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    जाति नही आर्थिक आधार पर दें आरक्षण का लाभ: गीतानंद

    गोहद 17/फरवरी/2018 (rubarudesk) @www.rubarunews.com>>   आरक्षण का आधार जाति व वर्ग के आधार पर न होकर आर्थिक आधारित होना चाहिए। क्यों की गरीबी किसी वर्ग विशेष में नही बल्कि कही भी हो सकती है। यह बात आरक्षण विरोध प्रदर्शन के तहत गोहद बंद के अवसर पर मुख्य अतिथि गीतानंद महाराज ने कही।
          शुक्रवार को आरक्षण के विरोध में सर्व समाज द्वारा गोहद बंद का आयोजन किया। जिसके तहत नगर के सभी बाजार बंद कराए गए। इस दौरान मुख्य बाजार चौराहा पर आमसभा आयोजित की गई। जहां मुख्य अतिथि गीतानंद ने कहा कि भारत के संविधान के अनुसार हर नागरिक को समानता का अधिकार दिया गया है, लेकिन उसके बावजूद भी जो आरक्षण दिया जा रहा है उसमें सिर्फ अनुसूचित जाति-जनजाति को ही शामिल किया गया है। जबकि आरक्षण आर्थिक आधार पर होना आवश्यक है, क्योंकि गरीब हर वर्ग में होता है हर समाज में होता है।  उन्होने कहा कि भारतीय संविधान के लागू होने पर प्रारंभ के 10 वर्ष के लिए दलितों और पिछड़ों के लिए आरक्षण व्यावस्था लागू की गई थी, जो बाद में वोट बैंक की राजनीति के कारण निरंतर बढ़ाई गई। आज के दौर में आरक्षण सामाजिक विषमता का एक बड़ा कारण बन गई है। संसद और विधानसभा में  बैठे नेताओं से देश के खंड-खंड होने से खतरा पैदा हो गया है। जाति आरक्षण देश के विकास में बाधक है। जाति आरक्षण अयोग्य व अनुभव हीनो को उच्च पदों पर नियुक्त कर योग्य एवं अनुभवी प्रतिभाओं को कुचला जा रहा है। उन्होने कहा कि आरक्षण का लाभ नेता व कुछ चुनिंदा लोगों को ही मिल रहा है, जिससे युवाओं की बड़ी संख्या बेरोजगारी को झेल रही है। आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान धारा शर्मा, केडी सोनकिया, नरोत्तम सिंह, गुड्डू तोमर, सतेन्द्र जैन, गिर्राज पांडे, कृष्णा पुरोहित, शिवदयाल चतुर्वेदी, योगेन्द्र गुर्जर सहित काफी संख्या में आम जन मौजूद रहा।
    कब होगा सबका विकास:

             इस अवसर पर पूर्व पुलिस अधिकारी केडी सोनकिया ने कहा कि सबका साथ सबका विकास का नारा देने के बाद भी आज देश में आर्थिक असमानता बनी हुई है। इसका सीधा हल आर्थिक आधार पर आरक्षण व्यवस्था लागू किया जाना ही है। उन्होने कहा कि गरीबी कभी जाति एवं वर्ग देख कर नहीं आती, वह तो किसी भी समाज में हो सकती है। श्री सोनकिया ने कहा कि मद्रास हाईकोर्ट ने माना है कि आरक्षण जातिगत नहीं बल्कि आर्थिक आधार पर लागू होना चाहिए। हम आरक्षण का विरोध नहीं करते लेकिन वर्तमान में राजनीतिक पार्टियों द्वारा अपने निजी स्वार्थ के लिए समय.समय पर आरक्षण को बढ़ा दिया जा रहा है। उन्होने कहा कि प्रदेश के मुखिया द्वारा सवर्ण समाज को निशाना बनाते हुए आरक्षण का समर्थन किया था, जिससे वर्ग विशेष में रोष व्याप्त है। जो समय आने पर अपना सटीक जबाव देगा। उन्होने कहा कि आरक्षण की लड़ाई में सवर्ण ही नही बल्कि संविधान में वर्णित दलित व पिछड़ा वर्ग भी शामिल हो रहा है। 
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