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    खुलेआम उड़ाई जा रहा बालश्रम की धज्जियां -बचपन बीत रहा होटल और दुकानों पर

    चितबड़ागाँव  ( बलिया) (संजय राय) @www.rubarunews.com>> - स्थानीय नगर पंचायत सहित आस पास के इलाकों में प्रत्येक दुकानों व होटलों पर छोटे-छोटे बच्चे काम करते देखे जा रहे हैं ऐसे में छोटे -छोटे बच्चों का भविष्य कैसे उज्जवल होगा । एक तरफ प्रदेश की योगी सरकार हर जतन कर रही है कि देश के प्रत्येक छोटे - छोटे बच्चे पढ़ लिख कर शिक्षित बने मगर अफसोस है कि सरकार की सभी योजनाओं पर पानी फिरता नजर आ रहा है,  एक तरफ सरकार का नारा है कि सब पढ़े सब बढ़े मगर ये सभी नारे शहर से गांव तक आते - आते औंधे मुंह गिर जा रहा है और सब पढ़े सब सब बढ़े का नारा मुंह चिढ़ाने लग रहा है ऐसा लगता है कि यह सभी योजना सिर्फ कागजों तक ही सिमट कर रह जा रही है ।जी हां हम बात कर रहे हैं चितबड़ागाँव नगर पंचायत तथा आसपास के क्षेत्रों की जहां इस समय बालश्रम की ऐसी धज्जियां उड़ाई जा रही है मानो इनके लिए कोई नियम  और कानून बना ही नहीं है । नगर पंचायत सहित ग्रामीण इलाकों के होटलों , ढ़ाबा ,  दुकानों गल्ला मंडी या फिर सब्जी मंडी में अवश्य  आप लोगों को छोटे-छोटे बच्चे काम करते हुए अपने बचपन को बर्बाद करते दिखाई दे देगें जिन्हें लोग गरीब परिवार के बच्चों को कम पैसे देकर आठ से बारह घंटे तक काम कराते हैं जिन्हें शायद किसी कानून का भय ही नहीं है जिसपर शासन - प्रशासन भी मूकदर्शक बनी हुई है  ऐसे में सवाल उठता है कि इतने कम उम्र जो वास्तव में पढ़ने, लिखने तथा खेलने और कूदने वाले समय में नाजुक कंधो पर इतनी बड़ी जिम्मेदारी व मजबूरी का बोझ उठाना पड़ रहा है जिसके  एवज में उक्त लोग नियम तथा कानून की धज्जियां उड़ाते नजर आ रहे हैं । सरकारी नियम के अनुसार कम उम्र यानि चौदह वर्ष से कम उम्र के बच्चों से बालश्रम करवाना कानूनन अपराध है मगर इसका कोई भी असर नहीं पड़ रहा है जानकारी के मुताबिक भारत में छोटे से छोटे बच्चों की आबादी अमेरिका से भी ज्यादा है । भारत में कुल श्रम शक्ति का लगभग  3,6  फीसदी हिस्सा कम उम्र तक के बच्चों का है । ऐसे में माना जा रहा है कि देश में हर दस बच्चों में नौ बच्चे काम करते देखे जा रहे है जो वास्तव में  85 फीसदी पारम्परिक कृषि गतिविधियों में लिप्त हैं । आज पुरी दुनिया में  215 मिलियन ऐसे बच्चे हैं जिनकी उम्र चौदह वर्ष से कम है ऐसे में इन बच्चों की जो उम्र पढ़ाई करने , खेलने , कूदने तथा दोस्तों में घूमने की है वहीं आज होटलों , ढ़ाबे , दुकानों तथा उद्योगों में काम करने में समय व्यतीत हो रहा है । इस परिस्थिति में कानून के तहत बालश्रम रोकने के लिए शासन  और प्रशासन विफल हो गया है नगर पंचायत सहित ग्रामीण क्षेत्रों के बुद्धिजीवी वर्ग के लोगों ने संबंधित विभाग और जिलाप्रशासन का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराते हुए बालश्रम को नगर पंचायत सहित ग्रामीण क्षेत्रों से आजीवन रोक लगाने की मांग की ।
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