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    छपे हुए शब्दों का असर आज भी सर्वाधिक: बोडा

    जोधपुर, 12/दिसम्बर/2017 (Rajsthandesk) @www.rubarunews.com >> आज देश में सोशल मीडिया और डिजीटल मीडिया का बढता प्रभाव नजर आ रहा है। हर व्यक्ति अपने मोबाइल के साथ रिपोर्टर बनता जा रहा है। इन सबके बीच संवेदना का अभाव है। आज भी अखबार में छपे शब्दों का असर सर्वाधिक रहता है। यह विचार वरिष्ठ पत्रकार व पीटीआई के पूर्व ब्यूरो प्रमुख राजेन्द्र बोडा ने व्यक्त किए। वे आज जलतेदीप के संस्थापक स्व. माणक मेहता की 43वीं पुण्य तिथि पर आयोजित 'आज भी विश्वनीय है प्रिंट मीडियाÓ विषयक संगोष्ठी को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे। सूचना केन्द्र के गणेशलाल व्यास 'उस्तादÓ सभागार में आयोजित समारोह में उन्होने कहा कि समाचार पत्र ही खबरों का विश्लेषण करता है। आम जागरूक व्यक्ति टीवी चैनलों पर खबरें देखने के बाद भी दूसरे दिन सबसे पहले अखबार उठाकर वही खबर पढता है। ताकि पूरे तथ्यों का पता चल सके। क्योकि इलेक्ट्रोनिक व डिजीटल मीडिया में अंर्तविरोध है। यह मायावी संसार रचने के साथ ही कयासों के आधार पर चलता है। जिसमें सुधार की गुजांइश नहीं के बराबर है। मीडिया पर बाजारवाद के हावी होने की संभावना पर उन्होने कहा कि 1990 के बाद देश की अर्थव्यवस्था पंूजीवादी हो गई। उसका असर मीडिया पर भी पडा। लेकिन समाचार पत्र आज भी सच्चाई को उजागर करने में आगे रहते है। समारोह के मुख्य अतिथि जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आरपी सिंह ने कहा कि अखबार के बिना आज भी दिन अधूरा लगता है। लेकिन बदलते दौर में समाचार पत्रों को अपनी विश्वसनीयता बरकरार रखना चुनौती बनता जा रहा है। सही समाचार छपने से ही समाज व देश का कल्याण होगा। समारोह की अध्यक्षता कर रहे राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति जस्टिस एनएन माथुर ने कहा कि समाचार पत्रों से विचारों व ज्ञान का संकलन किया जा सकता है। उन्होने खबरों के मामले में खुद के विचारों को प्रभावी नही होने देने का सुझाव दिया। समारोह के विशिष्ट अतिथि इतिहासकार प्रो. जहूरखां मेहर ने कहा कि अखबार की अपनी अलग विशेषता है। यह समाज को सकारात्मक सन्देश देते है। पश्चिमी राजस्थान क्षेत्र डाक सेवा के निदेशक केके यादव ने कहा कि छपे हुए शब्द संवेदनशीलता व संस्कार देने का कार्य करते है। व्यक्तित्व को गढने में अखबारों को बहुत बडा योगदान है। उन्होने समाज के सभी पक्षों को समाचार पत्रों में प्रमुखता देने का सुझाव दिया। वरिष्ठ साहित्यकार व लेखक डा. हरिदास व्यास ने कहा कि पत्रकारिता में जज्बे की जरूरत है। समाचार पत्र की सूचना ही ज्ञान है। इससे पूर्व जलतेदीप के प्रधान सम्पादक पदम मेहता ने अतिथियों का स्वागत करते हुए जलतेदीप की विकास यात्रा एवं 'माणक अलंकरणÓ पर प्रकाश डाला। स्व. माणक मेहता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलन के साथ शुरू हुए कार्यक्रम का संचालन भरत जोशी ने किया। अंत में समाचार सम्पादक गुरूदत अवस्थी ने आभार जताया। 
    माणक अलंकरण बोहरा को
              जनसंपर्क कर्मी गोस्वामी, छायाकार पालीवाल, इलेक्ट्रोनिक मीडिया के वीरेन्द्र परिहार तथा  जलतेदीप के सुराणा को विशिष्ट पुरस्कार
              खोजपूर्ण, गवेषणात्मक व रचनात्मक पत्रकारिता के क्षेत्र में दिये जाने वाले प्रतिष्ठित माणक अलंकरण-2017 व चार विशिष्ट पुरस्कारों की घोषणा आज सूचना केन्द्र के गणेशलाल व्यास 'उस्ताद सभागार में आयोजित संगोष्ठी में चयन समिति की ओर से समारोह के मुख्य अतिथि जेएनवीयू के कुलपति प्रो. आरपी सिंह ने की। घोषणानुसार दैनिक भास्कर, जोधपुर के वरिष्ठ संवाददाता मनीष बोहरा को माणक अलंकरण तथा चार विशिष्ट पुरस्कारों की श्रेणी में जनसंपर्क निदेशालय के उपनिदेशक (समाचार) प्रभात गोस्वामी, छायाकार-कार्टूनिस्ट श्रेणी में राजस्थान पत्रिका, जोधपुर के छायाकार गिरधारीलाल पालीवाल, विशिष्ट पुरस्कार (इलेक्ट्रानिक मीडिया) डीडी राजस्थान, जयपुर के वीरेन्द्र परिहार तथा विशिष्ट पुरस्कार (जलतेदीप समूह) जोधपुर के गौतम सुराणा को दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि चयनित पत्रकारों को 2 अक्टूबर 2018 को दैनिक जलतेदीप के स्थापना दिवस पर आयोजित समारोह में इन पुरस्कारों से सम्मानित किया जाएगा।
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