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    परीक्षा देने से पहले एक वर्ष गंभीर तैयारी जरूरी- कलेक्टर सौरभ कुमार सुमन

    श्योपुर, 9/जून/2018 (rubarudesk) @www.rubarunews.com>> श्योपुर कलेक्टर सौरभ कुमार सुमन ने कहा है कि परीक्षा देने से पहले एक वर्ष गंभीर तैयारी जरूरी है। वे आज खटीक समाज के सामुदायिक भवन पर सहभागिता से संचालित एमपीपीएससी निःशुल्क कोचिंग में छात्र छात्राओं से संवाद के दौरान सफलता के मंत्र बतला रहे थे। 
                  इस दौरान मार्गदर्शक एवं समन्वयक परीक्षित भारती, भूगोल विशेषज्ञ विकास सोनी और छात्र छात्राएं उपस्थित थे।
                कलेक्टर सौरभ कुमार सुमन ने कहा कि प्रारंभिक परीक्षा की सफलता के लिए तैयारी की शुरुआत मुख्य परीक्षा से करें। प्रारंभिक परीक्षा की तिथि के चार महीने पहले मुख्य परीक्षा की तैयारी रोक कर, प्रारंभिक परीक्षा की तैयारी करे। प्रारंभिक परीक्षा के तुरंत बाद मुख्य परीक्षा की तैयारी फिर से शुरू कर दे। मुख्य परीक्षा के सभी प्रश्न पत्रों को समान ऊर्जा के साथ हल करें। साक्षात्कार व्यक्तिगत परीक्षण है। 
                कलेक्टर ने कहा कि मैंने पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद 2006 में तैयारी शुरू की। 2007 में पहली बार प्रारंभिक परीक्षा दी असफल रहा। 2008 में फिर परीक्षा में शामिल हुआ प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा में उत्तीर्ण हुआ। साक्षात्कार में असफल रहा। इसी प्रकार 2009 में भी प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा में सफल और साक्षात्कार में असफल रहा। हर असफलता के बाद अधिक ऊर्जा के साथ निरंतर तैयारी करता रहा‌। भूगोल में कम अंक के कारण को जानकर मानचित्र वाले भाग को और मजबूत किया। 2010 की तीनों परीक्षा में 56वीं रेंक के साथ सफल हुआ। कहने का तात्पर्य यह है कि असफल होने पर हम टूट जाते हैं बिखर जाते हैं। खुद को संगठित कर तैयारी जारी रखें। मेरे ग्रुप के आठ सदस्यों को अलग-अलग वर्षों में पद मिलते रहे। सभी ने असफलता को अंगीकार किया और निरंतर मेहनत से सफलता को छुआ। सिविल सेवक के लिए कोई शोर्ट कट नहीं है। सिलेबस के अनुसार तैयारी जैसे ही पूर्ण हो जाती है सफलता मिलने लगती है। 
                संवाद के दौरान छात्र छात्राओं के संघर्ष, मुख्य परीक्षा की रणनीति, ओप्शनल का चयन, इथिक्स, कोचिंग/शिक्षक, साक्षात्कार, व्यापक सिलेबस, 12वीं के बाद क्या, उत्तर लेखन और माध्यम से जुड़े सवालों के जवाब विस्तार से दिए। 
             कलेक्टर ने संविधान पर लेक्चर दिया और विज्ञान और तकनीक को समझाया। उत्तर लेखन का तरीका सिखाया। प्रश्न पत्र के सभी बिंदुओं को समझाते हुए कहा कि जिसके पहले के तीनों प्रश्न पत्र बहुत अच्छे हैं उसका इथिक्स का पेपर भी बेहतर होगा। इथिक्स निर्णय लेने में तब मददगार होता है जब पद पर रहते हुए ऐसे मुद्दे हल करने हो, जिनके लिए कानूनी प्रावधान उपलब्ध नहीं है मतलब उनके लिए कानून अस्तित्व में नहीं है।
    अंत में कलेक्टर ने बताया कि नियमित अध्ययन, लक्ष्य के प्रति ईमानदारी, परिवार/दोस्त कैसे हो, छोटे छोटे गोल बनाएं, क्रमबद्धता ज़रुरी मतलब उत्तर को क्रम से सजाएं, पढ़ने के साथ साथ लिखते रहें, दबाव नहीं ले और जीवन को सार्थक बनाएं। सकारात्मक सोच वालों के पास और नकारात्मक सोच वालों से दूर रहें निश्चित सफलता मिलेगी।
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