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    मांनधाता छतरी मामले में सुलझा विवाद, 21 जनवरी को दर्शनार्थियों के लिए खुलेगा रास्ता......

    बूंदी  (krishnaKantRathore) @www.rubarunews.com>>  पिछली 1 जनवरी से बूंदी में चले रहे मानधाता छतरी प्रकरण का पटाक्षेप हो गया। आज के सूर्योदय ने जहां मामला की उम्मीद जगाई तो सूर्यास्त के साथ कोटा में प्रसासनऔर  विहिप मंडल की बैठक बूंदी ही नहीं हाडौती भर मे राहत की खबर के साथ सम्पन्न हुई।
           जयपुर में विहिप के क्षेत्रीय मंत्री नरपत सिंह शेखावत राज्य सरकार के मध्य हुई स्तरीय वार्ता में विहिप की पूर्ववर्ती पांच सुत्री मांगों को स्वीकार कर उनकी पालना के निर्देश कोटा के सम्भागिय आयुक्त और पुलिस महानिरिक्षक को दिये गए हैं।
            सरकार का प्रतिनिधित्व करते हुऐ प्रशासन ने की विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारियों से बातचीत में 1 जनवरी को दर्ज मुकदमे वापस लेने, मानधाता बालाजी और टाइगर हिल पहाड़ी का रास्ता आमजन हेतु 21 जनवरी से खोले जाने की स्वीकृति प्राप्त हुई, लाठीचार्ज करने वाले पुलिस अधिकारी, कर्मचारी एवं अराजकता फैलाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई उपचुनाव के बाद होने पर सहमती बनी।

    बैठक में रहे शामिल......
           गुरूवार को संभाग मुख्यालय पर संभागीय आयुक्त कोटा, पुलिस महानिरीक्षक कोटा, जिला कलक्टर बूंदी, पुलिस अधीक्षक बूंदी व विश्व हिन्दू परिषद के प्रांत मंत्री सुरेश गोयल, सहमंत्री युधिस्टर हाडा, प्रांत उपाध्यक्ष प्रताप सिंह नागदा, प्रांत संरक्षक हौसला प्रसाद, बजरंगदल प्रांत सहसंयोजक मुकेश जोशी, विभाग संयोजक योगेश रेनवालबूंदी जिला मंत्री मांगी लाल गोचर उपस्थित रहे। 
    मुद्दे को लेकर रहा हाडौती बंद.....
    विहिप ने किया था धर्म रक्षा मंच का गठन.....
          विहिप के आह्वान पर 12 जनवरी को बूंदी सहित पूरी हाडौती बंद  रही थीजिसे के व्यापारियों सहित सभी संगठनों का व्यापक समर्थन मिला था। इसके बाद विहिप ने धर्म रक्षा मंच का गठन करते हूए बूंदी कुच का आह्वान किया था।

    मामले को लेकर रहा इंटरनेट बंद .....
          दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 144 के अन्तर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लोक शांति एवं लोक सुरक्षा बनाए रखने के लिए बूंदी जिले में 29 दिसंबर को रात 8 बजे से अग्रिम आदेश तक निषेधाज्ञा लागू कर दी गई, तो 31 दिसम्बर से 11 जनवरी तक इंटरनेट सेवाएं भी बंद रही। 
    रामगढ़ वन्य जीव अभयारण्य क्षेत्र बूंदी शहर में पर्यटकों व आमजन के लिए वन विभाग (वन्य जीव) की सहमतिसुबह 10 से 3 बजे तक होगी आवाजाही की अनुमति.......

           रामगढ़ वन्य जीव अभयारण्य क्षेत्र बूंदी शहर में पर्यटकों व आमजन के लिए वन विभाग (वन्य जीव) की सहमति से पैदल आवाजाही रविवार 21 जनवरी को सुबह 10 बजे से अपरान्ह 3 बजे तक प्रतिदिन शुरू की जाएगी। अभयारण्य क्षेत्र में आवाजाही की पैदल अनुमति होगी। किसी भी प्रकार के चौपहिया वाहन, दोपहिया वाहन, साईकिल इत्यादि अनुमत नहीं होंगे। आमजन व पर्यटकों को यह अनुमति धारा 144 सीआरपीसी के प्रावधानों की पालना की शर्त पर होगी। टाईगर हिल क्षेत्र स्थित मानधाता छतरी क्षेत्र में पुरातत्व विभाग का सर्वे कार्य जारी है। अत: पुरातत्व अवशेषों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुरातत्व टीम द्वारा निषिद्ध क्षेत्र की सीमा तक आमजन व पर्यटकों का जाना अनुमत होगा। इस संबंध में गुरूवार को संभाग मुख्यालय पर संभागीय आयुक्त कोटा, पुलिस महानिरीक्षक कोटा, जिला कलक्टर बूंदी, पुलिस अधीक्षक बूंदी व विश्व हिन्दू परिषद के बूंदी एवं प्रांतीय पदाधिकारियों के साथ चर्चा हुई।
     मानधाता की छतरी का इतिहास और विवाद की वजह.....
                  मानधाता कौन थे, उनका इतिहास क्या है, इस बारे में कोई प्रमाणिक इतिहास तो नहीं मिल सका है, पर इस बारे में अलग-अलग जनश्रुतियां है। एक जनश्रुति के मुताबिक बूंदी के जैतसागर से पूर्व में पहाड़ के शिखर पर रावराजा शत्रुशाल की धाय प्रथा ने अपने भतीजे मान धाबाई की याद में मानधाता छतरी का निर्माण संवत् 1702 (सन 1645) में करवाया था। यह छतरी बिजली गिरने से संवत् 1969(सन 1912) में गिर गई थी। मानधाता बूंदी किलेदार थे। जिस जगह छतरी बनी है, वहां से किसी युद्ध में शहीद हो गए थे। उनकी वीरता व उनकी स्मृति में यह छतरी बनवाई गई। बूंदी की यह परंपरा रही है कि जब भी किसी की याद में छतरी बनवाई जाती थी तो उसमें देव प्रतिष्ठापित किए जाते थे। 
    पुराने रिकॉर्ड में मानधाता छतरी और मानधाता पहाड़........ 
                भू-अभिलेख के 1943-44 के रिकॉर्ड के मुताबिक मानधाता छतरी के नाम से एक बिस्वा जमीन और जिस पहाड़ पर छतरी बनी है, उसका नाम मानधाता डूंगर दर्ज है, मानधाता डूंगर के नाम से तब 16 बीघा 12 बिस्वा जमीन थी। सेटलमेंट से पहले पहाड़ सिवायचक में था, पर सेटलमेंट के बाद मानधाता पहाड़ की पूरी जमीन जंगलात के नाम हो गई। वहीं पहले जहां रिकॉर्ड में मानधाता की छतरी के नाम से दर्ज थी, वर्तमान रिकॉर्ड में यह सिवायचक गैरमुमकिन छतरी के नाम से दर्ज है। 
    इसलिए बढ़ा विवाद....... 
                   विवाद की शुरुआत तब हुई जब पिछले साल फॉरेस्ट विभाग को बजट मिला तो इसे व्यू पाइंट के रूप में विकसित करने के लिए इस छतरी का रिनोवेशन शुरू किया। वन विभाग के मुताबिक वहां छतरी के ही पिलर्स पड़े थे, एक पिलर में दास मुद्रा में हनुमानजी उकेरे हुए थे। इन्हें मूल स्वरूप में छतरी में लगाने का काम किया जा रहा था। यह बात शहर में आग की तरह फैली कि वहां मूर्ति स्थापित की जा रही है। समुदाय विशेष का कहना था कि वहां कहीं ओर से प्रतिमा लाकर गुपचुप स्थापित की जा रही है। इसका विरोध-प्रदर्शन, पत्थरबाजी और कुछ दुकानों में तोड़फोड़ हुई। तब मामले को शांत करने के लिए शांति समिति की बैठक हुई। इसमें छतरी व विवादित खंबे की पुरातत्व विभाग से जांच व रिपोर्ट आने तक यथास्थिति रखने, किसी को वहां नहीं जाने पर सहमति बनी। सुरक्षा के लिए पुलिस चौकी भी स्थापित कर दी गई। पुरातत्व विभाग ने जांच भी की। आठ-नौ महीने से ना तो रिपोर्ट सार्वजनिक की गई, ना इस दिशा में कोई प्रगति हुई। इस दौरान पूजा समर्थक पहाड़ की तलहटी में जैतसागर के पास इकट्ठा होकर वार-त्योहार पर सामूहिक प्रार्थना-पूजा करते रहे। फिर मानधाता छतरी पर पूजा की इजाजत देने की मांग उठी। विवाद इतना बढ़ा कि हाड़ौती बंद की नौबत तक आ गई।
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