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    रेत खनन व भण्डारण की शिकायत- कार्रवाई के नाम पर जांच, रिपोर्ट और प्रतिवेदन लेकिन नतीजा शून्य

    भिण्ड 27/नवंबर/2017 (rubarudesk) @www.rubarunews.com >> नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के नियम और प्रदेश सरकार के सख्त नियमों के बावजूद भी जिले की नदियों में रेत उत्खनन किया जा रहा है। इसको लेकर कई बार सुबूतों के साथ की गई शिकायतों के बाद जांच कर रिपोर्ट तैयार कर कार्रवाई का दावा किया जाता है लेकिन प्रशासन द्वारा इसके बाद कार्रवाई के नाम पर लीपापोती कर दी जाती है।
               
    जिले की नदियों में रेत के अवैध उत्खनन का खेल बदस्तूर जारी है। हाल ही में भारौली के देहमा रेत खदान पर मैसर्स वेदांश मिनरल्स कंपनी द्वारा खुलेआम निमयों की धज्जियां उड़ाते हुए नदी के बीचों बीच पुल निर्माण कर लिया। कंपनी द्वारा यहां अनुमति प्राप्त जगह छोड़ कर अन्य स्थानों से रेत का खनन किया जा रहा था। स्थाानीय ग्रामीणों ने बताया कि कंपनी कर्मचारी यहां रेत माफिया के साथ सांठ-गांठ कर अवैध रुप से बगैर अनुमति के खदानों का संचालन कर रहे हैं। ज्ञात हो कि रौन क्षेत्र में डुबका क्षेत्र की स्वीकृत खदान का रेत अस्वीकृत खुर्द बरेठी से निकाला जा रहा है। खास बात यह है कि इसके लिए मायनिगं विभाग द्वारा बकायदा यहां रॉयल्टी काटने के लिए नाका संचालित किया है, जहां भारी सिर्फ भारी वाहनों की रॉयल्टी काटी जा रही है। खास बात यह है कि अवैध खनन के इन मामलों में शिकायतें किए जाने के बाद खनिज विभाग द्वारा जांच के बाद कागजी कार्रवाई करते हुए प्रतिवेदन तैयार कर वरिष्ठ अधिकारियों तक भेज दिए, लेकिन ठोस कार्रवाई अभी तक लंबित बनी हुई है।
    ध्यान नही दे रहे अधिकारी:
          उल्लेखनीय है कि रौन तहसील के निवसाई-रिढिया 2 में शासन द्वारा रेत उत्खनन की स्वीकृति शिवपुरी निवासी अमित रघुवंशी को दी गई, लेकिन वेदांश मिनरल्स कंपनी द्वारा रेत माफिया के साथ मिली भगत कर खुलेआम यहां से रेत का खनन कर उठाव किया जा रहा है। अनुज्ञापी अमित ने जब इस अवैध खनन को रोकने की कोशिश की तो दंबंगों द्वारा उन्हें धमकाया गया। इस पर अमित ने बीते दिनों जिला प्रशासन को उनकी खदान क्षेत्र का समीमांकन करने को कहा, लेकिन मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इस पर उन्होने एसपी प्रशांत खरे को लिखित शिकायत करते हुए खदान के सीमा क्षेत्र को लेकर होने वाले गंभीर विवाद के लिए पुलिस व प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया।
    फर्जी रसीदों पर रेत सप्लाई:
           रेत के इस अवैध कारोबार में उत्खनन कर रहे माफिया और खनिज अधिकारियों की मिली भगत खेल पूरे संगठित रुप से संचालित हो रहा है। जिसमें रेत के अवैध भण्डारण से रेत का उठाव कर उसे फर्जी रॉयल्टी रसीद के जरिए सप्लाई किया जा रहा है। इसके लिए मायनिंग कर्मचारियों की सांठ-गांठ से बरसात के समय रेत बंदी के दौरान जारी रॉयल्टी बुक की फर्जी कॉपी बना कर उनका प्रयोग किया गया। खास बात यह है कि इस पूरे कारोबार में स्थानीय पुलिस थाने भी संलिप्त होकर काम कर रहे हैं।
    रोक के बाद मशीनों से खनन:
           पर्यावरण संरक्षण के लिए अवैध रेत खनन को रोकने के लिए राज्य सरकार द्वारा नई खनन नीति निर्धारण कर रेत उत्खनन में मशीनों के प्रयोग को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया। इसके बावजूद जिले में खदानों पर माफिया द्वारा शाम ढलते ही बड़ी-बड़ी मशीनों के जरिए नदियों के किनारे रेत निकालने का काम शुरु करते हुए रेत के ढेर लगा दिए जाते हैं। गौरतलब है मशीन पर प्रतिबंध के बावजूद जिला खनिज अधिकारी द्वारा खदानों पर मशीनों के प्रयोग की अनुमती भी प्रदान की है।

    - अवैध खनन के मामलों की शिकायत मिलने पर प्रतिवेदन तैयार कर वरिष्ठ अधिकारियों को सौंप दी जाती है, जिसमें विभागीय स्तर पर नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।
    आरपी भदकारिया, जिला खनिज अधिकारी भिण्ड
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