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    बल पूर्वक नहीं विनम्रता से हो जाते है जटिल से जटिल कार्य

    दतिया 15/02/2018 (RamjisharanRai) @www.rubarunews.com>>  श्रीराम कथा आयोजन समिति दतिया के तत्वावधान सबरी धाम बग्गीखाना प्रांगण दतिया में संचालित पावन श्रीराम कथा में श्री कामदगिरि पीठाधीश्वर जगदगुरु रामानन्दाचार्य श्रीरामस्वरूपचार्य जी के श्रीमुख से कथा में अपनी हृदयस्पर्शी विचारों और शास्त्र सम्मत प्रस्तुति करते हुए कहा
    भक्त के प्रेमबन्धन में प्रभु बांधते हैं।
    चलेउ हरषि हिय, धर रघुनाथा।
    बल पूर्वक नहीं विनम्रता से हो जाते है जटिल से जटिल कार्य। विनम्रता से जग को बस किया सकता है

    समाज मे बहुएँ अपनी सास को विनम्रता से बस में कर सकती है और सास अपने स्नेहयुक्त व्यवहार से बहु को बस में कर सकती है।
    बार बार रघुवीर संम्भारी तरकेउ पवन तनय बल भारी।
    एक साधे सब सधे, सब सब साधे सब जाय।
    उक्त सूत्र को श्रीरामभक्त  हनुमान जी ने बार बार रघुबीर सम्हारी। और अकेले हो निशाचरी माया और विघ्नों  से अप्रभावित होते हुए अपने स्वामी के सौंपे दायित्व का निर्वहन करके सकुशल आये।
    हनुमान जी को उनके दायित्यों के निर्वहन करने में विभिन्न प्रकारों के प्रलोभन दिए किन्तु अपने स्वामी के दायित्वों को निर्वहन करने हेतु अग्रसर रहे और सकुशल वापस आगए।
    जबकि सोने का पर्वत, सुरसा जैसे विघ्न आए और सुरसा कहती है

    आज सुरन्ह मोहि दीन्ह अहारा।

    हनुमान जी विनय पुर्वक कहते है कि प्रात लेइ जो नाम हमारा।
    तेहिं दिन ताहि न मिले अहारा।।
    जब मेरे नाम लेने से दिनभर आहार तक नहीं मिलता टी अहारा तो असम्भव है।

    समर्पण हमारा हमारी मातृभाषा से ओतप्रोत होना चाहिये। हमारा प्रत्येक भाषा पर हमारा नियंत्रण होना चाहिए किन्तु मातृ भाषा के प्रति कृतज्ञता होना चाहिए। हमारी भाषा हमारी शान है और राष्ट्र हमारा स्वाभिमान है।
    अपने राष्ट्र के प्रति कृतज्ञता हमारे आचरण में समाहित हिना चाहिये। तभी सच्चे राष्ट्रभक्त कहलायेंगे। हमें अपनी आगे आने वाली पीढ़ी को स्वदेश के प्रति सम्मान और समर्पण की भावना की प्रति प्रेरित करना चाहिए। विदेशी कंपनियों की दासता को त्याग हमें अपने प्राकृतिक संसाधनों का अवश्यक्तानुसर सदुपयोग करना चाहिए तभी हम और हमारा राष्ट्र आत्मनिर्भर रह सकेगा। दूसरों की कृपा से नहीं। अर्थात हम हमारे उपलब्ध संशाधनों से अपना उत्थान करें।

    उक्त प्रवाहित संगीतमयी नव दिवसीय श्रीरामकथा आयोजन में मुख्य यजमान श्रीमती प्रभा - जीतेन्द्र सिंह ठाकुर जिलाध्यक्ष सरपंच संघ है। उनके परिजन व मित्रमंडली सहयोगी है। सबरीधाम में भारी संख्या में श्रोताओं की उपस्थिति निरंतर वृद्धि हो रही है।
    कथा पांडाल में मीडया साथी एवं जिले की जनताजनार्दन उपस्थित हो रही है।कल  दिनांक 16 फरवरी को नव दिवसीय कथा का विश्राम दिवस है।
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