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    लोक अदालत में पहुंचे लोग, आपसी सुलह से निपटाऐ मामले

    भिण्ड 10/फरवरी/2018 (rubarudesk) @www.rubarunews.com>>  जिला एवं सत्र न्यायाधीश माण् श्री भारत सिंह औहरिया ने कहा है कि पक्षकारों को सस्ता एवं शुलभ न्याय दिलाने में नेशनल लोक अदालत की महत्वपूर्ण भूमिका है। इस लोक अदालत के लिए गठित की गई खण्डपीठों के माध्यम से विभिन्न प्रकार के प्रकरणों का निराकरण आपसी सुलह एवं समझौता के आधार पर करने की पहल की गई है। यह बात जिला एवं सत्र न्यायाधीश भारत सिंह अहौरिया ने शनिवार को नेशनल लोक अदालत के शुभारंभ पर ही। 
               
    जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री औहरिया ने कहा कि इस वर्ष की प्रथम नेशनल लोक अदालत के माध्यम से निराकृत होने वाले प्रकरण में विवाद समाप्त होने के साथ ही सकारात्मक सोच के साथ अन्तर आत्मा से सुलह एवं समझौते का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि लोक अदालत एक ऐसा मंच है जहां पर प्रकरणों के निराकरण में मनमुटाव एवं कटुता समाप्त होती है। राजीनामा के आधार पर प्रकरणों का निराकरण आसानी से किया जाता है। लोक अदालत में निराकृत किए गए प्रकरणों की अपील नहीं होती है। इसी प्रकार गठित खण्डपीठ के माध्यम से अधिक से अधिक पक्षकार लाभान्वित होते है। डीजे श्री अहौरिया ने जिला मुख्यालय पर गठित की गई खण्डपीठो का निरीक्षण करए प्रकरणों के निराकरण की स्थिति का अवलोकन किया। इस मौके पर प्रधान न्यायाधीश कुटुम न्यायालय संजीव अग्रवाल ने कहा कि चालू वर्ष में प्रथम नेशनल लोक अदालत का आयोजन विभिन्न खण्डपीठों के माध्यम से किया गया है। इन खण्डपीठों के द्वारा पीठासीन अधिकारी पक्षकारों के राजीनामा योग्य प्रकरणों का निराकरण कर सस्ता एवं शुलभ न्याय प्रदान का अवसर प्राप्त होता है। उन्होनें कहा कि कुटुम न्यायालय में प्रचलित प्रकरण भी नेशनल लोक अदालत के माध्यम से निराकृत किए जा रहे है, जिनमें अधिक से अधिक राजीनामा का प्रयास किया गया हैं। यहां बार एशोसिएशन के अध्यक्ष उल्फत सिंह चौहान ने कहा कि नेशनल लोक अदालत के माध्यम से आपसी सुलह एवं समझौता के आधार पर प्रकरणों के निराकरणो का अवसर प्राप्त होता है। पक्षकार का प्रकरण आसानी से निराकरण करने में लोक अदालत एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जिसके माध्यम से पक्षकार के दिल और दिमाग को जीतकर उसके प्रकरण का निराकरण आसानी से किया जाता है। इस अवसर पर विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार गुप्ता, प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश उमेश पाण्डव, तृतीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश धनराज दुबेला, चतुर्थ अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पवन कुमार बांदिल, पंचम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश शकील खांन, मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी जितेन्द्र कुमार बाजोलिया, चतुर्थ व्यवहार न्यायाधीश वर्ग दो विकास शुक्ला, द्वितीय व्यवहार न्यायाधीश वर्ग दो ज्ञानेन्द्र शुक्ल, तृतीय व्यवहार न्यायाधीश वर्ग दो शरद जायसवाल सहित काफी संख्या में शासकीय अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।
    खत्म होगा मनमुटाव:
          आयोजित नेशनल लोक अदालत में शामिल हुए द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ कुलदीप जैन ने कहा कि नेशनल लोक अदालत में अधिक से अधिक प्रकरणों का निराकरण करने की पहल की जा रही है। नेशनल लोक अदालत में प्रकरण के निराकरण से आपसी बेमनुष्यता समाप्त होती है। उन्होंने कहा कि यहां भाई चारे के साथ सभी प्रकार के प्रकरणों को निराकृत करने का अवसर मिलता है। कार्यक्रम का संचालन जिला विधिक सहायता अधिकारी श्री संजय जैन ने किया। अंत में ट्रेनी जज सोनू जैन ने सभी के प्रति आभार प्रदर्शित किया। 
    हुआ प्रकरणों का निराकरण:
          शनिवार को आयोजित नेशनल लोक अदालत में आपराधिक, दीवानी, विद्युत अधिनियम, श्रम, मोटर दुर्घटना दावा, प्रिलिटिगेशन, निगोशिएबल इंस्टूमेन्ट एक्ट के अन्तर्गत चैक बाउन्स प्रकरण, कुटुम्ब न्यायालय, ग्राम न्यायालय, राजस्व न्यायालय, उपभोक्ता फोरम, प्लीबारगेंनिंग, विड्रावल क्रिमीनल केस,सहकारिता प्रकरण, क्रिमिनल समरी, विद्युत चोरी के प्रकरण, लीगल सर्विसेस मैटर्स एवं शिक्षा, स्वास्थ्य, वन तथा अन्य शासकीय विभागों के प्रकरणों का निराकरण करने की पहल की गई। इसीप्रकार विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 135138 एवं 126 के अन्तर्गत न्यायालयों में लंबित प्रकरणों में निम्न दाव श्रेणी के समस्त घरेलूए समस्त कृषिए 5 किलो वाट भार तक के गैर घरेलू 10 अश्वशक्ति भार तक के औद्योगिक उपभोक्ताओं के प्रकरणों में छूट प्रदाय की गई।
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