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    आंगनबाडियों में खिलखिलाया बचपन- जिले में हो रहे हैपीनेस इंडेक्स बढाने के प्रयास

    बून्दी 17/जनवरी/2018 (KrishnaKantRathore) @www.rubarunews.com >> प्राकृतिक सौन्दर्य, भाइचारे और सौहाद्र्र के लिए मशहूर बूंदी जिला अब आमजन की खुशहाली के प्रति भी खासा सचेत और प्रयत्नशील है। 'खुशियां बांटें और खुशियां पाएंÓ की तर्ज पर जिले में ऐसे कार्यों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है जो परिवेश में खुशियां घोलें और नई स्फूर्ति के साथ विकास के कदम बढें। इसी क्रम में जिले में की गई खिलौना या टॉय बैंक की छोटी सी शुरुआत अब अपना असर दिखा रही है। जिला प्रशासन की पहल पर आंगनबाडी केन्द्रों में खिलौने क्या पहुंचे, इनकी तस्वीर ही बदल गई। अब अंधेरी कोठरियों और जर्जर हाल भवनों में बच्चे बैठ कर मात्र पोषाहार ही नहीं ग्रहण करते वरन् खेलते खिलखिलाते हैं और ढेर सारी खुशियां मन में भर ले जाते हैं।   
                राज्य सरकार के निर्देश पर जिलों में आरंभ की गई टॉयबैंक योजना का खासा सकारात्मक प्रभाव सामने आ रहा है। आंगनबाडी केन्द्रों में पिछले सालों की तुलना में सूरत एकदम बदल चुकी है। अब ये केन्द्र किंडरगार्टन के वास्तविक स्वरूप में आने लगे हैं। साफ सुथरी सजी संवरी दीवारें, दीवारों पर लुभावने और सीख देने वाले चित्र, स्लोगन और परिसर में बच्चों के मन भाने वाले ढेर सारे खिलौने। झूले, साइकिल, गाडी, बिल्डिंग ब्लॉक्स, डांसिंग एनिमल, डॉल, टेडी बीयर व बहुतेरे सॉॅफ्ट टॉयज और तरह-तरह के खिलौने अब यहां उपलब्ध हैं। 
    सबके प्र्र्र्र्रयासों से बढ़ रहा खिलौनों का परिवार 
                ये खिलौने यहां जुटे हैं जन भागीदारी से। जिला कलेक्टर शिवांगी स्वर्णकार ने स्वयं खिलौने भेंटकर बच्चों की खुशहाली के इस प्रयास को आगे बढाया है और समाज के भामाशाहों, स्वयंसेवी संस्थाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जिला प्रशासन एवं विभिन्न विभागों से जुडे अधिकारियों कर्मचारियों ने भी इसमें अपनी महत्वपूर्ण भागीदारी निभाई है। जिला कलेक्टर शिवांगी स्वर्णकार ने सभी अधिकारियों को इस कार्य को आगे बढाने का जिम्मा दिया है। इससे प्रेरित होकर कई विभागीय अधिकारियों ने खिलौने भेंट किए हैं। एडीएम सीलिंग ममता तिवारी हर सप्ताह इस बाबत बैठक लेकर टॉय बैंक की प्रगति जांचती हैं और इसे और समृद्ध बनाने पर जोर देती हैं। इस कार्य के लिए खाद्य एवं आपूर्ति निगम प्रबंधक रुचि अग्रवाल को प्रभारी अधिकारी बनाया गया है। उन्होंने बताया कि विभिन्न स्रोतों से प्राप्त राशि से खिलौने अपने स्तर पर खरीदे भी गए हैं और सीधे ही प्राप्त भी किए जा रहे हैं। इस तरह जिलेे में दो हजार से अधिक खिलौने संचित हो चुके हैं। 
    बढा नामांकन, माहौल भी बदला 

                जिला शिक्षा अधिकारी तेज कंवर ने बताया कि जिले के 15 विद्यालयों में चल रहे आंगनबाडी केन्द्रों में खिलौना बैंक तैयार हो चुके हैं। इनसे प्री-स्कूल की वास्तविक  संकल्पना साकार हुई है और सीखने की प्रक्रिया सहज और बालकों के अनुकूल बनी है। खिलौना बैंक को बढाने के सभी संस्था प्रधानों को निर्देश दे रखे हैं। 
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