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    अब यों ही बदलता रहेगा मौसम का मिजाज

    रामगढ़ (बलिया) 10/01/2018 (SanjayRai) @www.rubarunews.com >>   क्षेत्र में कुछ दिनों से लेकर एक सप्ताह या कुछ सप्ताहों तक तापमान के औसत सामान्य तापमान से अत्यधिक नीचे बने रहने की चरम शीत दशा को "शीतलहर" कहा जाता है। भौगोलिक स्थिति एवं काल के अनुसार शीतलहर के लिए तापमान का मापदण्ड बदलता रहता है। शीत क्षेत्र एवं मैदानी क्षेत्र के मानक में अन्तर रहता है। मैदानी क्षेत्र का मानक शीत क्षेत्र के मानक से कम होता है।
                संयुक्त राज्य मौसम सेवा के अनुसार 24 घण्टे की अवधि में तापमान में त्वरित गिरावट की दशा को शीतलहर कहा जाता है।सामान्यतया किसी क्षेत्र मेंऔसत न्यून तापमान में भारी गिरावट, इतनी ठंड के लिए तैयार न रहने वाले लोगों तथा जानवरों या सम्पति पर प्रतिकूल प्रभाव उत्तपन्न कर सकते हैं। शीतलहर के सटीक मापदण्ड का निर्धारण तापमान के कम होने की दर एवं जिस न्यूनतम् स्तर पर तापमान पहुंचता है, के आधार परकिया जाता है जो भौगोलिक क्षेत्र एवं बर्ष के आधार पर निर्भर करता है।
                अपने देश में खासतौर से उत्तरी भारत में शीतलहर उत्तपन्न होने का मुख्य कारण तापमान में सामान्य सेभी अधिक गिरावट का होना है ,जिसके दो मुख्य कारण हैं। पहला यह कि मौसमी प्रक्रिया के अनुसार वैसे ही शीतकाल में स्थलीय भाग ठण्ढा होता है ,जिससे तापमान भी कम हो जाता है और जब घना कुहरा छा जाति है तो सूर्य की किरणें धरातल तक नहीं पहुंच पाती है ,जिससे तापमान में और अधिक गिरावट होती है , जिससे तापमान सामान्य तापमान से भी नीचे चला जाता है और शीतलहर की स्थित उत्पन्न हो जाती है । दूसरा कारण यह है कि शीतकाल में साईबेरिया की तरफ से आने वाली पश्चिमी शीत वायु प्रवाहित होकर उत्तर भारत में प्रवेश कर तापमान को और गिरा देती है, जिससे यह क्षेत्र भयंकर शीतलहर की चपेट में आ जाता है। अपने देश में हाल के बर्षों में 2009, 2012- 13 एवं पुन: इस वर्ष शीतलहर का कहर जारी है । 2009 में तो बलिया का तापमान 2 डिग्री तक नीचे आ गया था ।अनेक लोगों की मृत्यु हुई थी । इस वर्ष भी तापमान 4 डिग्री तक नीचे जा चुका है । यदि पश्चिमी शीत वायु का प्रवाह और जोर पकड़ा तो तापमान और नीचे जा सकता है ,जिससे खतरनाक स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
             मानव स्वास्थ्य के लिए शीतलहर बेहद खतरनाक हो जाता है और इसकी चपेट में आ जिने से जान तक चली जाती है । खासतौर से छोटे बच्चों के लिए शीतलहर बहुत घातक होता है । एक मात्र सावधानी एवं बचाव ही इससे बचने का उपाय है।

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