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    पद्मावती फिल्म विवाद.. आक्रामक रुख अपनाने से कुछ नहीं होगा, पद्मिनी इश्यू को मिल बैठकर सुलझाएं : अरविंद सिंह मेवाड़

    उदयपुर 16/11/2017 (KrishnaKantRathore) @www.rubarunews.com >> - पद्मावती फिल्म पर पूरे राजस्थान में जहां उबाल आया हुआ हैं , वहीं मेवाड़ पूर्व राजघराने के अरविन्द सिंह मेवाड़ ने चुप्पी तोडते हूए पद्मावती फिल्म पर चल रहे विवाद को लेकर कहा कि, "आक्रामक रुख अपनाने से कुछ नहीं होगा, पद्मिनी इश्यू को मिल बैठकर सुलझाया ना सकता हैं, जो परिपक्वता होगी।" ऐसा मेवाड़ ने एक वीडियो संदेश में , जो इस प्रकार हैं... 
                 "मेरा निवेदन है कि इस प्रकरण को बैठकर सुलझाया जाए। इस प्रकार के रोष और आक्रामक रुख को अपनाने से कुछ नहीं होता। आक्रामक रोष अपनाने से सभी पक्षों को हानि है। इसमें किसी की जीत है, किसी की हार है। ऐसा कोई माध्यम ढूंढा जाए कि जिससे बातचीत से इस मसले को सुलझाया जा सके। यही परिपक्व तरीका है। यह कोई मजाक नहीं। यह चित्तौड़ और राजस्थान ही नहीं, पूरे देश की नारी अस्मिता का प्रश्न है। हमारे सारे राजपूत भाई और हम खुद इस विषय पर फिल्म बनाने के विरोध में हैं, क्योंकि आप कितना भी कर लें, असलियत आप नहीं बता पाएंगे। असलियत बताएंगे तो फिल्म नहीं बनेगी। बनेगी तो बहुत ही रूखी होगी। आप जिस मकसद से फिल्म बनाना चाहते हैं, आपका मकसद पूरा नहीं होगा और बॉक्स ऑफिस में मुनाफा नहीं दिला पाएगी। आपके लिए तो ये व्यापार है। मैं चाहता हूं, आप ऐसी फिल्म बनाएं जिससे किसी समाज की भावनाएं आहत हों। पूरा समाज उमड़ा हुआ है। आज बच्चे इतिहास नहीं पढ़ते। इतिहास की पुस्तकों में से बहुत सा इतिहास निकाल दिया गया है। बड़ा दुख है, ये बच्चे इतिहास को फिल्मों के माध्यम से देखते हैं और उसी को वे पत्थर की लकीर मानते हैं। लिहाजा, बालीवुड के प्रॉड्यूसर की जिम्मेदारी है कि वह इस इस पत्थर की लकीर की जिम्मेदारी ले और ऐसा कुछ नहीं करे, जिससे युवा पीढ़ी इतिहास को गलत ढंग से ले ले और फिर वह फिल्म की कहानी को  ही सच मान ले। मैंने यह फिल्म नहीं देखी है। इसलिए दावे के साथ नहीं कह सकता, फिर भी जो कुछ देखने को मिला है, ये ऐतिहासिक तथ्यों से बहुत परे है और इस कारण ये आर्टिस्टिक लाइसेंस की परिभाषा में भी नहीं सकती है।"
                       सिटी पैलेस उदयपुर से जारी लिखित प्रेसनोट और एक ऑडियो में अरविंदसिंह मेवाड़ के बेटे लक्ष्यराजसिंह मेवाड़ ने फिल्म निर्माता-निदेशक संजयलीला भंसाली से प्रश्न किया है कि क्या रानी पद्मावती जैसे पवित्र विषय को मनोरंजन के रूप में पेश करना किसी निर्देशक की जिम्मेदाराना कार्यशैली है?
    फिल्म के कलाकारों से पूछा है कि क्या उन्होंने मर्यादा में रहकर सच्चे कलाकार होने का फर्ज निभाया है या फिर पैसा ही सब कुछ होता है? 
                    लक्ष्यराजसिंह मेवाड़ ने पक्ष रखते हुए कहा है कि इतिहास के साथ छेड़छाड़ मेवाड़ बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने फिल्म को लेकर तोड़फोड़ और विरोध करने वालों को नसीहत देते हुए यह भी कहा है कि किसी काल्पनिक फिल्म के विरोध में गैर जिम्मेदाराना बयानबाजी करना तो आसान है लेकिन समाधान निकालना सबसे बड़ी शिक्षा है।  
                   लक्ष्यराजसिंह मेवाड़ ने मनोरंजन के नाम पर इतिहास, संस्कृति और जन भावनाओं को आहत करने से रोकने के लिए सख्त कानून बनाने की मांग की है। इससे पहले मेवाड़ राजघराने की तरफ से महेंद्र सिंह मेवाड़ और उनके बेटे विश्वराजसिंह बयान जारी कर पद्मावती की निंदा कर चुके हैं। 
    अजमेर दरगाह दीवान-पद्मावती देश का गौरव, मुस्लिम दें विरोध में राजपूत समुदाय का साथ
                ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के दीवान जैनुअल आबेदीन ने पदमावती फिल्म का विवाद पर टिप्पणी करते हूए संजय लीला भंसाली के आचरण को विवादित लेखक सलमान रश्दी और तस्लीमा नसरीन की तरह बताया है।
                  दीवान ने कहा कि फिल्म निर्देशन संजय लीला भंसाली फिल्म पद्मावती के जरिए देश का सौहार्द और संस्कृति को खत्म करने पर तुले हैं और धार्मिक भावनाएं भड़का कर देश में माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। दीवान जैनुअल आबेदीन अली खान ने गुरुवार को बयान जारी कर कहा कि फिल्म निर्माता निर्देशक संजय लीला भंसाली बेवजह विवाद पैदा कर रहे हैं। इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पदमावती फिल्म के निर्माण से राजपूत समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। फिल्म में पदमावती और अलाउद्दीन खिलजी के कथित चित्रण से धार्मिक भावनाएं भड़क सकती है।
    राजपूत समुदाय का समर्थन करें मुस्लिम,   फिल्म पर रोक लगाए सरकार.....
    चित्तौड़ की महारानी पदमावती को देश और राजपूत समाज की वीरता और सम्मान का प्रतीक बताते हूए दरगाह दीवान जैनुअल आबेदीन ने कहा कि मुस्लिम समुदाय को भी राजपूत समुदाय को समर्थन देना चाहिए।
    दीवान ने पद्मावती में राजपूतों के गौरवशाली इतिहास को धूमिल करने और तोडऩे-मरोडऩे का प्रयास बताते हूए भारत सरकार से तत्काल फिल्म प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग की।
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