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    काव्यांजलि- लहसुन के हम ढेर लगा के बैठे, घर घर में बारूद बिछा के बैठे


    कोटा 24/जून/2018 (KrishnaKantRathore) @www.rubarunews.com>>  डॉ. एल. के दाधीच की प्रथम पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय कार्यकर्म के अंतर्गत आज भारतेंदु समिति के सभागार में काव्यांजलि का आयोजन किया गया | काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता वयोवृद्ध प्रख्यात राष्ट्रीय कवि श्री बशीर अहमद मयूख ने की तथा मुख्य अतिथि कोटा दक्षिण के विधायक संदीप शर्मा तथा विशिष्ठ अतिथि पूर्व महापौर डॉ. रत्ना जैन रही | मुख्य अतिथि संदीप शर्मा ने डॉ. एल. के. दाधीच के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा की डॉ. साहब ऐसे व्यक्तित्व के धनी की के उन्हें देख कर पूर्णता का आभास होता था वे विद्यार्थी जीवन के हर क्षेत्र से बहुत नजदीक से जुड़े हुए थे | उन्होंने मानव जीवन का मूल्य 12 रुपये तथा वृक्ष के लिए लाखों की कीमत का मूल्यांकन किया | एक पत्ती भी ऑक्सीजन की फक्ट्री है इसे जब तक बहुत आवश्यक न हो तब तक नष्ट न करे | कार्यक्रम का शुभारंभ कवयत्री निर्मला आर्य ने सरस्वती वंदना से किया जिसके बाद एक एक करके 11 कवियों ने पर्यावरण, जल, जमीन, जंगल, वृक्ष आदि के महत्व को उजागर करते हुए अपना काव्यपाठ किया | सभी कवियों का स्वागत श्रीमती गीता दाधीच, स्वप्निल-शिखा दाधीच, विमल चाँद जैन, कृष्णकांता, अमरलता, विजयलक्ष्मी, केशवकान्त, विजयकृष्ण, अमित, संबल पीहू, निधि प्रजापति ने किया |

                     बशीर अहमद मयूख ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रकृति की सुन्दरता का प्रेम, श्रृंगार, तरन्नुम, जन्नत, पुरवाई, ईश्वर, धाम आदि के माध्यम से बखान किया | उन्होंने वेदों, पुराण और इतिहास में प्रकृति का महत्त्व को  बताया | साथ ही उन्होंने दाधीच परिवार से डॉ. साहब की स्मृति में डॉ. एल. के दाधीच पर्यावरण पुरस्कार प्रारंभ करने का सुझाव दिया | राम नारायण हालधर ने अपने काव्यपाठ में किसान की व्यथा को दर्शाते हुए कहा की लहसुन के हम ढेर लगा के बैठे, घर घर में बारूद बिछा के बैठे है | कंगन, पायल, बिछिया कब के बेच दिए , अब तो मगल सूत्र बाख एके बैठे है भगवती प्रसाद गौतम ने कहा की नीम गया अवसाद में, पिटी पीपली छांव, मंजिल दर मंजिल उठा जब से मेरा गाँव एवं जल मेघा का महत्त्व बताया | विश्वामित्र दाधीच ने काव्यपाठ में कहा की हमने तो लिख दी है मानवता के नाम की , पर्यावरण समस्या बन गई विश्व धरा घर बार की | अरविन्द सोरल ने पूंजीवाद के कारण उत्पन्न हुए पर्यावरण असंतुलन पर जोर दिया वही नहुष व्यास ने अपने शब्दों में डॉ. एल. के दाधीच को पिरोया | शिव राज श्रीवास्तव ने हरे भरे पेड़ न काटने का सन्देश तो मोहन प्रकाश मोहन ने मनुष्य की पर्यावरण की प्रति उदासीनता और पर्यावरण हस्तक्षेप के कारण उत्पन हुई तबाही पर प्रकाश डाला, ओम नगर ने पेड़ो के कटाई के कारण बढ़ रहे रेगिस्तान पर अपनी चिंता जताई | भगवंत सिंह जादौन प्रकृति के सुन्दर उपहारों नदी, झीले, वृक्ष का उल्लेख अपने पाठ में किया | इस अवसर पर श्री बजरंग सक्सेना, श्री महुराज (तबला वादक) और श्री मनोज गौतम का सम्मान डॉ. सी. बी. दास गुप्ता, एल. सी. बहेती, के बी नंदवाना व डॉ. आर सी साहनी ने मोती माला, श्रीफल, दुपट्टा एवं स्मृति चिह्नं भेट कर किया गया | रामेश्वर शर्मा भैया (रामू) ने काव्यात्मक रूप की शांत मृदुल मुस्कान थी, कोमल ह्रदय प्रशांत, श्री युत लक्ष्मीकांत थे सचमुच लक्ष्मीकांत तथा शहरों और गांवों की तुलनात्मक चित्रण करते हुए कहा इसके साथ ही यज्ञ दत्त हाडा के साथ सम्पूर्ण काव्यांजलि का संचालन किया |


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