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    मन से किया जाने वाला काम सफल होता है: बच्चन महाराज

    भिण्ड 5/जून/2018 (rubarudesk) @www.rubarunews.com>> शहीद अनूप शर्मा जनसेवा समिति भिण्ड के बेनर तले संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह का आयोजन लहार रोड स्थित आईटीआई बाल हनुमान मंदिर परिसर में किया जा रहा है। कथा का वाचन पंण् हरिवल्लभ शास्त्री बच्चन महाराज ने कहा कि व्यक्ति मन से कोई काम करता है तो  ईश्वर भी उसका साथ देता है और वह हर हालत में सफल होता है।
                बच्चन महाराज ने कथा के तीसरे दिन धु्रव चरित्र की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि मनु महाराज के दो पुत्र थेए प्रियव्रत और उत्तानपाद। उत्तानपाद की दो पत्नियां थीं सुरुचि और सुनीति। उत्तानपाद सुरुचि से अधिक प्रेम करते थेए सुनीति से थोड़ा कम करते थे। सुनिति के बेटे का नाम ध्रुव और सुरुचि के बेटे का नाम उत्तम था। एक बार उत्तानपाद सिंहासन पर बैठे हुए थे। ध्रुव भी खेलते हुए राजमहल में पहुच गए। उस समय उनकी अवस्था पांच वर्ष की थी। उत्तम राजा उत्तानपाद की गोदी में बैठा हुआ था। ध्रुव भी राजा की गोदी में चढऩे का प्रयास करने लगे। शास्त्री ने बताया कि सुरुचि को अपने सौभाग्य का इतना अभिमान था कि उसने ध्रुव को डांटते हुए कहा कि इस गोद में चढऩे का तेरा अधिकार नहीं है। अगर इस गोद में चढऩा है तो पहले भगवान का भजन करके इस शरीर का त्याग कर और फिर मेरे गर्भ से जन्म लेकर मेरा पुत्र बनए तब तू इस गोद में बैठने का अधिकारी होगा। ध्रुव रोते हुए अपनी मां के पास आये। मां को सारी व्यथा सुनाई। सुनीति ने सुरुचि के लिये कटु शब्द नहीं बोलेए उसे लगा यदि मैं उसकी बुराई करुंगी तो ध्रुव के मन में हमेशा के लिये वैर.भाव के संस्कार जग जाएंगे। सुनिति ने कहा.ध्रुव तेरी विमाता ने जो कहा हैए सही कहा है। बेटे! यदि भिक्षा मांगनी है तो फिर भगवान से ही क्यों न मांगी जायघ् भगवान तुझ पर कृपा करेंगेए तुझे प्रेम से बुलाएंगेए गोद में भी बिठाएंगे। बालक ध्रुव मां का आदेश प्राप्त करके चल पड़े। रास्ते में उनको देवर्षि नारद मिल गये। नारद जी ने ध्रुव के सिर पर हाथ रखा आशीर्वाद दिया और पूछा. बेटा! कहां जा रहे होए ध्रुव ने सारी घटना बताई। नारद जी ने उनका परीक्षण करते हुए कहा कि बेटाए 5 वर्ष की तेरी अवस्था है। तेरा मान क्या तेरा अपमान क्याघ् इस बात पर धु्रव ने कहा. आप मुझे सहयोग कर सकते हो तो करिये अन्यथा मुझे सलाह मत दीजिये। मैं ये रास्ता छोडऩे वाला नहीं हूं। नारदजी ने खुश होकर ध्रुव को मंत्र दिया और कहा कि वृन्दावन में जाकर इस मन्त्र का जप करना और मनए वाणी और कर्म से ठाकुर जी की सेवा करना। कठिन साधना के बाद भगवान ने धु्रव को दर्शन दिए। कथा का वाचन 10 जून तक अपरान्ह दो बजे से शाम छह बजे तक चलेगा। इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष डॉण् ओमप्रकाश मिश्र नीरसए सचिव रामशंकर शर्मा पत्रकार एवं कोषाध्यक्ष चरनसिंह सरल सहित अनेक गणमान्य नागरिक और श्रद्धालुजन मौजूद थे। 
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