्थित इस गांव में अहिल्या मंदिर है। जहां मेला लगता है। यहां आने वाले श्रद्धालु पकवान और जलेबी प्रसाद स्वरूप ग्रहण करते हैं।
    दूसरा पड़ाव नदांव में : पंचकोश मेले का दूसरा पड़ाव नदांव में लगता है। जहां कभी नारद मुनी का आश्रम हुआ करता था। आज भी इस गांव में नर्वदेश्वर महादेव का मंदिर और नारद सरोवर विद्यमान है। यहां आने वाले श्रद्धालु खिचड़ी चोखा बनाकर खाते हैं। ऐसी मान्यता है कि नारद आश्रम में भगवान राम और लक्ष्मण जी का स्वागत खिचड़ी -चोखा से किया गया था।
    तीसरा पड़ावयह स्थान कभी भार्गव ऋषि का आश्रम हुआ करता था। जहां भगवान द्वारा तीर चलाकर तालाब का निर्माण किया गया था। इस स्थान का नाम अब भभुअर हो गया है। यहां भार्गवेश्वर महादेव का मंदिर था। जिसकी पूजा अर्चना के बाद लोग चूड़ा-दही का प्रसाद ग्रहण करते हैं। यह स्थान शहर से तीन चार किलोमीटर दूर सिकरौल नहर मार्ग पर स्थित है।
    चौथा पड़ावशहर के नया बाजार से सटे बड़का नुआंव गांव में चौथा पड़ाव लगता है। जहां उद्दालक मुनी का आश्रम हुआ करता था। यहीं पर माता अंजनी व हनुमान जी रहा करते थे। यहां सतुआ मुली का प्रसाद ग्रहण किया जाता है।
    पांचवा पड़ाव पंचकोश मेले का पांचवा पड़ाव शहर के चरित्रवन में लगता है। जहां विश्वामित्र मुनी का आश्रम हुआ करता था। यहां लिट्टी-चोखा खाकर मेले का समापन होता है। यह जिले का बहुत ही खास मेला है। इसका अंदाज इसी से लगा सकते हैं। जले के हर घर में समापन के दिन लिट्टी चोखा बनता है। क्या अमीर क्या गरीब। इसका भेद पंचकोश के दिन जैसे मिट जाता है। इतना ही नहीं बक्सर के लोग जो देश या विदेश में बसते हैं। इस तिथि को यही भोजन बनाकर ग्रहण करते हैं।


    Share on Google Plus

    About Rubaru News

    This is a short description in the author block about the author. You edit it by entering text in the "Biographical Info" field in the user admin panel.
      Blogger Comment
      Facebook Comment

    0 comments:

    Post a Comment