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    आवारा पशुओं का आतंक, चौपट हो रही अन्नदाता की फसल

    भिण्ड 1/दिसंबर/2017 (rubarudesk) @www.rubarunews.com >> सूखे और सिंचाई के लिए पानी के संकट से जूझ रहे जिले के किसानों के सामने एक और समस्या उत्पन्न हो गई है। अंचल में इन दिनों आवारा पशु खेतों में खड़ी फसल को चौपट कर रहे हैं। स्थानीय प्रशासन के पास इस समस्या के निराकरण के लिए समुचित प्रबंध न होने से जिले का अन्नदाता दोहरी मार से बर्बादी की कगार पर पहुंच रहा है।
                ज्ञात हो संभाग में कम बारिश के चलते खेतों में फसल की बुवाई के बाद गर्म मौसम से जमीन के अंदर का बीज नष्ट हो गया। जिसके चलते फसल की पैदावार तय लक्ष्य से बेहद कम हुई। बीज बर्बाद होने के बाद जैसे तैसे मेहनतकश किसानों ने अपने संसाधनों जरिए फसल तैयार की तो अब आवारा पशुओं द्वारा उसे नष्ट किया जा रहा है। कुदरत की मार से परेशान किसान अब आवारा जानवरों द्वारा फसल नष्ट किए जाने से चिंतित हो गया है। गौरतलब है कि इन दिनों अंचल में सरसों, चना सहित गेहूं की फसल तैयार खेतों में तैयार हो रही है, जिसे आवारा गाय सहित अन्य जंगली जानवर चर रहे हैं।
    दिखाई दे रहा गाय का झुंड:
    उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ समय से जिले भर में आवारा गाय का आतंक परसा हुआ है। अकेले भिण्ड शहर में इन दिनों हजारों की तादात में गाय का झुण्ड दिखाई दे रहा है। जो दिन के समय शहर के आसपास सडक़ों के किनारे डेरा डाले रहती हैं। लेकिन शाम ढलने पर यही आवारा जानवर खेतों की ओर पलायन कर वहां खड़ी फसल को चट कर जाते हैं। रात के समय आने वाली इस मुसीबत के बचाव के लिए किसान रात भर खेतों की रखवाली करने में लगा हुआ है। इसके बाद भी इन आवारा जानवरों द्वारा फसलों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
    हजारों की तादात में गाय:
    जिले में इन दिनों बीहड़ी इलाकों में आवारा गाय का आतंक फैला हुआ है। जो खेतों में तैयार हो रही फसलों को खाकर नष्ट कर रही हैं। ग्रामीण इलाकों में हजारों की तादात में पहुंचा आवारा गायों का यह झुंड चंद मिनट में फसल को नष्ट कर रहा है। सूखे की मार झेल रहा किसान आवारा जानवरों के इस आतंक से परेशान हो चुका है, जिससे निपटने के लिए उसके पास कोई उपाय नही हैं।
    प्रशासन पर नही इंतजाम:
    गौरतलब है कि अन्नदाता के लिए मुसीबत बनी आवारा गायों की रोकथाम के लिए स्थानीय प्रशासन के पास ठोस इंतजाम नही है। वैसे तो जिले भर में दर्जनभर के करीब गौशालाऐं संचालित हो रही हैं, जो प्रतिवर्ष प्रदेश शासन से गाय के संरक्षण और रख रखाव के नाम पर लाखों रुपए के चंदे की उगाही करती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनके द्वारा गाय संरक्षण को लेकर कोई काम न किए जाने से वह आवारा होकर फसलों को नष्ट कर रही हैं।
    इनका कहना है:
    - सरसों की फसल लगभग तैयार होने पर आ गई है, लेकिन इन दिनों आवारा गायों का झुण्ड इन्हें चंद मिनट में चट कर नष्ट करने में लगा है। इनकी रोकथाम के लिए ठोस इंतजाम किए जाने चाहिए।
    - रामप्रसाद शर्मा, किसान

    -आवारा पशुओं की रोकथाम के लिए प्रशासन के पास कोई संसाधन नही है। इसके चलते गरीब किसानों को इनका बर्बाद हो रही फसल के कहर को झेलना मजबूरी बन गई है। गौ संरक्षण को लेकर काम रही संस्थाओं को इसके लिए प्रयास करने चाहिए।

    संजीव बरुआ, समाजसेवी
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