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    सोचो संकट में आपके लिए द्वार बंद हो जाये तो कैसा लगेगा ? - राज्यपाल

    जयपुर 24/01/2018 (Rajsthandesk) @www.rubarunews.com >>  राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री कल्याण सिंह ने कहा है कि चिकित्सकों को ईश्वर के बाद धरती पर दूसरे भगवान के रूप में देखा जाता है। इस ओहदे और सम्मान पर चोट न आए, इसके लिए चिकित्सकों को सदैव सजग व संवेदनशील रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यवस्था या सरकार से मतभेद हो सकते हैं, लेकिन उन मतभेदों को अमानवीयता की आँच से बचा कर रखें। अस्पतालों पर एक दिन का ताला लाखों जीवन पर वज्रपात बन जाता है। 
                  राज्यपाल श्री सिंह यहां राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह को सम्बोन्धित कर रहे थे। राज्यपाल ने दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का शुभारम्भ किया। राज्यपाल ने विभिन्न परीक्षाओं में उत्कृष्ट विद्यार्थियों को उपाधि एवं स्वर्ण पदक प्रदान किये।
                श्री सिंह ने चिकित्सकों से गम्भीरता से उस स्थिति पर विचार करने को कहा कि जब आप संकट की घड़ी में भगवान के मन्दिर में जाए और आपके पहुचंने पर मन्दिर का दरवाजा बन्द कर दिया जाए, तो आपके ऊपर क्या गुजरेगी। उन्होंने कहा कि उस वक्त जिस पर गुजरती है वो ही बता सकता है कि वह  कितना हतोत्साहित होगा। ऎसी कल्पना बीमार व्यक्ति के लिए करें तो आप और मेरी दोनों की रूह कांप जायेगी। रोगी के लिए भी अस्पताल का बन्द होना, मन्दिर में भगवान के दर्शन न होने जैसा ही है। राज्यपाल ने कहा कि लाख समस्याएं हों, लाख मजबूरियां हों, पर चिकित्सकों को अपने चिकित्सकीय दायित्व से कभी भी विमुख नही होना चाहिए। 
                 राज्यपाल ने विश्वास जताया कि सभी चिकित्सक मिलजुल कर स्वस्थ राष्ट्र और स्वस्थ समाज के निर्माण में अपनी महती भूमिका निभायेें। चिकित्सा की विभिन्न पद्वतियों में सबसे अधिक विश्वसनीय एवं वैज्ञानिक पद्वति के रूप में समाज में ऎलोपैथी को माना जाता है। इसमें कोई संदेह नहीं है। ऎलोपैथी को चिकित्सा परिवार के सबसे बड़े भाई का दर्जा दिया जाए, तो कोई गलत नहीं होगा। ऎलोपैथी चिकित्सकों में यह प्रचलन बन गया है कि वे होम्योपैथी, आयुर्वेद से होने वाले इलाज को खारिज कर देते हैं। यह न्यायोचित नहीं है। यह ध्यान रखें कि अन्य चिकित्सा पद्वतियाँ ऎलोपैथी की प्रतिस्पर्धी नहीं है। उन्हाेंने कहा कि ऎलोपेथिक चिकित्सकों से अपेक्षा है कि वे होम्योपैथ, आयुर्वेद आदि के इलाज को भी वैज्ञानिक कसौटी पर परखें और अगर वह मानक के अनुसार हैं, तो उन्हें स्वीकार करने में संकोच न करें। 
                  भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद नई दिल्ली की अध्यक्ष प्रो. जयश्री पी. मेहता ने कहा कि चिकित्सकों को मरीजों की पीड़ा समझनी होगी। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों को चिकित्सा के सिद्वांतों पर चलना होगा। राज्यपाल श्री सिंह ने इस अवसर पर पदमश्री डॉ. अशोक पानगडिया को डॉक्टर ऑफ सांइस-मेडिसीन की मानद उपाधि प्रदान की। श्री पानगडिया ने कहा कि चिकित्सा के क्षेत्र में शोध की अनेक संभावनाएं हैं। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. राजा बाबू पंवार ने प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इस मौके पर चिकित्सा शिक्षा विभाग के सचिव श्री आनन्द कुमार, डॉ. बी.एम.कटोच, डॉ. अजय शंकर पाण्डेय भी मौजूद थे। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार श्री जसवंत सिंह ने दीक्षांत समारोह की कार्यवाही का संचालन किया।
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