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    अपनी कला और कौशल से समृद्ध बना भारत: सह सर कार्यवाह

    श्योपुर 19/02/2018 (rubarudesk) @www.rubarunews.com>> वनवासी बालिकाओं के लिए शिक्षण हेतु आवासीय छात्रावास एवं कौशल प्रशिक्षण केन्द्र खोले जाने के लिए जिला चिकित्सालय के समीप स्थित सेवा भारती के खाली पड़े भू-खण्ड का भूमि पूजन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह श्री सुरेश जी सोनी के द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संचालन सेवा भारती पूर्णकालिक दिनेश शर्मा द्वारा किया गया। अतिथियों का परिचय संतोषदत्त शर्मा द्वारा किया गया। अंत मेें आभार प्रदर्शन राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के राघवेन्द्र टक्साली द्वारा किया गया। कार्यक्रम का भूमि पूजन का कार्य पंडिता कृष्णगोपाल शर्मा द्वारा सम्पन्न कराया गया। इस अवसर पर मंचासीन अतिथियों के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह प्रांत संघचालक श्री अशोक पाण्डे एवं सेवाभारती प्रांतीय कार्यकारिणी सदस्य प्रदीप खाण्डेकर मौजूद थे। वहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक श्री अशोक पोरवाल, सह प्रांत प्रचारक राजमोहन सिंह, प्रांत घोष प्रमुख कृपाण सिंह, विभाग प्रचारक बृजकांत चतुर्वेदी, विभाग संघ चालक देवेन्द्र कुशवाह, जिला संघ चालक रामलखन मीणा, विभाग कार्यवाह राजेश भार्गव, विभाग शारीरिक प्रमुख नरेन्द्र मीणा, सेवा भारती के दुर्गाप्रसाद अग्रवाल, बाबूलाल जाटव, विधायक दुर्गालाल विजय, भाजपा जिलाध्यक्ष अशोक गर्ग, पूर्व जिलाध्यक्ष महावीर सिंह सिसौदिया, कलेक्टर पीएल सोलंकी, भाजपा जिला महामंत्री रामलखन नापाखेड़ली, भाजपा नेता कैलाश नारायण गुप्ता, सुरेशचन्द जैन एडवोकेट मुख्य रूप से उपस्थित थे।
    भूमि पूजन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह श्री सुरेश जी सोनी ने कहा कि समाज में जानकारी या समझदारी का अभाव नहीं है। हमारे ग्रन्थों में न जाने कब से ऋषि-मुनि कह गए हैं और जितने भी देश में कथा वाचक है, जो चैनलोंं के माध्यम से कितनी अच्छी-अच्छी बातें बताते है, लेकिन इसके बाद भी बदल कुछ भी नहीं रहा है, ऐसा लगता है। हमारे पूर्वजों ने कहा है कि जानना पर्याप्त नहीं है, जब तक वह वो आपका स्वभाव नहीं बनता है, आपके जीवन में नहीं उतरता, जब तक उसका कोई अर्थ नहीं है और इसलिए जो हम जानते है, उसका थोडा स्मरण करना है। तो बड़े सरल शब्दों में अपने ऋषियों ने बहुत सी बातें कही हैं। ऐसा कहते है कि हमारे जो ऋषि वेदा व्यास जो थे, भारत का ज्ञान करम बढ़ाने में उनका बहुत बड़ा हाथ है। उनकी एक वेद राशि को उन्होंने चार भागों में किया। सर्व साधारण आदमी सारी अध्यात्म की, दर्शन की, जीवन की बातों को समझे इसलिए कहानियों के रूप में घटनाओं के रूप में सरल रूप में पुराणों में कहा गया। तो 18 पुराण कहते हैं। किसी ने व्यास जी को पूछा कि इतना लम्बा चौड़ा आपने लिख दिया है, इसको समझेगा कौन, पढ़ेगा कौन। तो हमें कुछ सरल रूप में बताईये, तो एक श£ोक अपने यहां चलता है कि अष्टादश पुराणें सू, व्यासस्य वचनत्वयं, यानी 18 पुराणों में जो कुछ भी कहा है व्यास ने उसका भाव क्या है, तो बोले दो वाक्य है, परोपकाराय पुण्याय पापाय परपीडनम। 18 पुराणों में एक ही बात कही कि आपके कहने से बोलने से करने से किसी का भला होता है, परोपकार होता है, तो पुण्य क्या है उसका मापन है, आपकी कृति से किसी दूसरे का भला हो रहा है या नहीं और पाप क्या है आपके कुछ करने से दूसरे का नुकसान तो नहीं हो रहा है। कहते हैं ना कि हमको चारो ओर देखकर चलना चाहिए, लेकिन कुछ बातें होती है, जिन्हें हम देखकर भी नहीं देखते है। मोहल्ले में रहतें है, आस-पास देखते है लेकिन अशिक्षा है यह दिखती है क्या, गरीबी है दिखती है क्या, बहुत सी कुरूतियों है दिखती है क्या, तो यहां थोड़ी सी कठिनाई होती है। और ये तब होता है, तो हमारे पूर्वजों ने एक बात कही है कि आदमी के तीन प्रकार है। स्थूल शरीर, सूक्ष्म शरीर और कारण शरीर। स्थूल शरीर अन्यमय है पदार्थ का बना है। जो सूक्ष्म शरीर है वो विचार का बना है, लेकिन जो कारण शरीर है वह भाव का बना है, भाव जगत। तो ये जो अंदर हमें समाज में दिखता हैं न आदमी जानता है कि हमें यह करना चाहिए, और उसका बहुत बढिय़ा भाषण भी दे सकता है, लेकिन उसके जीवन में नहीं है, क्यों नहीं है, क्योकि उसके विचार जगह में तो है, लेकिन उसके भाव जगत में नहीं है। जब भाव जगत में परिवर्तन आता है, तब वास्तवित परिवर्तन आता है। इसी को अपने यहां कहते हैं न आदमी अंदर से बदलता है।  ऐसा बोलते हैं न कभी-कभी अरे ये कंजूस था, आज-कल बड़ा दानी हो गया, ये कंजूस से दानी हुआ यानी क्या हुआ। उसके भाव जगत में बदलाव आ गया। भावना से जब हम महसूस करते हैं, वहीं से सेवा का प्रारंभ होता है। अपने यहां दो शब्द चलते है एक है वेदना और एक है संवेदना। वेदना यानी तकलीफ होना, ये मनुष्य को, पशु को, सबको होती है वेदना कोई भी कष्ट हुआ, तकलीफ हुई, हम जो नहीं चाहते है, किसी ने कह दिया। लेकिन मनुष्य में एक विशेषता है कि मनुष्य केवल वेदना की अनुभूति नहीं करता है, उसमें संवेदना की सामर्थ भी रहती है, संवेदना का मतलब सीधे आपको तकलीफ नहीं हुई है, तकलीफ किसी दूसरे को है, लेकिन उस तकलीफ को देखकर आप बेचेन हो जाते है और ऐसा लगता है वो आपको हो रही है, यह जो अनूभूमि है उसका नाम है समवेदना जो उसको तकलीफ हो रही है वो ही आपको हो रही है। और संवेदना मन में जगती है, तभी आदमी की आंख से आंसू निकलता है। जब कभी भी अपने आप-पास की इन कठियाईयों को देखकर अपने ह्रदय में कभी दर्द होता है और आंख में कभी आसू आता है, तो समझिये वहीं से सेवा का भाव प्रारंभ होता है। और इस नाते से ये जो सेवा का जो भाव है, उसका महत्व है और यहीं वास्तविक आध्यात्म है। उस भाव से समाज को आगे बढऩे के कुछ माध्यमों की जरूरत पड़ती है और उसके लिए ऐसे कुछ केन्द्र रहते है जो कई लोगों को वहां अपनी सामर्थ लगाने की प्रेरणा देते हैं और इस नाते से सेवा भारती ने जो एक विचार किया है, यहां एक भूखण्ड मिला है, सेवा भारती ने अभी तो शुरू मेें दो बातें कहीं है कि एक छात्रावास चलायेंगे और कोशल विकास की प्रक्रिया करेंगे। एक जीवन की दृष्टि और दिशा ये केन्द्र दे सके। छात्रावास से संस्कार, एकात्मता, संस्कार रहने वाले बच्चों के अंदर ये भाव उत्पन्न हो। जब तक ट्रेक बदलेगा नहीं, तब तक देश की समस्या का समाधान नहीं होगा। हमारे यहां एक कहावत है कि उत्तम खेती, मध्यम व्यापार और अदम चाकरी,  नौकरी का तीसरा नंबर लगता था, लेकिन अब यह बिल्कुल उल्टा हो गया। हर पढ़ाई करने वाला सोचता है कि एक अच्छी नौकरी मिल जाए, लेकिन इतना बड़ा देश है, इतनी बड़ी जनसंख्या है, कितने भी प्रत्यन करलो, सबको नौकरी मिले ये संभव नहीं है। भारत को सोने की चिडिय़ा कहते थे, लेकिन भारत सोने की चिडिय़ा कैसे बना, अपनी कला से, अपने कौशल से। भारत लूट-खसोंटकर समृद्ध नहीं बना, बल्कि अपनी कला से कौशल से, वाणिज्य से व्यापार से बड़ा बना। कोशल विकास केन्द्र का विचार करेंगे तो कई और भी प्रकार सामने आ सकते हैं। इसलिए हम इस दिशा में प्रत्यत्न करेंगे तो यह केन्द्र तो अपने इस क्षेत्र में इस दिशा में ऊंचा उठेगा ही बल्कि इस क्षेत्र में कार्य करने वाला वर्ग भी ऊंचा उठेगा। इस कार्य में सभी को योगदान करना चाहिए। कार्यक्रम को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह प्रांत संघचालक श्री अशोक पाण्डे ने भी संबोधित किया।  
    इन्होंने दिया आर्थिक योगदान
             सेवा भारती के लिए बनाए गए जाने वाले छात्रावास एवे कौशल विकास केन्द्र निर्माण के लिए सांसद अनूप मिश्रा ने दस लाख रूपयेविधायक दुर्गालाल विजय ने दस लाख रूपये, कैलाश नारायण गुप्ता ने 11 हजार रूपये, बाबूलाल जाटव ने 11 हजार रूपये, सत्यनारायण मित्तल 21 हजार रूपये, गौरव गुप्ता ने 21 हजार रूपये, राघवेन्द्र जाट ने 11 हजार रूपये, मुकेश सिकरवार ने 5100 रूपये, सुरेश जैन 11 हजार रूपये, रामलखन मीणा 51 हजार रूपये, रामलखन नापाखेडली 15 हजार रूपये, अरविंद कंसाना 5100 रूपये, महावीर 5100 रूपये, आशीष यादव 5100 रूपये, अशोक गर्ग 11 हजार रूपये, नेहा कुशवाह, देवेन्द्र कुशवाह 21 हजार रूपये की आर्थिक सहायता प्रदान की है।


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