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    समरसता की प्रतीक मकरसंक्रांति

    चितबड़ागाँव  (बलिया) 14/01/2018 ( संजय राय) @www.rubarunews.com >>  जनपद के सभी क्षेत्रों में अमीर और गरीब परिवार बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मकरसंक्रांति मनाने की तैयारी चल रही है । 
                  गौरतलब है कि मकरसंक्रांति सामाजिक एकता , सामाजिक परिवर्तन,  सामाजिक समरसता, एकता तथा बंधुत्व का प्रतीक माना जाता है , इस दिन तिल का बड़ा ही महत्व होता है जबकि इस दिन गुड़ के बिना कोई भी खाने की चीजें बेस्वाद होता है, खिचड़ी में घी डालते ही उसकी गुणवत्ता दोगुनी हो जाती है, बताया जाता है कि गुड़ के बिना तिल का महत्व नहीं होता वहीं घी के बिना खिचड़ी का महत्व  अधूरी हो जाती है जैसे समाज में रहने वाले लोग एक दूसरे के बिना अधूरा व बेकार रहता है इसलिए समाज में रहने वाले सभी लोगों को एक दूसरे से आपसी सहमति, प्रेम , प्यार , सौहार्द तथा आपसी भाईचारा बनाकर रहना अति आवश्यक होता है जैसा कि पूरे देश में सामाजिक  एकता के ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने का प्रयास किया जा रहा है जिसके फलस्वरूप जातिवाद साम्प्रदायिकता के नाम पर कोई एक वर्ग दूसरे वर्ग से लड़ाने का प्रयास किया जा रहा है । ऐसे में इन सभी समस्याओं को लेकर एक दूसरे के प्रति समरस , सरस , सर्वसमाज , समभाव का संदेश लेकर प्रतिवर्ष मकरसंक्रांति  आती है । मकरसंक्रांति का पर्व राष्ट्र जीवन में परिवर्तन के लिए संकल्प, सामाजिक एकता ,जातिगत, भाषागत , क्षेत्रगत तथा भेदभाव को भुलाकर एक सशक्त समाज का निर्माण करने तथा मजबूत राष्ट्र की नींव रखने का संकल्प देती है, ऐसे में हम सभी को मकरसंक्रांति के दिन तिल के लड्डू का सेवन कर एक दूसरे से मिलकर एक साथ रहने का संकल्प लेनी चाहिए ताकि समाज में एक साथ एकजूट होकर रहने प्रयास करना चाहिए जिससे हम सभी के जीवन में एक नया ऊर्जा व नई सवेरा तथा मधुर रिश्ते बन सके। यही सब कुछ विशेषताएं लेकर मकरसंक्रांति  प्रतिवर्ष  आती है । जिसे हम सभी मकरसंक्रांति कहते हैं ।
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