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    बच्चों के साथ मित्रवत व्यवहार करना ताकि वे सर्वांगीण विकास कर सकें

    दतिया 12/02/2018 (ramjisharanRai) @www.rubarunews.com>> श्रीराम कथा आयोजन समिति दतिया के तत्वावधान में 07 से 16 फरवरी 2018 तक कथामृत की वृष्टि सवारीधाम बग्गीखाना दतिया में प्रवाहित होरही है। प्रतिवर्ष की भांति इस बार भी श्री रामकथा आयोजन समिति द्वारा  किया जा रहा है।
    कथा वाचक संत जी ने कथा में श्रोताओं से बच्चों में संकुचित भाव उनके समग्र विकास में बाधक होते हैं, उन्हें विचारों की अभिव्यक्ति के लिए निःसंकोच करने हेतु प्रेरित करना चाहिए। 
    बच्चों के साथ हमें मित्रवत व्यवहार कर उनको प्रोत्साहित करना चाहिए ताकि वे सर्वांगीण विकास कर सकें।यह हम माता-पिता या गुरुजी होने के नाते हमारी जिम्मेदारी है।
    उपासनात्मक, सकारात्मक दृष्टि पहुंचाती है लक्ष्य की ओर अर्थात भगवत प्राप्ति में सहयोगी होती है। बासनात्मक दृष्टि नरक, पतन की ओर ले जाती है।परमपिता परमात्मा की ओर दृष्टि को सकारात्मक दृष्टिकोण के माध्यम से ले जाती है।
    रामकथा आयोजन समिति द्वारा प्रतिवर्ष श्रीरामकथा की सुरसरि प्रवाहित होती है 

    जीवित धारा को मोड़ ता है जबकि मृत धारा के साथ बहता है। अर्थात जीवित हो तो अपराधों, गलत कार्य करने वाले दुष्टों का पुरजोर विरोध करना चाहिए ताकि रामराज की स्थापना हो सके और हमारे समाज में महिलाओं को सूर्पनखा की उपाधि न दे सके।
    जुबती भवन झरोखन लागी। गुरुजी से आज्ञा लेकर प्रभु श्रीराम जनकपुर परिभ्रमण करने चले तो जनकपुर की युवतियाँ आपने अपने भवनों के ऊपर जाकर उनकी छवि निहारने का प्रयास करने लगी। किन्तु ठीक से छवि दर्शन नहीं हुए और संकेत मिला कि पुष्पवाटिका में पधारिये। क्योंकि वहाँ से गुरुजी की पूजा हेतु सुमन भी चुन लेंगे।

    जांहि जहां जहां बंधु दोउ,  तहँ तहँ परमानंद। गोस्वामी तुलसीदास जी कहते है कि जनकपुर में जहाँ जहाँ प्रभु पहुँचे वहाँ परमानन्द की अनुभूति हुई।
    उसके उपरांत
    समय जान गुरु आयुष पायी, लेन प्रसून चले दोउ भाई।
    इधर गुरुजी की आज्ञा पाकर पुष्पवाटिका को दोनों भाई चले वहीँ जनकनंदिनी अपनी सखियों सहित गौरी पूजन हेतु चली:
    तेहिं अवसर सीता तहँ आयी 
    गिरिजा पूजन जननी पठाई।
    उसी समय जगतजननी जनकदुलारी गौरी पूजन हेतु पुष्पवाटिका पहुँची। कथावाचक संतजी ने अनवरत रूप से अपने आराध्य देव भगवत स्मरण करने की अपील की गई। उमा कहहुँ मैं अनुभव अपना, सत हरि भजन जगत सब सपना। हम किसी भी कार्य में संलग्न रहे, हाथों से,  पैरों से मन से संलग्न रहें किन्तु वाणी से भगवतभजन अनवरत करते रहें। प्रकृति में भगवत दर्शन कर उसकी आराधना करें तो जीवन सुखमय होगा। प्रकृति संरक्षण करना हमारे जीवन को संरक्षित करेगा।
    उक्त आयोजन में मुख्य यजमान सरपंच संघ के जिलाध्यक्ष श्रीमती प्रभा - जितेन्द्र सिंह ठाकुर है। 
    कथा के समापन पर 61 कन्याओं के विवाह भी बड़ी धूमधाम से किया जावेगा। रामकथा की शहर में चहुँओर  चर्चा है।
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