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    भक्त को विपत्ति से मुक्त कराते हैं भगवान: बच्चन महाराज


    भिण्ड 6/जून/2018 (rubarudesk) @www.rubarunews.com>> शहीद अनूप शर्मा जनसेवा समिति के बेनर तले शहर के लहार रोड पर आईटीआई कॉलेज के निकट स्थित बाल हनुमान मंदिर परिसर में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन प्रवचन करते हुए कथा का वाचक पंडित हरिवल्लभ शास्त्री बच्चन महाराज ने हिरण्य कश्यप व भक्त प्रहलाद की कथा सुनाई। कथा सुनकर मौजूद श्रद्धालुगण भाव विभोर हो उठे।
                कथा वाचक बच्चन महाराज ने कहा कि भगवान के भक्त पर जब भी अत्याचार होते हैं तो वे स्वयं उसकी रक्षा करते हैं। आताताईयों को समाप्त कर लोगों को विपत्ति से मुक्त कराते हैं। उन्होंने हिरण्यकश्यप व भक्त प्रहलाद की कथा को समझाते हुए कहा कि हिरण्यकश्यप अपने भाई की मौत का बदला भगवान विष्णु से लेने के लिए ब्रह्मा जी की तपस्या करने के लिए एक वट के नीचे बैठ गया। जहां देव गुरु बृहस्पति तोता का रूप धारण कर वृक्ष पर बैठ गए और नारायण नाम का रट लगाने लगा। तोते की रट से होने वाले व्यवधान से परेशान होकर हिरण्यकश्यप तपस्या छोड़ कर घर आ गया। पत्नी ने पूछा कि आप तपस्या छोडक़र क्यों चले आए तो तोता की बात बताई। पत्नी ने भी भगवान के नाम क जप किया और गर्भ ठहर गया और भक्त प्रहलाद के रूप में बालक का जन्म हुआ। जब प्रहलाद गुरुकुल से घर आए तो हिरण्यकश्यप ने पूछा कि क्या शिक्षा ग्रहण किए हो। प्रहलाद भगवान का गुणगान करने लगे। इससे हिरण्यकश्यप क्रोधित हो उठा और कहा कि तुम मेरे शत्रु का गुणगान कर रहे हो इसे बंद करो। लेकिन प्रहलाद ने भगवान की अराधना नहीं छोड़ी। इसी दुराभाव से वह प्रहलाद पर लगातार अत्याचार करता रहा लेकिन हर बार भगवान अपने भक्त की रक्षा करते रहे। एक दिन हिरण्यकश्यपु ने प्रहलाद से कहा कि तुम्हारे भगवान कहां हैं। प्रहलाद ने जवाब दिया कि वह तो कण-कण में हैं और इस खंभे में भी हैं। इतना सुनते ही हिरण्यकश्यप ने तलवार निकाल कर खंभे पर वार कर दिया। तब भगवान विष्णु नरसिंह के रूप में प्रकट होते हैं और हिरण्यकश्यप का वध कर देते हैं।

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