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    राम राज्य की स्थापना राजगद्दी से नही वल्कि व्यास गद्दी से ही संभव



    गाजीपुर11/2/2018(विकास राय)@www.rubarunews.com>> जनपद के बाराचंवर क्षेत्र के असावर गांव में स्थित बुढे नाथ महादेव के मंदिर परिसर में आयोजित श्री रूद्र महायज्ञ के दौरान अयोध्या  से पधारे मानस मर्मज्ञ भागवत् वेत्ता महामण्डलेश्वर श्री श्री 1008 श्री शिव राम दास जी फलहारी बाबा ने अपने मुखारविंद से राम कथा रूपी अमृत वर्षा करते हुवे कहा की राम राज्य की स्थापना राजगद्दी से नही वल्कि व्यास गद्दी से ही संभव है। चक्रवर्ती सम्राट दशरथ राज गद्दी के द्वारा नहीं परन्तु गुरू वशिष्ठ जी ने व्यास गद्दी के माध्यम से राम राज्य की स्थापना कर दी थी। पूज्य फलहारी बाबा ने उपस्थित श्रोताओं से कहा की भाग्य भी चार प्रकार का होता है। बडभागी, अति बडभागी, परम बडभागी तथा अभागी। आपने इनकी ब्याख्या करते हुवे कहा की जो माता पिता के वचन का पालन करे वह बडभागी है।
    परमात्मा की तिब्र अभिप्सा के साथ गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या प्रतिज्ञा करके राम प्राप्ति तदोपरान्त अतिबडभागी बन गयी परन्तु नीच जाति का पक्षी गिद्ध जटायु जी महाराज सीता की रक्षा करते हुए अपना जीवन वलिदान कर परम बडभागी बन गये। नारियों की शील एवम प्रतिष्ठा की रक्षा करने के लिए राम काल्य का गिद्ध भी अपने प्राण की आहूति दे दिया। प्रायः आज के तथाकथित लोग नारियों की रक्षा नहीं वल्कि हरण करने के लिए अपना जीवन गंवा बैठते है। नारी की रक्षा शक्ति की रक्षा है। पूज्य फलहारी जी महाराज ने कहा की भगवान के मर्म को भक्त ही जान सकता है। ज्ञानियों को परमात्मा की प्राप्ति होती है तो वह ईश्वर की ही परिक्षा लेने लगता है।किन्तु भक्त परिक्षा देने के लिए सतत् तैयार रहता है। महर्षि विश्वामित्र नें ताड़का बध करा कर राम का परिक्षा लिया था। परन्तु शबरी प्रतिक्षा करते हुवे जीवन पर्यन्त परिक्षा देनें के लिए तैयार रही। ज्ञान में अहंकार होता है पर भक्त का जीवन समर्पण का होता है।
    फलहारी बाबा ने उपस्थित श्रोताओं से सरल सहज एवम संगीतमय कथा के द्वारा समझाते हुवे कहा की जीव जब परमात्मा के चरणों में समग्र सत्ता के साथ समर्पण करता है तो परमात्मा उसे अपने हृदय के सर्वोच्च शिखर पर सर्मासित कर लेता है।
    आपने कहा की कैकेयी निंदनिया नहीं परम वंदनीया है। राम का जन्म कौशल्या के कोख से हुवा तो राम राज्य का जन्म कैकेयी की कोख से हुवा। राम को अयोध्या की चाहदिवारी से निकाल कर विश्व पटल पर कैकेयी ने ही स्थापित करते हुवे सिमित से असिमित बना दिया। कैकेयी मानस की क्रिया स्वरूपा है। कथा में रामराज्याभिषेक के पश्चात जम कर फूल की होली खेली गयी।कथा में सभी पत्रकार बंधु को फलहारी जी महाराज के द्वारा आशिर्वाद स्वरूप कलम एवम अंगवस्त्रम प्रदान कर सम्मानित किया गया।
    कथा में मुख्य यज्ञाचार्य हरिश्चन्द्र पाण्डेय ,मुख्य यजमान प्रदीप राय,गोविन्द राय, विक्की राय,अवधेश राय, ओमकार राय, अरबिन्द राय ,हरिशंकर राय ,अजय राय, कृष्णा नन्द उपाध्याय,विजय राजभर,लालबचन यादव,बिरेन्द्र कुशवाहा,आशुतोष राय, यशवंत सिंह,समेत हजारों की संख्या में पुरूष और महिलाएं उपस्थित रही।

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