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    अगहन मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी के दिन हुआ था भगवान राम-सीता का विवाह

    गाजीपुर 22/11/2017(विकास राय) www.rubarunews.com >> अयोध्या वासी श्री श्री 1008 महामण्डलेश्वर भागवत् वेत्ता मानस मर्मज्ञ श्री शिव राम दास जी फलहारी बाबा ने बताया की मार्गशीर्ष (अगहन) मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी को भगवान श्रीराम तथा जनकपुत्री जानकी (सीता) का विवाह हुआ था। तभी से इस पंचमी को 'विवाह पंचमी पर्व' के रूप में पूरे देश में बहुत ही श्रद्धा पूर्ण तरीके से मनाया जाता है। इस दिन भारत में कई स्थानों पर विवाह पंचमी को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।
          पौराणिक धार्मिक ग्रथों के अनुसार इस तिथि को भगवान राम ने जनक नंदिनी सीता से विवाह किया था। जिसका वर्णन श्रीरामचरितमानस में महाकवि गोस्वामी तुलसीदासजी ने बड़ी ही सुंदरता से किया है। 
          श्रीरामचरितमानस के अनुसार- महाराजा जनक ने सीता के विवाह हेतु स्वयंवर रचाया। सीता के स्वयंवर में आए सभी राजा-महाराजा जब भगवान शिव का धनुष नहीं उठा सकें, तब ऋषि विश्वामित्र ने प्रभु श्रीराम से आज्ञा देते हुए कहा- हे राम! उठो, शिवजी का धनुष तोड़ो और राजा जनक का संताप मिटाओ।
           गुरु विश्वामित्र के वचन सुनकर श्रीराम तत्पर उठे और धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने के लिए आगे बढ़ें। यह दृश्य देखकर सीता के मन में उल्लास छा गया। प्रभु की ओर देखकर सीताजी ने मन ही मन निश्चय किया कि यह शरीर इन्हीं का होकर रहेगा या तो रहेगा ही नहीं।
          माता सीता के मन की बात प्रभु श्रीराम जान गए और उन्होंने देखते ही देखते भगवान शिव का महान धनुष उठाया। इसके बाद उस पर प्रत्यंचा चढ़ाते ही एक भयंकर ध्वनि के साथ धनुष टूट गया। यह देखकर सीता के मन को संतोष हुआ।
          फिर सीता श्रीराम के निकट आईं। सखियों के बीच में जनकपुत्री सीता ऐसी शोभित हो रही थ‍ी, जैसे बहुत-सी छबियों के बीच में महाछबि हो। तब एक सखी ने सीता से जयमाला पहनाने को कहा। उस समय उनके हाथ ऐसे सुशोभित हो रहे थे, मानो डंडियों सहित दो कमल चंद्रमा को डरते हुए जयमाला दे रहे हो। तब सीताजी ने श्रीराम के गले में जयमाला पहना दी। यह दृश्य देखकर देवता फूल बरसाने लगे। नगर और आकाश में बाजे बजने लगे।
          श्रीराम-सीता की जोड़ी इस प्रकार सुशोभित हो रही थी, मानो सुंदरता और श्रृंगार रस एकत्र हो गए हो। पृथ्वी, पाताल और स्वर्ग में यश फैल गया कि श्रीराम ने धनुष तोड़ दिया और सीताजी का वरण कर लिया। इसी के मद्देनजर प्रतिवर्ष अगहन मास की शुक्ल पंचमी को प्रमुख राम मंदिरों में विशेष उत्सव मनाया जाता है।
        बिहार के पौराणिक शहर बक्सर में यह कार्यक्रम बहुत ही उल्लास के साथ मनाया जाता है। परम पूज्य मामा जी के द्वारा शुरू कराये गये सिय पिय मिलन समारोह को पूज्य मामा जी के ब्रह्मलीन होने के पश्चात सीता राम मंदिर बक्सर के श्री महन्त राजाराम जी महाराज अब हर साल सम्पन्न कराते है।
           बक्सर में आयोजित सीता राम बिबाह के अवसर पर मलूकपीठाधीश्वर श्री राजेन्द्र दास की कथा का सभी श्रद्धालु भक्त इस समय श्रवण कर रहे है। जनकपुर नगर भ्रमण फुलवारी एवम धनुष यज्ञ का कार्यक्रम देखने के लिए देश के कोने कोने से श्रद्धालु महर्षि विश्वामित्र की पौराणिक नगरी बक्सर में पहुंचे है।माली की भूमिका पूज्य मामा जी के बाद अब उनके शिष्य राजाराम जी बहुत ही कुशलता पूर्वक निभाते है।

        फलहारी जी महाराज ने आगे बताया की मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम-सीता के शुभ विवाह के कारण ही यह दिन अत्यंत पवित्र माना जाता है। भारतीय संस्कृति में राम-सीता आदर्श दम्पत्ति माने गए हैं। जिस प्रकार प्रभु श्रीराम ने सदा मर्यादा पालन करके पुरुषोत्तम का पद पाया, उसी तरह माता सीता ने सारे संसार के समक्ष पतिव्रता स्त्री होने का सर्वोपरि उदाहरण प्रस्तुत किया। इस पावन दिन सभी को राम-सीता की आराधना करते हुए अपने सुखी दाम्पत्य जीवन के लिए प्रभु से आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए।



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