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    आदि देव महादेव बाबा गंगेश्वर नाथ की महिमा अपरंपार


    गाजीपुर31/7/2018(विकास राय)@www.rubarunews.com>> आदि देव महादेव बाबा गंगेश्वर नाथ की महिमा अपरंपार है। आज भी बाबा के दरबार में सच्चे मन एवम पूर्ण श्रद्धा से लोगों द्वारा मागी गयी हर मुराद को बाबा गंगेश्वर नाथ जी अवश्य पूरी करते है।बाबा गंगेश्वर नाथ महादेव का स्थान गाजीपुर जनपद के करीमुद्दीन पुर थानान्तर्गत पतार ग्राम के उत्तर पूर्व दिशा में है।बाबा गंगेश्वर नाथ जी का पता पतार के लोगों को जिस समय चला था उस समय इस स्थान के चारो तरफ बहुत ही घना जंगल था। उस समय दिल्ली का बादशाह मुहम्मद शाह था। वर्ष 1738 ई में अफगान लुटेरा नादिर शाह भारत के सीमान्त प्रान्तों पर आक्रमण कर भारी लूटपाट करता हुवा इस तरफ भी आया था और बाद में पुन: दिल्ली की तरफ चला गया था। जन श्रृती के अनुसार उस समय लोग लूट मार से काफी सहमें हुवे थे।नादिर शाह के कुछ सैनिक रात में जब इधर आये तो उस समय पतार गांव के लोग रात्रि में सोये हुवे थे। लूटेरों ने जब गांव पर धावा बोलने की तैयारी की तभी गंगेश्वर नाथ जी ने तेज आवाज देकर कहा की गांव वालो सावधान हो जाओ लूटेरे गांव को लूटने के लिए पूरी तैयारी करके गांव के पास आ गये है।इस आवाज को सुनकर सभी गांव वाले जग गये और काफी सजग हो गये। उधर उस तेज आवाज को सुन कर लूटेरे इधर उधर आवाज की दिशा में झाडीयों में ढूंढने लगे की यह आवाज कहां से आयी है।उसी समय एक लुटेरे की नजर बाबा गंगेश्वर नाथ के शिवलिंग की तरफ पडी।तब लुटेरे की समझ में यही आया की यह आवाज इसी पत्थर ने दिया है उसने फौरन अपनी तलवार से शिवलिंग पर वार कर दिया। उस तलवार के प्रहार का निशान आज भी गंगेश्वर नाथ के शिवलिंग पर साफ साफ दिखाई देता है। लूटेरे बिना लूट पाट किये ही गांव से वापस चले गये। उधर तलवार के प्रहार से शिवलिंग में से रक्त की धार बह निकली थी और वह सारा रक्त एक जगह इकट्ठा हो गया था ।जहां पर रक्त इकट्ठा हूवा था वह जगह आज भी गंगावली के नाम से मौजूद है। सुबह होने पर जब गांव वाले उस तरफ आये जिधर से रात में आवाज आयी थी  जब लोगों ने उधर खून देखा तो स्तब्ध रह गये। गांव वाले खून को देखते हुवे अन्त में शिवलिंग के पास पहूंच गये। गांव वालों ने शिवलिंग को वहां से उठा कर गांव के पास ले जाने का भर पूर प्रयास किया तो वह शिवलिंग नीचे जमीन में धसने लगा अन्त में गांव वालो ने बिबश होकर शिवलिंग को वही पर छोड कर पूजा पाठ करने लगे। लगभग पन्द्रह बर्ष के बाद अचरज राव ने मंदिर के मुख्य गुंबज वाले भाग का निर्माण कराया। इसके साथ ही मंदिर के बिकास का क्रम शुरू हो गया। कहा जाता है कि आज भी सच्चे मन से बाबा गंगेश्वर नाथ की आराधना करने वाले की सभी मुरादें पुरी हो जाती है। बाबा गंगेश्वर नाथ के मंदिर में आज भी कोई झूठी शपथ नही खाता है। जो भी इस गंगेश्वर धाम को क्षति पहूंचाने की कोशिश करता है उसे उसका फल अवश्य मिलता है। लोग गंगेश्वर नाथ धाम के किसी पेंड के पत्ते को भी नहीं तोडते है। बाबा गंगेश्वर नाथ धाम में सावन मास में प्रत्येक रविवार को लोग गंगा तट पर जाकर सोमवार को गंगा जल लेकर आते है और बाबा गंगेश्वर नाथ जी का जलाभिषेक करते है। इस समय धाम पर बिकास कार्य जोरो पर है। कुछ वर्ष पूर्व इस धाम पर अयोध्या से पधारे महामंडलेश्वर श्री शिवराम दास जी फलहारी बाबा के द्वारा बिराट यज्ञ का आयोजन कराया गया था। बाबा की कृपा से कितनों का कल्याण हो गया।आस पास के लोगों के दिलों में बहुत ही श्रद्धा है ।बाबा गंगेश्वर नाथ जी की महिमा एवम कृपा को महसूस किया जा सकता है उसे ब्यक्त नही किया जा सकता।बाबा गंगेश्वर नाथ ने अपने धाम में आने वाले किसी भी भक्त को निराश नहीं किया है। यहा रोते हुवे भी आने वाला बाबा की कृपा से हंसते हुवे जाता है।समय समय पर यहां पर धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किये जाते है।


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