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    खत्म हुआ जनपद सीट का इंतजार, उर्मिला बनी निर्विरोध अध्यक्ष

    भिण्ड 8/जनवरी/2018 (rubarudesk) @www.rubarunews.com >> राजनैतिक उथल-पुथल और सत्ता पक्ष के हस्तक्षेप के बीच सोमवार को जनपद पंचायत भिण्ड की अध्यक्ष सीट के लिए मतदान संपन्न हुआ। जिसमें जनपद वार्ड नंबर 4 से सदस्य उर्मिला गंभीर जाटव निर्विरोध अध्यक्ष चुनी गई। संपन्न हुआ चुनाव के परिणाम आने के बाद लंबे समय से अध्यक्ष सीट बचाने का प्रयास कर रही संजू गजराज जाटव नाकाम साबित हुई।
               
    ज्ञात हो कि बीते 3 दिसंबर को जनपद भिण्ड के सदस्यों द्वारा निर्वतमान अध्यक्ष संजू जाटव के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लगाया था। जिसमें 25 सदस्यी जनपद में से 22 सदस्यों ने संजू जाटव के विरोध में मत डाले, इसके बाद अध्यक्ष सीट घोषित की गई। खाली हुई जनपद अध्यक्ष सीट पर पुन: मतदान कराने के लिए शासन द्वारा 8 जनवरी की तिथि निश्चित की गई। जिसके तहत सोमवार को मतदान प्रक्रिया आरंभ हुई। इससे पहले स्थानीय बीजेपी व संगठन नेताओं द्वारा सदस्यों को एकमत करने के लिए लॉबिंग की। चुनाव प्रक्रिया आरंभ होने पर आरक्षित अध्यक्ष पद के लिए कुल 25 सदस्यों में से केवल वार्ड 4 से भाजपा समर्थित उर्मिला गंभीर जाटव ने नामांकन दाखिल किया, जिस पर सभी सदस्यों ने अपनी सहमति जताई। तय समय तक केवल 1 नामांकन दाखिल होने के बाद प्रशासन ने जनपद भिण्ड अध्यक्ष पद के लिए उर्मिला को निर्विरोध अध्यक्ष नियुक्त कर दिया। चुनाव के चलते सोमवार को यहां सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस बल तैनात किया गया था। निर्वाचन प्रक्रिया के परिणाम आने के बाद संजू जाटव विरोधी खेमे में खुशी की लहर दौड़ गई। जिसके बाद सभी ने निर्विरोध चयनित उर्मिला को बधाई दी। यहां से चयनित उर्मिला जाटव सीधे स्थानीय विधायक नरेन्द्र सिंह कुशवाह से मिलने पहुंची। जहां श्री कुशवाह ने उन्हें जीत की बधाई देते हुए इसे भाजपा की नीतियों की विजय बताया।
    नाकामयाब रहे संजू के प्रयास:

          बीजेपी समर्थित जनपद अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के बाद तत्काली अध्यक्ष संजू जाटव ने अपनी सीट बचाने के लिए भाजपा के वरिष्ठ नेत्रत्व से मुलाकात कर गुहार लगाई। जिसके तहत उन्होने राज्यसभा सांसद प्रभात झा, प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार चौहान से लेकर संगठन स्तर के नेताओं से संपर्क किया। जहां उन्होने इसके लिए स्थानीय बीजेपी नेताओं पर आरोप लगाते हुए उन्हें जिम्मेदार ठहराया। खास बात यह रही कि पूर्व अध्यक्ष के शिकवे शिकायतों के बाद प्रदेश संगठन व पार्टी नेताओं ने उन्हें पुन: अध्यक्ष बनवाने का आश्वासन दिया। जिसके तहत शनिवार के रोज सांसद मनोहर ऊंटवाल जिले में आए और उन्होने स्थानीय नेताओं व संगठन पदाधिकारियों से चर्चा की थी। लेकिन इसके बाद भी संजू जाटव अपनी सीट बचाने में नाकाम साबित हुई।
    बसपा छोड़ पकड़ा बीजेपी का दामन:
           ज्ञात हो कि जनपद अध्यक्ष सीट गंवा चुकी संजू जाटव ने बसपा समर्थन में इस सीट पर अपनी जीत दर्ज की थी, जिसके बाद से सत्ताधारी पार्टी द्वारा लगातार उन्हें अपनी ओर मिलाने के प्रयास किए गए। लंबी जद्दोजहद और स्थानीय राजनैतिक उठापटक के बाद आखिर कर संजू जाटव व उनके पति गजराज जाटव ने बसपा को छोड़ कर बीजेपी का दामन थाम लिया। लेकिन इसके बाद भी उनका संकट कम नही हुआ और पार्टी बदलने के बाद भी उन्हें अध्यक्ष पद गंवाना पड़ा।
    पति की बयानबाजी पड़ी भारी:
          गौरतलब है कि अध्यक्ष पद से हटाई गई संजू जाटव के पति गजराज जाटव राजनीति में आने के बाद से ही विवादों में घिरे रहे। बसपा में रहते हुए उनके द्वारा नगर पालिका में विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें मामले ने काफी तूल पकड़ा था। इसके साथ ही बीते दिनों दो समुदायों के बीच उत्पन्न हुए विवाद के दौरान भी गजराज जाटव द्वारा विवादित बयान जारी किए गए, जिसको लेकर उनके ऊपर आपराधिक मामला भी दर्ज किया गया। जनपद अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के रोज ही पुलिस द्वारा इस मामले में गजराज को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
    इनका कहना है:
            जनपद अध्यक्ष पद पर बीजेपी समर्थित उर्मिला जाटव को निर्विरोध अध्यक्ष चुना गया है। यह जीत प्रदेश में भाजपा की जनहितैषी नीतियों की जीत है।

    नरेन्द्र सिंह कुशवाह, विधायक भिण्ड
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