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    हार कर नींद को सैयाद कर दिया मैने ऑल इंडिया मुशायरे में बरसे एकता और प्रेम के रंग

    श्योपुर01/03/2018 (rubarudesk) @www.rubarunews.com>> साहित्य और अदब की नगरी श्योपुर में बीते बुधवार की रात अदब की खूबसूरत महफिल सजी। महफिल को सजाया अम्नो-अमान और मोहब्बत के पैरोकार शायरों ने। जिन्होंने अपने रूहानी और रूमानी कलाम पेश कर श्रोताओं का दिल छुआ। राजीव गांधी सभागार में आयोजित गजलों और गीतों की महफिल रात के तीसरे पहर तक जारी रही। मुशायरे का आगाज मुख्य अतिथि के रूप में नगरपालिका अध्यक्ष दौलतराम गुप्ता ने शमा रोशन करते हुए किया। मुशायरे की सदारत डॉ अय्यूब कुरैशी ने की। संचालन की बागडोर बुजुर्ग शायर डॉ सागर रहमानी के बाद नौजवान शायर रियाज तारिक ने संभाली। आगरा से आए अनवर अमान के नातिया कलाम की तरह खूबसूरत गजलों और बेहतरीन आवाज का जादू महफिल में जमकर चला। उन्होंने फरमाइशों को पूरा करते हुए एक के बाद एक कई गजलें पेश कीं और मुशायरे को कामयाब बना दिया:-
    मोहब्बत का ठिकाना हो गया है।
    ये दिल उनका निशाना हो गया है।।
    तुम्हारा नाम जिस पर लिख दिया था।
    वो कागज भी पुराना हो गया है।।
    ललितपुर से आए डॉ कौशल का कलाम और अंदाज मुशायरे को यौवन देने वाला रहा। बेहद रूहानी अंदाज में उन्होंने झूम झूमकर अपनी चुनिंदा गजलें पढ़ीं तो श्रोता मंत्रमुग्ध नजर आने लगे:-
    बन संवर कर रोशनी के सामने आएगा कौन?
    आईना हूं मैं मुझे आईना दिखलाएगा कौन?
    मुशायरे को अपने अशआर से ताजगी देते हुए मुशायरा बनाने का कारनामा प्रभात प्रणय ने किया। महफिल लूटने वाले अंदाज में पेश किए गए उनके बेहतरीन कलाम को जबर्दस्त वाहवाही हासिल हुई। उन्होंने कहा:-
    एक नाशाद को फिर शाद कर दिया मैने।
    कल उसे कैद से आजाद कर दिया मैने।।
    ख्वाब में शोर मचाती थी याद की चिड़िया।
    हार कर नींद को सैयाद कर दिया मैने।।
    शुरूआती दौर में नौजवान शायर अनवर गाफिल ने लगभग उखड़ी सी महफिल को देशप्रेम की आवाज के साथ सांसें दींः-
    सरहदों पे जवान जिन्दाबाद।
    मेरे भारत की आन जिन्दाबाद।
    जो हिमालय पे जगमगाता है।
    उस तिरंगे की आन जिन्दाबाद।।
    मुशायरे में डॉ अय्यूब गाजी, इमरान मांगरोलवी, अशफाक सफदर, डॉ आरिफ छबड़ा, रिहान फारूकी, इरफान अख्तर कनापुरी, रजा बारानवी, शरीफ अहमद, तालिब तूफानी, मजीद सफदर आदि ने अपना कलाम पेश किया। अलसुबह 3 बजे तक चले मुशायरे के दौरान सभागार वाह-वाह की आवाजों और तालियों से गंूजता रहा। इस दौरान अदब के कद्रदान शायरों को फूलों के हार पहनाकर दाद और मुबारकबाद भी देते रहे।
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