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    शिक्षक मिलना आसान है किन्तु गुरू मिलना सौभाग्य


    बून्दी 27/07/2018 (KrishnaKantRathore) @www.rubarunews.com>>  - सिलोर रोड जैन दादावाड़ी में स्थित महाराज साहब हर्षयशा जी महाराज साहबमोक्षरत्ना जी महाराज सा एवं विधि रतना जी महाराज साहब का चातुर्मास चल रहा है। इसी क्रम में आज दिए व्याख्यान में गुरु पूर्णिमा का महत्व बताया गया, मोक्षरत्ना जी महाराज साहब ने गुरु का महत्व बताते हुये कहा कि गुरु की धारणा मौलिक रुप से भारतीय है दुनिया में शिक्षक हुए हैं गुरु नहीं। शिक्षा साधारण सी बात है गुरु बड़ी असाधारण घटना है ।       
     शिक्षक और गुरु का शाब्दिक अर्थ एक है लेकिन अनुभूति का अर्थ बिल्कुल अलग मिलता है। शिक्षक से हम यह सीखते हैं जो वह जानता है,गुरु से हम वह सीखते हैं जो वह है ।शिक्षक से हम जानकारी लेते हैं और गुरु से जीवन लेते हैं। शिक्षक से हमारा संबंध बौद्धिक है जबकि गुरु से संबंध आत्मगत होता है शिक्षक से हमारा संबंध आंशिक है किंतु गुरु से संबंध पूर्ण रूप से होता है। शिक्षक से हम कुछ भी सीखते हैं सीखने के बदले में उसे कुछ दे देते हैं गुरु से जो हम सीखते हैं उसके बदले में कुछ भी नहीं दिया जा सकता ।कोई उपाय देने का नहीं है क्योंकि गुरु जो देते हैं उसका कोई मूल्य नहीं है जो गुरु देता है उसे चुकाने का कोई उपाय नहीं है। उसे वापस करने का कोई उपाय नहीं है क्योंकि शिक्षक देते हैं सूचनाएं ,जानकारियां, इंफॉर्मेशन, किंतु गुरु अनुभव देते हैं। शिक्षक जो जानकारियां देते हैं जरूरी नहीं कि वह जानकारी उनका अनुभव ही हो जैसे जो शिक्षक नीति शास्त्र में पढ़ाता है और बताता है कि शुभ क्या है, अशुभ क्या है ,नीति क्या है ,अनीति क्या है जरूरी नहीं कि वह शुभ का आचरण करता हो वह सिर्फ शिक्षक है वह सूचना करता है। गुरु जो कहता है वह सूचना नहीं है वह उसके जीवन का आविर्भाव है शिक्षक के पास में जब हम जाते हैं तो हम वहीं लौटते हैं जैसे हम गए थे थोड़े से और समृद्ध हो कर लौटते हैं थोड़ा सा और ज्यादा जानकारी रखते हैं हम जो थे उसी में शिक्षक जोड़ देता है एडिशन कर देता है,हम जो थे उसी में थोड़ा रंग रूप लगा देता है ,उड़ा देता है, हम जो थे उसे शिक्षक के द्वारा जो हम निर्मित होते हैं दोनों के बीच कोई डिसकन्टीन्यूटी , कोई  गैप ,कोई खाली जगह नहीं होती ।गुरु हमें छोड़ता नहीं ,हमें मिटाता है और नया निर्मित करता है गुरु हमको संवारता नहीं है हमें मारता है और जीलाता है गुरु के पास जाने के बाद हमारे अतीत में और हमारे भविष्य में एक गेप, एक अंतराल हो जाता है लौट के आप देखेंगे तो अपनी कथा ऐसे लगेगी किसी और की कहानी अगर शिक्षक के पास गए तो अपनी कथा ,अपने ही कथा है इसलिए हमने इस मुल्क में एक शब्द खोजा था वह ब्रिज ब्रिज का अर्थ है दोबारा जन्म हुआ दुबारा जन्म हुआ वही आदमी है जिससे गुरु मिल गए हैं नहीं तो दोबारा जन्म हुआ आदमी नहीं है एक जन्म माँ बाप देते हैं वह शरीर का जन्म है एक जन्म गुरु के द्वारा गठित होता है और वह आत्मा का जन्म है सही अर्थ में आत्मा का जन्म  गुरु ही करा सकते हैं।
     इस मौके पर श्रावक एवं श्राविकाओं ने भजन के माध्यम से गुरु वंदना की एवं सभी ने अपने आप को धन्य बताया कि गुरु का सानिध्य हमें प्राप्त हुआ है।


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