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    महाशिवरात्रि पर विशेष भ्रम- निवारण और निर्णय:- आचार्य डाँ. एकदेव श्री नेत्र के साथ..

    पालघर(महाराष्ट्र).(OmPrakashDwivedi) @www.rubarunews.com>>  इस वर्ष महाशिवरात्रि के पावन पर्व को लेकर कई तरह के विद्वानों के अपने विचार सामने आ रहे है.। कुछ विद्वानों एवं सरकारी छुट्टियों पर नजर डाले तो आगामी 13 फरवरी को महाशिवरात्रि का महापर्व जलाभिषेक , उपवास, रूद्राभिषेक, पूजन पाठन का निर्णय बन रहा है.। परन्तु कई ज्योतिष के जानकार तथा प्रकांड विद्वानों का मत 14 फरवरी को महापर्व महाशिवरात्रि मनाने पर अपने पक्ष को मजबूती से रखा है.।
             इसी तर्क पर भ्रम-निवारण और निर्णय को लेकर हमारे बोईसर रिर्पोटर ने महर्षि परासर ज्योतिष संस्थान के आचार्य डाँ. एकदेव श्री नेत्र मुबंई से एक प्रारंभिक चर्चा महाशिवरात्रि वर्त ,पूजन-पाठ को लेकर की.।
            आचार्य डाँ. एकदेव श्री नेत्र कहते है महाशिवरात्रि, जन्माष्टमी आदि व्रत निशिथ व्यापिनी तिथ्याधिरित होते है.।चूँकि निशिथ व्यापिनी का अर्थ संपूर्ण रात्रि में व्याप्त होना नहीं बल्कि रात्रि में व्याप्त होना है.। मध्य रात्रि तक व्याप्त तिथि श्रेष्ठ निशिथ व्यापिनी मानी जाती है.।
               महाशिवरात्रि व्रत फाल्गुन कृष्ण चर्तुदशी को प्रतिवर्ष मनाया जाजा है.। लेकिन इस वर्ष 13 फरवरी एवं 14 फरवरी दोनों दिन लगभग मध्य रात्रि को चर्तुदशी है.। यहीं पर भ्रम बन रहा है.।13 फरवरी को रात्रि 10:34 के बाद चर्तुदशी तिथि शुरू हो रही है.। जो अगले 14 फरवरी को रात 12:45 तक बनी रहेगी.। त्योहारों एवं व्रतों पर शुद्ध तिथि का महत्व रहता है.। तिथि वही शुद्ध है जो सूर्य परिष्कृत हो.। अर्थात जिस तिथि में सूर्योदय होता है .। वहीं तिथि श्रेष्ठ मानी जाती है.।
    14 फरवरी वाली चर्तुदशी महाशिवरात्रि के लिए अनिवार्य शर्त निशिथ व्यापिनी को  पूरा करते हुए उसी दिन अर्धरात्रि 12:45 तक बनी हुई है.।जो  सूर्य परिष्कृत अर्थात शुद्ध तिथि मानी जायेगी.। इसलिए देश, समाज ,सकल परिवार, एवं पुत्र-पौत्रादि के कल्याण के इच्छुक जातकों को 14 फरवरी को महाशिवरात्रि पर विशेष पूजन अर्चन करना चाहिए.।


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