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    वर्षा संघनन का एक रूप है- विकास सोनी

    श्योपुर, 29/मई/2018 (rubarudesk) @www.rubarunews.com>> भूगोल विशेषज्ञ विकास सोनी ने बताया है कि वर्षा (Rainfall) एक प्रकार का संघनन है। पृथ्वी की सतह से पानी वाष्पित होकर ऊपर उठता है और संघनित होकर पानी की बूंदों के रूप में पुनः धरती पर गिरती है। इसे वर्षा कहते हैं। संवहनीय वर्षा, पर्वतीय वर्षा और चक्रवाती वर्षा इसके प्रकार है। वे आज खटीक समाज के सामुदायिक भवन पर सहभागिता से संचालित एमपीपीएससी निःशुल्क कोचिंग में वर्षा विषय पर लेक्चर दे रहे थे। वायु तीन रूपों में ऊपर उठती हैं। 
                 धरातल के अधिक गर्म होने से वायु हल्की होकर संवहनीय धारा के रूप में उपर उठती है। हवा पर्वत के ढाल के सहारे ऊपर उठती है। चक्रवातों के निर्माण के कारण वाताग्र के साथ वायु ऊपर उठती है।
               संवहनीय प्रकार की वर्षा अधिकतर भूमध्यरेखीय प्रदेशों में प्राय: दिन के समय होती है। भूमध्यरेखा पर अधिक गर्मी  से वायु हल्की होकर ऊपर उठती है तथा हल्की होकर वायु ठंडी होती है एवं  संतृप्त होकर वर्षा करती है । वायु ऊपर जाकर ठंडी होती है तथा फैलती है। जलवाष्प की मात्रा अधिक होने से ओसांक तक पहुंचने के लिए ताप को कम होना पड़ता है। और वाष्प शीघ्र जल का रूप ले लेता है और प्रति दिन प्राय: दो बजे के बाद घनघोर वर्षा होती है। इस वर्षा को संवहनीय वर्षा कहते हैं।  
                वाष्प से भरी हवाओं के मार्ग में पर्वतों का अवरोध आने पर इन हवाओं को ऊपर उठना पड़ता है जिससे पर्वतों के ऊपर जमे हिम के प्रभाव से तथा हवा के फैलकर ठंडा होने के कारण हवा का वाष्प बूँदों के रूप में आकर धरातल पर बरस पड़ता है। ये हवाएँ पर्वत के दूसरी ओर उतरते ही गरम हो जाती हैं और आसपास के वातावरण को भी गरम कर देती है। विश्व के अधिकतर भागों में इसी प्रकार की वर्षा होती है। मानसूनी प्रदेशों (भारत) में भी इसी प्रकार की वर्षा होती है। इस वर्षा को पर्वतीय वर्षा कहते हैं।
                    चक्रवाती प्रकार की वर्षा गरम और शीतल वायुराशियों के आपस में मिलने से होती है, क्योंकि हल्की गरम वायु ऊपर उठती है तथा भारी शीतल वायु नीचे बैठती है। अत: गर्म हवा के ऊपर उठने से वायु संघनित होकर वर्षा करने लगती है। इस प्रकार वर्षा प्राय: शीतोष्ण कटिबंध में हुआ करती है।
    पर्वतों के सहारे अधिकतम वृष्टि के बाद ऊंचाई के साथ वर्षा की मात्रा घटती जाती है इसे वर्षा का प्रतिलोमन कहते हैं। और बादलों की गरज के साथ वर्षा तड़ित झंझा कहते हैं।
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