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    सकारात्मक सोच विकसित कर होगा मानव अधिकार का संरक्षण

    भिण्ड 15/दिसंबर/2017 (rubarudesk) @www.rubarunews.com >> राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के आदेशानुसार अंतर्राष्ट्रीय एवं मानवाधिकार दिवस एवं महिला सषक्तिकरण के संबंध में एडीआर भवन में जिला न्यायाधीश भारत सिंह औहरयिा के आतिथ्य में एक विचार गोष्ठी आयोजित की गई। जिसमें मानव अधिकार और महिला संरक्षण को लेकर विचार प्रकट किए गए। इस अवसर पर न्यायाधीश संजीव कुमार अग्रवाल, उमेश पाण्डव, मोहम्मद शकील खान, धनराज दुबेला,पवन कुमार बांदिल,सीजेएम संकर्षण प्रसाद पाण्डेय, ज्ञानेन्द्र शुक्ला,जेएमएफसी शरद जायसवाल, रेनू खॉन एवं संजय जैन जिला विधिक सहायता अधिकारी मौजूद रहे।
          श्री हिमांषु बंसल आयोग मित्र एवं जिला सयोजक, श्री अल्का बाजपेयी 

          कार्यक्रम की अध्यक्षता करते माननीय जिला न्यायाधीष महोदय के द्वारा व्यक्त किया गया कि एक स्वच्छ एवं स्वच्छ जागरूक समाज बनाने हेतु सकारात्मक सोच पैदा कर मानवीयता का पानल करने हेतु अपील की गई तथा इसके अतिरिक्त यह भी व्यक्त किया गया कि अधिकार एवं कर्तव्य एक ही सिक्के के दो पहलू है। यदि प्रत्येक नागरिक के द्वारा अपने कर्तव्य का निर्वाहन किया जाए तो स्वत: ही दूसरों को उनका अधिकार प्राप्त हो जाता है। मानव के हितार्थ अनेक अधिकार बनाए गए है। अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति प्रत्येक नागरिक का समान द्रष्टिकोण होना चाहिए। समाज और व्यक्ति के विकास के लिए अधिकार का होना आवष्यक है क्योंकि अधिकार ही मनुष्य का मान सम्मान बढाते है, अधिकारों से व्यक्ति का न केवल शारीरिक एवं मानसिक विकास होता है अपितु उसे समाज एवं राष्ट्र में भी स्थान मिलता है। अधिकारों के बिना किसी भी व्यक्ति का ठीक से विकास नहीं हो सकता है। मूल अधिकार किसी खास व्यक्ति के लिए नहीं बनें है बल्कि वे लोकनीति के अनुसार सारे समाज की सुरक्षा हेतु एवं कल्याण के लिए बनाए गए है । विकसित समाज की संरचना में मानव अधिकारों का विषेष महत्व है प्रत्येक नागरिक को संविधान में मौलिक अधिकार प्रदान किये गये है । संविधान के अनुच्छेद 39(क) को राज्य के नीति निर्देषक तत्वों की श्रंखला में जोडा गया है। प्रत्येक नागरिक को अपने अधिकारों का बोध होना चाहिए वरन उनके प्रति सचेत भी रहना चाहिए। प्रत्येक नागरिकों को अपने कर्तव्य का भी ज्ञान होना चाहिए। भारत में, महिलाओं को सषक्त बनाने के लिए सबसे पहले समाज में नारी को षिक्षित होना आवष्यक है। षिक्षित होने पर वह अपने अधिकारों पर प्रति जागरूक हो सकेगी। तथा समाज में वह अपनी अह्म भूमिका निर्वाहन कर सकती है। इस अवसर पर प्रोफेसर इकबाल अली, हिमांशु बंसल, श्रवण पाठक, किशोर न्याय बोड कौषलेन्द्र प्रताप, विजय सिंह, नरेश सिंह, रामौतार सिंह सहित अन्य लोग मौजूद रहे। 
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