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    आफिस के पास ही नियमों का उल्लंघन, बगैर परमिट-फिटनिस दौड़ रही बसें

    भिण्ड 2/दिसंबर/2017 (rubarudesk) @www.rubarunews.com >> दिया तले अंधेरा वाली कहावत को चिरितार्थ करते हुए जिले का परिवहन महकमा यहां वाहनों के अवैध संचालन के प्रति पूरी तरह से अनजान बना हुआ है। बस स्टेण्ड के बगल में ही संचालित हो रहे आरटीओ कार्यालय के बाद ही यहां दिन रात यात्रियों को ढोने वाले सवारी वाहन बगैर परिमिट-फिटनेस के संचालित हो रहे हैं। ऐसे में अधिकारियों द्वारा कार्रवाई न किया जाना उनकी कर्तव्य निष्ठा को सवालों के घेरे में खड़ा करता है। 
                ज्ञात हो कि जिला परिवहन कार्यालय भिण्ड बस स्टेण्ड से महज 20 मीटर की दूरी पर संचालित होता है। जहां आरटीओ अर्चना परिहार समेत विभाग के अन्य कर्मचारी बैठ का विभागीय गतिविधियों का संचालन करते हैं। ऐसे में बस स्टेण्ड से होकर गुजरने वाली यात्री बसें नियमों का उल्लंघन करते हुए धड़ल्ले से संचालित हो रही हैं। यहां प्रतिदिन 1 सैकड़ा से अधिक बसें संचालित हो रही हैं, जो अलग-अलग रुट पर सवारी ढोने में लगी हैं। नियम विपरीत सवारी वाहनों के इस संचालन को रोकने के लिए आरटीओ महकमा कतई गंभीर नही दिखाई दे रहा है, जिसके चलते यह खटारा वाहन संचालक यात्रियों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। इसके विपरीत वाहनों के इस अवैध संचालन को रोकने के लिए जिम्मेदार जिला परिवहन अधिकारी विभागीय काम एवं स्टाफ कम होने का हवाला देते हुए कार्रवाई न करने की बात कह कर अपना पल्ला झाड़ लेती हैं। खास बात यह है कि आम जन से जुड़े इस मुद्दे को लेकर जब भी आरटीओ से जानकारी ली जाती है तो वह काम में व्यस्त होने की बात कहती हैं।
    यात्री वाहनों का नही बीमा:
             गौरतलब है कि जिले के विभिन्न सडक़ मार्गों पर दौड़ रही यात्री बस बिना बीमा के ही संचालित हो रही हैं। बस स्टेण्ड पर संचालित हो रही बसों में से आधा सैकड़ा के करीब सवारी बस बीमा के बगैर ही सडक़ों पर दौड़ रही हैं। ऐसे में कई बार गंभीर सडक़ हादसे के बाद प्रभावित होने वाली सवारियों को बीमा क्लेम करने में काफी दिक्कत आती है। ऐसे में घायल व्यक्ति को बीमा कंपनी के बजाए सवारी वाहन संचालक के खिलाफ केस दर्ज कराना होगा, जिसमें उसे काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
    खटारा बसों पर नही रोक:
               जिले की सडक़ों पर दौड़ रही सवारी बसें बेहद कंडम हालत में होकर यात्रियों की जान से खिलवाड़ कर रही हैं। यहां अटेर, लहार-ऊमरी, इटावा सहित अन्य ग्रामीण रुट पर चलने वाली बसों की हालत हो बद से बदतर हो चुकी है, जो सवारी ढोने में पूरी तरह से अनफिट हो चुके हैं। लेकिन फिर भी आरटीओ महकमे द्वारा जांच न किए जाने के कारण वह बेखौफ होकर इनका संचालन कर रहे हैं। ऐसे में यात्रियों के साथ होने वाले सडक़ हादसों की संभावना बढ़ जाती है।
    दिखावे की कार्रवाई:
              ज्ञात हो कि कभी कभार सवारी ढो रहे वाहनों के गंभीर हादसे होने पर जिले का परिवहन विभाग नींद से जागता है। जिसके बाद विभागीय अधिकारी छुट-पुट वाहनों के खिलाफ चालानी कार्रवाई कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर देते हैं। जिसमें जुर्माना वसूलने की कागजी कार्रवाई की जाती है। ऐसे में आरटीओ की लापरवाह कार्यशैली के कारण खटारा वाहन संचालक खुलेआम सवारियों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं।
    वसूल रहे मनमाना किराया:

               नियमों का उल्लंघन कर कंडम सवारी वाहनों का संचालन करते हुए यह वाहन चालक खुलेआम सवारियों की जेब पर डाका डाल रहे हैं। जहां वह शासन के नियमों को धत्ता बताते हुए अपनी मनमर्जी से अधिक किराया वसूल करने में लगे हुए है। कई बार नियम विरुद्ध किराया लेने पर सवारी द्वारा विरोध किए जाने पर वाहन संचालक द्वारा उनके साथ मारपीट की घटना तक को अंजाम दिया जाता है।
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