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    गरीब किसान की ठण्ड से मौत ने खोली सरकार की पोल

    संभल 05/01/2018 (पंकज राघव) संभल में कड़कड़ाती ठंड ने कहर ढाना शुरू कर दिया है ....थाना बहजोई क्षेत्र के विसारु गांव में खेत पर पानी लगाने गए किसान ने ठंड में दम तोड़ दिया..... सूचना पर परिजन भी मौके पर पहुंचे.... परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है ....राजस्व कर्मियों ने भी मौके पर पहुंचकर परिजनों से घटना की जानकारी ली ....घर की दीवारे घिरी तिरपाल और पन्नी तनाकर सोता है परिवार....जमीन पर पुआल बिछाकर सोने को मजबूर है घर के लोग....

               ठण्ड में मरे किसान की हालत इतनी खराव है की उसके मिटटी से बने घर की दीवारे गिर चुकी है। घर के एक कोने में घास से बने छप्पर के आगे तिरपाल तानकर गुजर कर रहा है। घर में सभी छोटे बड़े 9 सदस्य है ।घर के बड़े सदस्य पशु बाली साल में पन्नी तान कर सोते है। बड़ी बात येभी है कि मृतक किसान के पास मात्र 2 बीघा जमीन है।मजदूरी करके अपने परिवार का लालन पालन कर रहा था। राशन की दुकान से भी उसे अनाज भी नही मिल पाता था जबकि उसके पास पात्रता कार्ड भी था।
         चंदौसी तहसील के विकास क्षेत्र बहजोई के गांव विसारु के किसान बनवारी अपने घर से खेत पर पानी लगाने गया हुआ था बेटा महेंद्र भी साथ में था सुबह तड़के 4:00 बजे करीब बेटे ने देखा कि बनवारी मृत अवस्था में खेत में जमीन पर पड़ा है सूचना पर परिजन भी पहुंच गए बेटे ने बताया कि वह अपने पिता के साथ खेत पर ही था सुबह 4:00 बजे करीब पिता काम कर रहे थे वह पास में ही था जब मैं पिता के पास आया तो पिता मृत अवस्था में खेत में ही जमीन पर पड़े थे सूचना परिजनों को दी गई परिजन भी मौके पर पहुंच गए जिसे देखकर परिजनों में हाहाकार मच गया जानकारी मिलने पर राजस्व कर्मी भी वहां पर मौके पर पहुंच गए । लेकिन देखने बाली बात है कि तहसील से तहसीलदार संजय कुशवाहा भी गए लेकिन गरीब किसान के परिजनों को  किसी भी अधिकारी और किसी भी राजनीतिक प्रतिनिधि ने मदद के लिए हाथ आगे नही बढाया।  परिजनों ने ही इधर उधर से संसाधन जुटा कर मृतक का दाह संस्कार किया ।
             जब मीडिया  की टीम मृतक के घर पहुँची तब मृतक की पत्नी ने अपनी गरीबी का हाल ब्यां किया और सरकारी तंत्र की पोल खुलती नजर आई । मृतक की पत्नी ने बताया कि सरकार की तरफ से उसे कोई भी मदद नही मिली है आवास के नाम पर केवल आश्वासन ही मिलता है और पन्नी डालकर पूरा परिवार जमीन पर फूंस बिछाकर सोने को मजबूर है यह सब बताते हुए मृतक की पत्नी फूट फूट कर रोने लगी उसे अपनी जवान बेटी की शादी की भी चिंता सता रही है । जब टीम ने ग्राम प्रधान भूपसिहं से बात की तो उन्होंने बताया कि अधिकारियों से कई बार प्रयास किए गए कि ऐसे गरीबों को आवास मुहैया कराए जा सके लेकिन अधिकारियों ने आरक्षण का हवाला देकर हाथ खड़े कर दिए  । जब उपजिलाअधिकारी से इस घटना के बारे में बात की तो उन्होंने गरीब किसान की मोत को ही ठण्ड से हुई मोंत नही माना और बताया मौतें रूटीन होती है लेकिन ठण्ड में हुई मोंत ठण्ड से मानी जाती है लेकिन ऐसा नही है रही बात गरीब को आवास नही मिलने का मामला तो इस पर जांच कराई जाएगी और पात्र होने पर  सरकारी प्रक्रिया के तहत कार्यवाही को आगे बढ़ाया जाएगा। 
           यह हालात तब है जब यह गाँव जिला कल्क्ट्रेट से मात्र तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है ।क्या ऐसे ही सरकार कर रही गरीबों की मदद् 


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