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    भागवत श्रृवण मात्र से नही होता हृदय रोग: राघवदास

    भिण्ड 26/फरवरी/2018 (rubarudesk) @www.rubarunews.com>> मेहगांव विधानसभा क्षेत्र के ग्राम सांगली में श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें कथा श्रीश्री राघव दास महाराज जी द्वारा प्रभजीत की जा रही है। कथा के छठवें दिन उन्होंने उपस्थित जन समुदाय को भागवत प्रेमियों को कथा सुनाते हुए बताया, कि भागवत कथा के श्रृवण मात्र से व्यक्ति को कभी भी हृदय रोग नहीं होता है

          आयोजित भागवत कथा में उन्होने कहा कि कथा सुनने के रोमांच से श्रोता के रक्त प्रवाह को सुचारु रुप से संचालित होने में मदद मिलती है। इसके साथ ही उन्होंने प्रेम प्रसंग पर भगवान कृष्ण और राधिका ओके बीच चले प्रश्न को बसु बखूबी वर्णित किया। वर्णन करते हुए, उन्होंने कहा कि सुख और दुख व्यक्ति पर कभी एक साथ नहीं हो सकते सुख के समय किसी भी व्यक्ति के जीवन में उसके जीवो के जीवन के आपसे मुलाकात होती है, जबकि दुख के समय उसके द्वारा किए गए आचरण द्वारा पुण्य का आंकलन किया जाता है। भगवान कृष्ण के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया, कि भगवान कृष्ण 11 वर्ष की आयु में मथुरा पहुंचकर कंस का दहन किया कंस का वध किया और पांच रूप में विद्वान जीव का नाश किया 14 वर्ष मथुरा में रहने के पश्चात भगवान कृष्णा ने द्वारिका की ओर प्रस्थान किया। जहां उन्होंने 48 फुट चौड़ा और 64 कोस लंबा घर बनाया जिसके अनेक द्वार थे वहां की प्रजा ने उन दीवारों को ढूंढते हुए हमार द्वारका अर्थात हमारा द्वार कहां है ऐसा वर्णित किया। जिससे उसका नाम द्वारिका पड़ा 11112 द्वारका पर नाश करने के बाद राज करने के बाद भगवान कुरुक्षेत्र में पहुंचे भागवत कथा का श्रवण कराते हुए श्रीमद् सॉन्ग संत राघव दास जी ने भगवान राम के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया, कि रावण विद्वान था वह जानता था केवल अपने उधर से जीवन को मूंछ नहीं मिलेगा बल्कि संपूर्ण वंश का उद्धार हो इसीलिए उसने सीता को अपहरण करने की योजना बनाई और वह लंका ले गया ताकि भगवान राम के पग लंका में पढ़ें और पूरा लंका मुझको प्राप्त हो इसीलिए ऐसा माना जाता है, कि भगवान की कथा श्रवण करने और कथा सुनाने से व्यक्ति को कुंड का प्रतिफल प्राप्त होता है।
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