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    निधि प्रजापति और सोनी नेहलानी ने किया कोटा का प्रतिनिधित्व

    कोटा 26/दिसम्बर/2017 (Rajsthandesk) @www.rubarunews.com>>  भारतीय प्रोद्योगिकी संस्थान दिल्ली के द्वारा नवीं इंटरनेशनल कांफ्रेंस ऑन एक्सीलेंस इन स्कूल एडुकेशन 21 से23 दिसम्बर तक आयोजित की गई जिसमें अकेडमिक लीडरशीप: फ्रॉम टीचिंग टू लर्निंग विषय पर देश के प्रसिद्ध शिक्षाविदों ने 56 विषयों पर अपने अपने विचार रखे | कांफ्रेंस में कुल 1500 स्कूल संचालकों और शिक्षकों ने भाग लिया जिनमें कोटा से सेंट जोसफ हाई टेक गुरुकुल की शैक्षणिक संयोजिका निधि प्रजापति और पी.आर.ओ. सोनी नेहलानी ने भाग लिया | सेंट ग्रुप के चेयरमैन डॉ. अजय शर्मा ने बताया की स्कूल अपने स्थापना साल से ही मॉडर्न टेक्नोलॉजी और हाई-टेक शिक्षा पर आधारित टेबलेट शिक्षा विद्यार्थियों को दे रहा है जिसके साथ जगपुरा स्थित सरकारी स्कूल के 36 बच्चों को भी कम्प्यूटर शिक्षा में पारंगत कर रहा है इसीलिए कोटा से केवल सेंट जोसफ हाई टेक गुरुकुल के शिक्षकों का ही चयन इस कांफ्रेंस के लिए हुआ |
                नैतिक शिक्षा पर जोर: निधि प्रजापति ने बताया की उपस्थित सभी वक्ताओं ने समाज में व्याप्त बुराईयों और महिलाओं के प्रति हिंसा को रोकने के लिए नैतिक शिक्षा पर जोर दिया | कांफ्रेंस में शिक्षा में गुणवत्ता लाने हेतु कैसे अच्छे शिक्षक बने, कबीर के दोहों से सीख, प्राथमिक स्तर पर कैसे गणित विषय में सुधार करे, सबसे सम्मानित कार्य है शिक्षक होना, शिक्षण के विभिन्न आयाम, शिक्षण की विभिन्न तकनीकियाँ, गणित का रोमांचक अध्ययन, शिक्षकों के समक्ष चुनौतियाँ, एक्शन से समझाना और पढ़ना, शिक्षा में परिवर्तन को स्वीकार करना, कक्षा कक्ष वातावरण, आर्ट ऑफ लर्निंग, शिक्षक कौशल, स्वंय को पहचाने, शिक्षकों का पुन: प्रशिक्षण, विश्व स्तरीय स्कूल की स्थापना, सिखने का आनंद, अभिभावकों की अपेक्षाओं की पूर्ति, मूल्य और शिक्षा जैसे प्रमुख विषयों पर व्याख्यान एवं पेपर प्रस्तुत कराये गए | कवि विपुल रिक्ही ने बताया की बच्चों को पढ़ाते समय विषय वस्तु के भाव एवं वास्तविक अर्थ को गहराई से समझाना चाहिए न की केवल पाठ्यक्रम पूरा करने की होड़ में पाठ को बिना उसके भावनाओं को समझाये आगे बढ़ जाना चाहिए | विद्यालय के विद्यार्थियों को समय समय पर अनाथलयों, वृद्धा आश्रमों, नारी शाला आदि स्थानों का भ्रमण कराया जाना चाहिए | 
                 बच्चों को बताये शिक्षा क्यों ले रहे ?कांफ्रेंस के मुख्य अतिथि दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा की बच्चों को शिक्षा देने से पहले उन्हें ये समझाए की हमें पढ़ना क्यों है ? पढने के फायदे क्या है ? शिक्षकों के मन मष्तिक में सदैव स्पष्ट रहना चाहिए की हम शिक्षा क्यों दे रहे है तत्पश्चात शिक्षा कैसे देनी है उस विषय पर विचार करना चाहिए | सिसोदिया ने कहा की आज कल पैरेंट बहुत ज्यादा फ्रैंक हो जाते है अपने बच्चों के साथ जबकि उन्हें वास्तव में न तो बहुत ज्यादा फ्रैंक होना चाहिए न ही तानाशाह बनना चाहिए | बच्चे को मानव संसाधन बनाने के स्थान  पर अच्छा मनुष्य बनाना का प्रयास शिक्षकों को करना चाहिए | 
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