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    बिसरा को परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजने में खेल

    संभल 25/12/2017(पंकज राघव) @www.rubarunews.com >>  रुपया देकर विसरा के जार बदलने का आरोप ....मृतिका के पिता का दावा मारी गई बेटी के जगह किसी अन्य का विसरा जाँच के लिए भेजा गया...विसरे के असली जार लड़की के पिता के पास ...जव असली विसरा जार लड़की के पिता के पास तो पुलिस ने किन विसरा जारो को परीक्षण के लिये लेव भेजा...स्वास्थ विभाग और पुलिस की भूमिका संदिग्ध....
              अब तक किडनी रैकेट,मानव तस्करी रैकेट,व अन्य तरह के कई रैकेट सुने होंगे।लेकिन कभी पीएम हाउस से विसरा जार बेचने का रैकेट नही सुना होगा। लेकिन ये 100%सत्य है की पीएम हाउस से रुपयो के लालच में विसरा जार व पीएम रिपोर्ट बदलने का खेल संभल जनपद में चल रहा है ।ये कौन करता है ये एक जाँच का विषय है।
               प्राप्त जानकारी के अनुसार जनपद मुरादाबाद के गाँव कमालपुर फतेहाबाद  निवासी सगीर ने अपनी पुत्री शायदा का विवाह लगभग 9 बर्ष पहले संभल जनपद के गाँव सैफ़ खां सराय निवासी खानबहादुर जोकि CRPF में कार्यरत है के साथ काफी दान दहेज के साथ शादी थी लेकिन कुछ समय तक सबकुछ ठीक चला उसके बाद पति पत्नी के बीच अनमन रहने लगी और आखिर में शायदा की 8/7/2017 को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।  शायदा के शव को दफना दिया गया लेकिन शायदा के मयके बालों को शायदा की मौत पच नही पा रही थी उन्होंने ने पुलिस में  पुलिस को दहेज की खातिर जहर देकर मारने का आरोप लगा तहरीर दी लेकिन कोतवाली पुलिस ने कोई कार्यवाही नही की जिससे आहत होकर मृतका के पिता ने डीआईजी मुरादाबाद को प्रार्थना पत्र दिया जिस पर कार्यवाही करते हुए शव को पुनः कवर से निकलवा कर पीएम को भेजा लेकिन पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की और पुलिस ने मृतका के बिसरा को बिना नाम पते के प्रयोगशाला मुरादाबाद भेज दिया।  इतना सब कुछ होने के बावजूद भी आरोपी खुलेआम अपनी तैनाती पर ड्यूटी कर रहा है । यहांसे शुरू हुआ बिसरा का खेल ••••
              संभल के पीएम हाउस पर जांच के लिए विसरा भेजने में भी खेल करने का आरोप लगा है हत्या जैसे गंभीर अपराधों में जो विसरा जांच के लिए भेजा गया था वह मरने वाले का था ही नहीं बल्कि किसी और का था यह दावा है मृतका के पिता का उन्होंने इस खेल में कुछ कर्मचारियों के शामिल होने का शक भी जताया है इस बीच पूरे प्रकरण में जांच के लिए अपर पुलिस अधीक्षक को तहरीर दी गई है इससे पहले भी आई जी को भी अवगत कराया गया है दोनों अधिकारियों ने जांच का भरोसा दिया है कमालपुर फतेहाबाद निवासी सगीर का आरोप है कि दहेज के लिए ससुरालियों ने उनकी बेटी को 8 जुलाई 2017 को जहर देकर हत्या की थी इसके बाद अंतिम संस्कार किया गया पुलिस ने कवर से शव   को निकलवाकर पोस्टमार्टम रिपोर्ट के लिए भेजा पोस्टमार्टम 20 जुलाई को हुआ था मौत का कारण स्पष्ट ना होने की वजह से बिसरा  सुरक्षित किया गया और इसे विधि विज्ञान प्रयोगशाला के लिए भेजा गया डीआईजी के हस्तक्षेप से 30 जुलाई को ससुरालियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई दर्ज रिपोर्ट में क्राइम ब्रांच ने फाइनल रिपोर्ट लगा दी । शायदा  के पिता सगीर का कहना है कि मृतका शायदा के स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति का विसरा जांच के लिए भेज दिया उसकी रिपोर्ट के आधार पर ही केस में फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई यह आरोप लगाकर एक लिखित प्रार्थना पत्र SP और डीआईजी को भेज दिया गया है अपर पुलिस अधीक्षक से बहजोई में शायदा के पिता ने मुलाकात की उन्होंने बताया कि जांच के आधार पर उन्होंने केस रिपोर्ट बना दी गई जबकि बिसरा तो पोस्टमार्टम हाउस में सुरक्षित रखा है तो अब सवाल है कि कौन सा बिसरा  की जांच कर और किस आधार पर आरोपी को बरी किया गया सगीर ने दावा किया है कि उनके पास उनकी बेटी का बिसरा  है जिसे उन्होंने पोस्टमार्टम हाउस के उसी कर्मचारी से हासिल किया ।
                  इस हाई प्रोफाइल मामले में यह मामला सामने निकल कर के आया है कि पीएम हाउस पर विसरा बदलने का कारोबार बखूबी पनप रहा है मृतका शायदा  के पिता का आरोप है कि जिस बिसरा  की जांच की रिपोर्ट के आधार पर  शायदा की मौत का मामला रफा-दफा किया गया वास्तव में वह बिसरा शायदा  का था ही नहीं इस मामले में विस्तृत जांच की जाए क्योंकि शायदा  का विसरा तो जांच के लिए पीएम हाउस में से भेजा ही नहीं गया पोस्टमार्टम हाउस में बिसरा  बदलकर दोषियों को बचाए जाने का पूरा रैकेट है मृतका के पिता सगीर का कहना है कि पीएम हाउस के कर्मचारी से मिलकर उसने यह विसरा के जारों  को प्राप्त किया है जब असली बिसरा  मृतका के पिता के पास हैं तो पुलिस ने किन जारों  के लिए प्रयोगशाला के लिए भेजा जिनकी रिपोर्ट पर आरोपियों को बरी किया गया है सवाल है इस तरह के न जाने कितने मामले होंगे जो पीएम हाउस के कर्मचारियों ने पैसे के लालच में आरोपियों को बचाने का काम किया है मृतका  के पिता का आरोप है कि उसने ₹50000 देकर विसरा के जारों  को खरीदा है  वास्तव में असली है या नकली यह तो जानकारी के बाद ही पता चल पाएगा लेकिन अगर वह असली है तो पुलिस ने किन नकली बिसरा  जारों को लैव  के लिए भेजा इस तरह से मामले की गुत्थी सुलझती नजर नहीं आ रही है अगर ऐसा ही रहा तो अति गोपनीय दस्तावेज ऑफिस  से बहुत ही महत्वपूर्ण जारों  को आरोपियों को बचाने के लिए पैसे के देकर बदला जाता है तो मैं समझता हूं कि जो गरीब लोग हैं न्याय के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटा रहे हैं जब इस तरह के मामले सामने आएंगे तो क्या इनको न्याय मिल पाएगा अगर ऐसा ही रहा तो आरोपी और क्रिमिनल अपराध करते रहेंगे अपराधियों का बोलबाला रहेगा और वह पैसे देकर अपने आप को बचाते रहेंगे पीड़ित लोग काफी चिल्लाते रहेंगे चीखते रहेंगे लेकिन उनकी कोई सुनने वाला नहीं होगा ।
               जब इस बारे में जनपद की मुख्य चिकित्सा अधिकारी अमिता सिंह से बात की गई तो वह अपने विभाग को बचाती नजर आईं और पूरे मामले को पुलिस विभाग पर थोपती  नजर आई।  पुलिस विभाग के आला अधिकारियों से जब इस बारे में बात करने की कोशिश गई तो कैमरे से बचते नजर आए और जांच की बात कही ।
              अब सवाल खड़ा होता है क्या अधिकारी ऐसे ही एक दूसरे पर टालते रहेंगे तो कब आरोपी सलाखों की पीछे पहुचेगे और मृतका को इन्साफ मिल पाएगा 


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