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    बाजरा बेचने में किसानों को छूट रहा पसीना, सक्रिय हैं दलाल

    भिण्ड 29/नवंबर/2017 (rubarudesk) @www.rubarunews.com >>  प्रदेश सरकार की भावांतर योजना में बाजरा की फसल शामिल न होने के बाद प्रशासन ने इसकी खरीदी के लिए अलग से सेंटर बनाए। लेकिन यहां अपनी फसल बेचने आए किसानों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। स्थानीय आईटीआई पर बनाए गए खरीद केन्द्र पर किसानों को दो दिन तक लाईन में लग कर अपनी फसल बेचने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
                स्थानीय आईटीआई पर विपणन सहकारी संस्थाओं के जरिए बाजरा फसल की खरीदी के लिए केन्द्र बनाऐ गए हैं। जहां खरीद करने के लिए कांटों से तुलाई की जा रही है। किसानों की सहूलियत के लिए संचालित यह केन्द्र पर्याप्त सुविधाऐं उपलब्ध नही करा पा रहे हैं। सेन्ट्रल वेयर हाऊस पर पिछले एक सप्ताह से संचालित यह खरीदी केन्द्र अव्यवस्थाओं के चलते फेल साबित हो रहा है। यहां बाजरा की बिक्री करने के लिए आए किसान खरीदी न होने से लंबे समय तक इंतजार करने पर मजबूर है। हालात यह है कि किसानों को दिन भर लाईन में लग पसीना बहाते हुए अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है। मंगलवार-बुधवार को यहां हालात और भी बदतर दिखाई दिए, जहां बीते दो दिनों में सैकड़ों ट्रेक्टर की लाईन लगी रही। किसान यहां रात के समय भी ठंड के सर्द मौसम में खुले आसमान के नीचे गुजारने पर मजबूर है। कई किसान प्रशासन की अव्यवस्था को लेकर खासे नाराज दिखाए दिए।
    सक्रिय दिख रहे दलाल:
    गौरतलब है कि किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए आरंभ की गई बाजरा खरीदी पात्रों के लिए कम बल्कि दलालों के लिए ज्यादा लाभकारी साबित हो रही है। कृषि उपज मण्डी में जहां बाजरे का मूल्य 1000 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास है, जबकि शासन द्वारा इसका समर्थल मूल्य 1425 रुपए प्रति क्विंटल तय किया है। ऐसे में यहां सक्रिय दलाल भोले-भाले किसानों को ठगते हुए परेशानी से बचने का लालच देकर कम कीमत पर उनका बाजारा खरीद कर समर्थन मूल्य पर बेच रहे हैं, जिसमें खरीद केन्द्रों पर तैनात कर्मचारियों की मिली भगत स्पष्ट रुप से सामने आ रही है।
    तौल कांटों की कमी:
    ज्ञात हो विपणन सहकारी संघ द्वारा संचालित इस बाजरा खरीद केन्द्र पर तीन इलैक्ट्रॉनिक तौल कांटे लगाए गए हैं। जिन पर बेहद धीमी गति से बाजरा की तौल की जा रही है। ऐसे में किसानों की बढ़ती संख्या के चलते यहां अव्यवस्थाऐं हावी हो रही हैं। इस बीच बाजारा खरीदी की अंतिम तिथि नजदीक आने के कारण किसानों को बाजरा बिक्री न होने का भय सता रहा है। 
    इनका कहना है:
    - पिछले दो दिन से भारौली से बाजरा बेचने के लिए लाईन में लग कर अपनी बारी का इंतजार कर रहा हूं। लेकिन यहां पर्याप्त इंतजाम न होने से खुले आसमान के नीचे रात गुजरना मजबूरी बन गई है।
    राघवेन्द्र सिंह, किसान
    - तौल कांटों पर धीमी गति से काम हो रहा है। यहां सिफारिशी फोन आने पर बगैर नंबर के दलालों से खरीदी कर ली जाती है, जिससे किसानों को नंबर आने में देरी हो रही है।

    दलपत सिंह, किसान
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