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    हिंदी, अंग्रेजी को छोड़ देवभाषा संस्कृत भाषा में छपवाया शादी का कार्ड, राष्ट्रीय योजना का प्रसार भी और देव भाषा का प्रचार भी

    इटावा (कोटा) (krishnakantRathore) @www.rubarunews.com>>  शादी विवाह में जहाँ हमारी सांस्कृतिक परम्पराओं का निर्वहन दिखाई देता हैं, वहीं ऐसे आयोजन जन साधारण तक सकारात्मक सन्देश पहुचानें के वाहक भी हो सकते हैं। ऐसे आयोजनों में जन सामान्य, परिचितों और निकट सम्बन्धियों को आमंत्रित करने का एक सामान्य माध्यम निमंत्रण पत्र होता हैं, वह सामान्य सा निमंत्रण पत्र कभी विशेष और महत्वपूर्ण भी हो जाते हैं। ऐसा ही एक साधारण सा निमंत्रण पत्र प्रसारित हुआ, जो अपने में मौजूद कुछ बिंदुओं के चलते विशेष और खास बन गया। 
                 
    निमंत्रण पत्र की मुख्य विशेषता बनी, उसकी भाषा हिन्दी या अंग्रेजी न होकर देवभाषा संस्कृत में होना। यही नहीं यह निमंत्रण पत्र हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी कार्य योजना "स्वच्छ भारत अभियान" का सन्देश लोगों तक पहुचानें का वाहक बना तो सामाजिक समरसता का सन्देश भी सभी को दे रहा हैं।
                  देवभाषा संस्कृत के प्रसार, राष्ट्रीय योजना और सामाजिक समरसता का सन्देश देने वाला यह निमंत्रण पत्र प्रसारित किया गया, कोटा जिले के इटावा कस्बे में रहने वाले रामस्वरूप नागर और जितेंद्र कुमार नागर के द्वारा। यह निमंत्रण पत्र रामस्वरूप नागर के छोटे पुत्र गोवर्धन (रेवतीरमण) के विवाह के अवसर पर छपवाया गया हैं, जो पूर्णतः संस्कृत भाषा में हैं और इस पर "स्वच्छ भारत अभियान" का सन्देश देता हुआ अभियान का प्रतिक भी अंकित करवाया गया हैं। तो नीचे की ओर सामाजिक समरसता का सन्देश देने वाला मूल मन्त्र "हिन्दव: सोदराः सर्वे, न हिन्दू: पतितो भवेत्" भी प्रकाशित है जिसका अर्थ हैं, सब हिन्दू भाई हैं कोई भी हिन्दू पतित नही है।
              दुल्हें का बड़ा भाई जितेन्द्र कुमार नागर, जो कि विश्व हिन्दू परिषद् के कोटा विभाग में विभाग संगठन मन्त्री के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं, ने बताया कि संस्कृत महज एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कार, हमारी संस्कृति का अंग है। इसलिए हमने तय किया किनिमंत्रण पत्र से लेकर संपूर्ण विवाह कार्यक्रम संस्कृत में संपन्न कराएंगे। इन्होंने बताया कि समस्त भाषाओं की जननी संस्कृत का महत्व संस्कृत से दूर भागती युवा पीढ़ी को  देना भी एक उद्देश्य रहा है। जब हमारे प्रधानमंत्री स्वयं हर मौके पर स्वच्छता की बात करते हैं, तो लोगों तक स्वच्छता का सन्देश देने के लिए "स्वच्छ भारत अभियान" का प्रतिक भी इस पर दिया गया हैं। 
    मूलरूप से एक छोटे से गॉव सौभागपुरा के रहने वाले और संघ की विचारधारा से प्रेरित रामस्वरूप नागर और जितेंद्र कुमार नागर ने बताया कि वर्तमान में कुछ अराजक तत्वों द्वारा समाज के समरस वातावरण को बिगाड़ा जा रहा हैं, ऐसे में सामाजिक समरसता का संदेश भी दिया गया है। केवल सन्देश छपवाया ही नहीं हैं, अपितु जहाँ भी इन्हें वितरित करने गये, उन्हें इन संदेशों के बारे मे बताया और प्रेरित करते हुये अपने पारम्परिक परिधानों में सम्मिलित होने का आग्रह भी कर रहे हैं।
               गोवर्धन (रेवतीरमण) और गुणवंती का विवाह 5 मार्च 2018 को कोटा के पास डुंगरज्या गॉव में पूर्ण विधिविधान से सभी वैवाहिक कार्य भी संस्कृत के साथ संपन्न होंगा। गोवर्धन और गुणवंती दोनों नें भी कहा कि संस्कृत महज एक भाषा विचार हैं, संस्कृति का अंग है। इसलिए हमने तय किया कि हम संपूर्ण विवाह कार्यक्रम संस्कृत में सादगी और परंपरागत रूप से संपन्न होंगे। बारात के स्वागत में स्वस्ति वाचन होगा। हर व्यक्ति परंपरागत परिधान धोती-कुर्ता धारण और महिलाएं चुंदड़ी और साड़ी पहनेंगी।
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