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    प्रक्रति का मनुष्य ही होता है सर्वश्रेष्ठ .विशल्य भारती भैया

    गोहद 13/फरवरी/2018 (rubarudesk) @www.rubarunews.com>> श्री चन्द्र प्रभु दिगंबर जैन मंदिर इटायली गेट के पास मंगलवार को नवीन शिखिर पर भव्य कलश रोहड संपन्न किया गया। जिसमें में बालब्रह्मचारी भैय्या विशल्य भारती, बृह्मचारी धन्नू भैय्या के सानिध्य में ब्रह्मचारिणी अल्का दीदी एवं ब्रह्मचारिणी भारती दीदी के निर्देशन में प्रतिष्ठा की गई। चार्य एपंडित मुकेश शास्त्रीए पंडित सुशील भैया एसहयोगी मनोज जैन द्वारा संगीतमय विधि.विधान पूर्वक संपन्न कराया जा रहा है जिसमें सुबह पूजन ए जाप्यानुष्ठानए वेदी शुद्धिए यागमंडल विधानएकलश शुद्धि का अनुष्ठान किया जा रहा है जिसमें सैकड़ों लोगों ने भाग लिया तत्पश्चात प्रभु

                इस अवसर पर भैय्या विशल्य भारती जी ने प्रवचन देते हुए कहा कि वर्तमान समय में दो प्रकार के मनुष्य होते है, आकृति और प्रकृति। जिसमें आकृति मनुष्य हर जगह मिल जाते हैं लेकिन प्रकृति मनुष्य बहुत कम मिलेंगे। पहले हमें प्रकृति मनुष्य होना आवश्यक है। श्रावक को देवपूजा, गुरू उपासना, स्वाध्याय, संयम, तपदान छह आवश्यक कार्य जरूरी हैं। उसे श्रद्धावान, विवेकवान, क्रियावान होना चाहिए। अर्थात् जो मनुष्य इन छह आवश्यक कार्यों को पूरा करता है उसे सच्चा ज्ञान होता है और चारित्र और सम्यकदर्शी होता है। ऐसा व्यक्ति ही मोक्ष का सच्चा साधक है। उन्होने कहा कि मनुष्य को जीवन में प्राकृतिक होना बहुत आवश्यक है। क्योंकि प्रकृति ही मनुष्य ही सर्वश्रेष्ठ बनाती है। आयोजित कार्यक्रम इंद्रसेन जैन बाबूजी, कुन्थादेवी सहित काफी संख्या में जैनधार्मवलंबी मौजूद रहे। 
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