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    कामेश्वर धाम में भगवान शिव ने देवताओं के सेनापति कामदेव को जला कर भस्म किया था

    कामेश्वर धाम 9/2/18 (विकास राय) @www.rubarunews.com>>  कामेश्वर धाम का वर्णन शिव पुराण में मिलता है इसके अनुसार यह वही जगह है जहां भगवान शिव ने देवताओं के सेनापति कामदेव को जला कर भस्म कर दिया था। यहां पर आज भी वह आधा जला हुआ, आम का वृक्ष मौजूद है जिसके पीछे छिपकर कामदेव ने समाधि मे लीन भोलेनाथ को जगाने के लिए उनके उपर पुष्प बाण चलाया था। बताते चलें कि ये स्‍थान उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में गाजीपुर की सीमा पर कारो गांव में स्थित है।
    आइये जानते है क्या है इसके पीछे की कथा
         शिवपुराण के अनुसार जब भगवान शिव कि पत्नी सती अपने पिता द्वारा आयोजित यज्ञ मे अपने पति भोलेनाथ का अपमान सहन नही कर पाती है और यज्ञ वेदी मे कूदकर आत्मदाह कर लेती है, तब शिवजी अपने तांडव से पूरी सृष्टि मे हाहाकार मचा देते है। इससे व्याकुल सारे देवता उनको समझाने पहुॅंचते है। महादेव शान्त होकर, इसी स्‍थान पर परम शान्ति के लिए, गंगा और तमसा के पवित्र संगम पर आकर समाधि मे लीन हो जाते है।
         इसी बीच राक्षस तारकासुर अपने तप से ब्रह्मा जी को प्रसन्न करके वरदान प्राप्त कर लेता है कि उसकी मृत्यु केवल शिव पुत्र कार्तिकेय के द्वारा ही हो सकती थी। यह एक तरह से अमरता का वरदान था क्योंकि शिव तो समाधि मे लीन हो चुके थे। तारकासुर का उत्पात दिनो दिन बढ़ता जाता है और वो स्वर्ग पर अधिकार करने कि चेष्टा करने लगता है। इससे देवता चिंतित हो जाते हैं। वे कामदेव को शिव की समाधि भंग करने के लिए नियुक्‍त करते हैं।
          सारे प्रयास विफल होने पर अंत में कामदेव स्वयं भोले नाथ को जगाने लिए आम के पेड़ के पत्तो के पीछे छुप कर पुष्प बाण चलाते है। पुष्प बाण सीधे भगवान शिव के हृदय मे लगता है, और उनकी समाधि टूट जाति है। क्रोधित शिव कामदेव को अपने त्रिनेत्र से जला कर भस्म कर देते हैं, जिसमें आम का वृक्ष भी झुलस जाता है। जिसके अवशेष इस स्‍थान पर आज भी प्रमाण के रूप में मौजूद हैं।
          महर्षि विश्वामित्र के साथ भगवान श्रीराम,लक्ष्मण भी आये थे यहां त्रेतायुग में इस स्थान पर महर्षि विश्वामित्र के साथ भगवान श्रीराम लक्ष्मण भी आये थे जिसका उल्लेख रामायण में भी है। अघोर पंथ के प्रतिष्ठापक श्री कीनाराम बाबा की प्रथम दीक्षा यहीं पर हुई थी। यहां पर दुर्वासा ऋषि ने भी तप किया था।
               कामेश्वर धाम के प्रबंधक रामाशंकर दास के द्वारा धर्मापुर बांध पर मुहम्मदाबाद चितबडागांव मार्ग पर भव्य प्रवेश द्वार,कामेश्वर धाम पर खुबसूरत प्रवेश द्वार,कामेश्वर सत्संग हाल एवम करोड़ों रूपये की लागत से कामेश्वर धाम का जिर्णोद्धार करा कर धाम को और भी भव्यता प्रदान की गयी है।



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