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    भागवत कथा में छठवें दिन हुआ श्रीकृष्ण और रुक्मणि विवाह

    मेहगांव 2/दिसंबर/2017 (rubarudesk) @www.rubarunews.com >>  मेहगांव क्षेत्र के ग्राम बरहद में प्रसिद्ध बड़ी माता मंदिर पर चलरही भागबत कथा  के छठवें दिन राष्ट्रीय संत अनंत विभूषि महामण्डलेश्वर स्वामी चिदम्बरानंद सरस्वती जी ने बताया कि विदर्भ के राजा भीष्मक के घर रुक्मिणी का जन्म हुआ। बाल अवस्था से भगवान श्रीकृष्ण को सच्चे हृदय से पति के रूप में चाहती थी। लेकिन उसका भाई रुक्मिणी का विवाह गोपल राजा शिशुपाल के साथ कराना चाहता था। रुक्मिणी ने अपने भाई की इच्छा जानी तो उसे बड़ा दुख हुआ। अतरू शुद्धमति के अंतपुर में एक सुदेव नामक ब्राह्मण आता.जाता था। रुक्मिणी ने उस ब्राह्मण से कहा कि वे श्रीकृष्ण से विवाह करना चाहती हैं। सात श्लोकों में लिखा हुआ मेरा पत्र तुम श्रीकृष्ण तक पहुंचा देना।

                स्वामी जी ने बताया कि रुक्मिणी ने स्वयं को प्राप्त करने के लिए उपाय भी बताया। पत्र में रुक्मिणी ने बताया कि वह प्रतिदिन पार्वती की पूजा करने के लिए मंदिर जाती हैंए श्रीकृष्ण आकर उन्हें यहां से ले जावो। पत्र के माध्यम से रुक्मिणी ने कहा कि मुझे विश्वास है कि आप इस दासी को स्वीकार नहीं करेंगे तो मैं हजारों जन्म लेती रहूंगी। मैं किसी और पुरुष से विवाह नहीं करना चाहती हूंए बेशक सौ जन्म लेने पड़ें। स्वामी जी ने बताया कि पार्वती के पूजन के लिए जब रुक्मिणी आईए उसी समय प्रभु श्रीकृष्ण रुक्मिणी का हरण कर ले गए। विवाह आठ प्रकार के होते है ये  राच्छस विधि के अंदर आता हैस अत: रुक्मणि के पिता ने रीति रिवाज के साथ दोनों का विवाह कर दिया। इंद्र लोक से सभी देवताओं द्वारा पुष्पों की बर्षा की पंडित सोमेश शास्त्री ने सभी भक्तों से श्रीकृष्ण और रुक्मणि पूजन कराया।
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