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  • || बरसों बाद .......|| | Rubaru news
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    Book - Kamyab Safarnama

    || बरसों बाद .......||




    पंजाब में यूँ तो मै चार टेनयोर पोस्टेड रहा जिसमे से दो बार अमृतसर में रहा, 75 से 79 और दोबारा 83 से 86 तक | इन दोनों टेन्योर में पंजाब की हवा – मिट्टी जैसे तन मन में बस गयी है , इतने अनुभव है की साँझा करते करते ग्रन्थ बन जायगा | सैन्य अनुभवों के अतिरिक्त सिविलियंस के बीच अमृतसर कपूरथला फिरोजपुर जालंधर में अनेकों पारिवारिक सम्बन्ध भी बनगए थे |
    बात 2005 की है , मै अपनी सबसे बड़ी पुत्री के विवाह का पंजाब के अपने मित्रों को निमंत्रण देने अमृतसर तथा अन्य शहरों की यात्रा पर गया था | अमृतसर के पुतलीघर बाजार में ( जो अमृतसर कैन्ट से लगा है) कुछ खरीदारी के लिए गया था , अचानक एक अजीब से आड़े तिरछे चेहरे वाले व्यक्ति ने आकर मेरा चरण स्पर्श किया | में मूलतः अपने परिवंर में भी मनुष्य द्वारा मनुष्य के पैर छूने की पम्परा के विरुद्ध हूँ परन्तु इस अचानक घटनाक्रम से मै भौचक्क था, मैंने उसे थमा और पुछा अरे अरे ये क्या कर रहे हो , भाई कौन हो ? वो व्यक्ति हाथ जोड़ बोला " सर आप पहचाने नहीं में नरेंदर सिंह ,एम् ई एस का इलेक्ट्रीशियन " | में अभी तक सामान्य नहीं हो पाया था , शक्ल पर भावों को पढते हुए वो बोला " सर ये जिंदगी आपकी उधारी है , आप न होते तो मेरे बच्चे अनाथ हो जाते | आपने खंबे से गिरने पर मेरी जान बचाई थी |"
    यादों की परतों को कुरेदते हुए मुझे मई 79 की घटना स्मृति पटल पर एक बरगी घूम गयी | उन दिनों गर्मी के दिनों में बिजली जाना आना एक आम बात थी | दोपहर में ढाई तीन बजे का समय था खाना खा कर थोडा रेस्ट का मूड था , चार बजे युनिट वापस जाना था | लाइट थी नहीं जान लेवा जैसी गर्मी थी , नींद आँखों पर तैर रही थी पर सो नहीं पा रहे थे तभी दरवाजे पर ज़ोर ज़ोर से दस्तक हुई , फ़ौरन उठ कर दरवाज़ा खोला देखा यूनिट के दो जवान खड़े थे एकदम घबराए हडबडाये | ' क्या हुआ मैंने पुछा ' बोले ' सर बिजली वाला खम्बे से गिर गया एम् आई रूम (एम् आई रूम आर्मी में यूनिट डिस्पेंसरी या प्रथमिक चिकित्सा कक्ष को कहते है ) में है | में इवनिंग स्पोर्ट्स किट में था वैसे ही स्कूटर ले दौड पड़ा | एक व्यक्ति मरणासन्न पड़ा था , नर्सिंग असिसटेंट ने आई वी ड्रिप चालू कर दी थी , मैंने उसे देखा अन्य आवश्यक जीव रक्षक यत्न किये और सीधे एम्बुलेंस में डाल कर मिलिट्री हॉस्पिटल ले चला |
    हुआ यूँ था की लाइन में कहीं कुछ गडबड थी उसे ठीक करने के लिए लाइट काट कर लाइन मैन खम्भे पर चढ कर फाल्ट ठीक कर रहा था , इसी बीच किसी यूनिट में कुछ काम चल रहा था | जैसा अक्सर होता था , हर यूनिट में फील्ड और आपात कालीन ज़रूरतों के लिए बड़े बड़े जेनरेटर होते है | पास ही एक तोपखाना यूनिट थी जहाँ बेट्री चार्जिंग तथा कोई और अन्य कार्य चल रहे थे, वहाँ बिजली जाने को सामान्य कट समझ कर यूनिट स्टाफ ने जेनरेटर चालू कर दिया | बिजली की गति बताने की अवश्यकता नहीं, जेनरेटर की बिजली का फीड बैक करेंट लाइन में आने से ऊपर काम कर रहे एलेक्ट्रीशियन को बिजली का पुरज़ोर झटका लगा और वो नीचे आ गिरा | उसे दोहरी मार थी एक इलेक्ट्रीक्य्युशन दूसरा लगभग 25-30 फीट ऊंचाई से गिरना , दोनों ही जीवन घाती थे|
    मिलिट्री हॉस्पिटल में तात्कालिक प्रावधानों के अनुसार आपात स्थिति में जीवन रक्षक उपचार के बाद मरीज़ को सिविल हॉस्पिटल में स्थानांतरित करना था | मुझे उसके जीवन की शंका थी , मै चाहता था उसका उपचार विश्वसनीय सिद्ध हस्तों द्वारा हो | एम् एच से अधिक विश्वसनीय मुझे कुछ नज़र नहीं आया | मुझे एक अन्य प्रावधान समझ आया , आर्मी आफिसर्स अपने व्यक्तिगत सेवकों /पर्सनल सर्वेंट्स का स्वयं भुगतान कर इलाज करवा सकते थे | मैंने तत्काल सम्बन्धी दस्तावेज़ और अन्य कागज़ी कार्यवाही की और उसके मिलिट्री अस्पताल में इलाज का रास्ता बहाल कर दिया | उसका लगभग बीस दिन इलाज चला और वो ठीक हो कर चला गया , पेमेंट सीधा मेरे सी डी ए अकाऊंट से कट गया , बात खतम | समय के साथ मै वहाँ से पोस्ट आउट ही गया और उस घटना को भूल भी गया |
    उस दिन जब नरेंद्र मुझे पुतलीघर बाज़ार में मिला सारा का सारा वाकया नज़र के सामने घूम गया | मैंने नरेंद्र को गले से लगाया और उससे विदा ली | नरेन्द्र की कृतज्ञता ने मेरे अंदर के आदमी को सराहा | निश्चय ही मै आल्हादित था और आज भी उस सब को सोच कर रोमांचित होजाता हूँ मन में एक नैसर्गिक अनुभूति होती है सच है फूलों की पौध लगाओगे तो सुगंध ही पाओगे|
    कर्नल (डा) गिरिजेश सक्सेना "गिरीश "
    जी-१, इन्द्रप्रस्थ, एयर पोर्ट रोड , भोपाल -462030.
    9425006515/0755 4265389
    ( अपने आगामी कहानी संग्रह "सत्य आधारित -जी घटना" से प्रकाशन पूर्व प्रस्तुति )
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