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    शरीर के विनाश में आत्मा का विनाश मत मानो: विनिश्चय सागर

    भिण्ड 8/नवंबर/2017 (rubarudesk) @www.rubarunews.com >> शरीर के विनाश में आत्मा का विनाश मत मानों क्यों कि यह शरीर नश्वर है और आत्मा अमर है इसलिए शरीर तो नष्ट हो जाना है आत्मा एक शरीर (पर्याय) के बाद दूसरे पयार्य में चली जाती है इसलिए इस पवित्र आत्मा को आध्यत्म धर्म के मार्ग पर लगाओं। यह बात आचार्य विनिश्चय सागर महाराज ने बुधवार को आयोजित धर्मसभा में कही।
         
    चैत्यालय मंदिर में आयोजित धर्मसभा में आचार्य ने कहा कि व्यक्ति मंदिर जी में भगवान के दर्शन के लिए जाता है तो न जाने कितनी अपेक्षाओं को लेकर जाता है कि मेरा कारोबार, दुकान अच्छी चलने लगे, मेरे घर में बेटा हो और सुन्दर बहु मिले ऐसी अपेक्षा लेकर नहीं बल्कि भगवान को वितरागता को देखकर में भी आप जैसा बनंू जिस प्रकार से भगवान की चेतना थी (आत्मा) वैसी ही आपकी चेतना है बस आपको समझने की जरूरत है। उन्होने कि मंदिर में एक जगह सफाई न होने पर लोग मंदिर के अध्यक्ष और मंत्री को फोन लगाने लगते है कि इस स्थान पर सफाई या झाड़ू नहीं लगी है मंदिर के माली को बोलने लगे कि यहा सफाई क्यू नहीें हुई लेकिन उस स्थान की सफाई आप स्वयं भी कर सकते है जिसका फल अनंत मिलेगा जब व्यक्ति दुकान खोलता है तो दुकान की सफाई के साथ सामने सडक़ की भी सफाई (झाड़ू) लगा देता है। इस अवसर पर सुरेन्द्र जैन, अशोक जैन, सुरेश जैन, रतनलाल जैन, आकाश जैन, अशोक विजपुरी, सुनील जैन, मनोज जैन, महेन्द्र जैन, निशा जैन, हेमा जैन, रेनू जैन, बविता जैन, सीमा जैन, मधु जैन, आदि बढ़ी संख्या में श्रद्धालूगण उपस्थित थे। 
    मंदिर कमेटी ने चड़ाया श्रीफल:

           चैत्यालय जैन मंदिर में कुछ दिनों के लिए प्रवास पर आये आचार्य विनिश्चय सागर महाराज को मंदिर कमेटी ने सकल जैन समाज के साथ आचार्य श्री को श्रीफल चड़ाया। इस दौरान कमेटी सदस्यों ने निवेदन किया कि इस वर्ष की महावीर जयंती आपके सानिध्य में हो ऐसी कामना करके श्रीफल चड़ाया इस अवसर पर चैत्यालय मंदिर कमेटी के पदाधिकारी एवं सकल जैन समाज के लोग उपस्थित थे।
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